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चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

by महर्षि चरक व अग्निवेश

Source: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (origin)

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DevanagariSanskritpublished639 pages

Page 286 of 639

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Page 286

२६८ चरकसंहिता [ अ० २४
सब्जियों के खाने से, पानी में रहने वाले तथा जलीय प्रदेश में रहने वाले,
तथा पर्वत पर रहने वाले और मांस खाने वाले पक्षियों ( बाज़, चील ) का
मांस खाने से, खट्टी दही, मस्तु, शुक्त ( कांजीभेद ), सुरा, सौवीरक ( कांजी
भेद ) के खाने से, विरुद्ध, सड़े, गले, दुर्गन्ध युक्त भोजनों के खाने से, भोजन
करके दिन में सोने से, तरल, स्निग्ध और भारी पदार्थों के सेवन से, बहुत
अधिक खाने से, क्रोध, धूप, और अग्नि के अधिक सेवन से, वमन के वेग को
रोकने से, रक्त के दूषित होने के समय ( शरत्काल ) में रक्त का मोक्षण न
करने से, परिश्रम से, चोट से, सन्ताप से, अजीर्ण ( बिना भोजन के पचे पुनः
खाने ) से, अध्यशन अर्थात् भोजन के जीर्ण हुए बिना फिर भोजन करनें से
तथा शरत्काल में स्वभाव से ही रक्त दूषित हो जाता है । रक्त के दूषित होने
से नाना प्रकार के रक्तजन्य रोग उत्पन्न होते हैं ॥ ५-१० ॥
मुखपाकोऽक्षिरागश्च पूतिघ्राणास्यगन्धता ॥ ११ ॥
गुल्मोपकुश-वीसर्प-रक्तपित्त-प्रमीलकाः ।
विद्रधी रक्तमेहश्च प्रदरो वातशोणितम् ॥ १२ ॥
वैवर्ण्यमग्निनाशश्च पिपासा गुरुगात्रता ।
सन्तापश्चातिदौर्बल्यमरुचिः शिरसश्च रुक् ॥ १३ ॥
विदाहश्चान्नपानस्य तिक्ताम्लोद्गिरणं क्लमः ।
क्रोधप्रचुरता बुद्धेः संमोहो लवणास्यता ॥ १४ ॥
स्वेदः शरीरदौर्गन्ध्यं मदः कम्पः स्वरक्षयः ।
तन्द्रा निद्रातियोगश्च तमसश्चातिदर्शनम् ॥ १५ ॥
कण्डूरुकोष्ठपिडकाः कुष्ठचर्मदलादयः ।
विकाराः सर्व एवैते विज्ञेयाः शोणिताश्रयाः ॥ १६ ॥
शीतोष्णस्निग्धरूक्षाद्यैरुपक्रान्ताश्च ये गदाः ।
सम्यक् साध्या न सिध्यन्ति रक्तजांस्तानविभावयेत् ॥ १७ ॥
यथा मुखपाक, आंख की सूजन ( आंख की लालिमा ), नाक से बदबू,
मुख का दुर्गन्ध, गुल्म, उपकुश, वीसर्प, रक्त पित्त, प्रमीलक, विद्रधि, रक्त
प्रमेह, प्रदर, वातरक्त, विवर्णता, जाठराग्नि का नष्ट होना, प्यास, शरीर का
भारीपन, सन्ताप, अतिनिर्बलता, अरुचि, शिर की दर्द, खान-पान का विदाह
( अपचन ), कडुवी या खट्टी डकार आना, निष्क्रियता, क्रोध की अधिकता,
बुद्धिभ्रंश, मुख का नमकीनपन, पसीना आना, शरीर की दुर्गन्धता, मद,
कम्पन, स्वरनाश, तन्द्रा, निद्रा का अधिक आना और आंखों के सामने