चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)
Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation
by महर्षि चरक व अग्निवेश
Source: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (origin)
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Read in context२४० चरकसंहिता [ अ० २०
गुल्फग्रहश्च, पिण्डिकोद्वेष्टनं च, गृध्रसी च, जानुभेदश्च, जानुविश्लेषश्च,
ऊरुस्तम्भश्च, ऊरुसादश्च, पाङ्गुल्यं च, गुदभ्रंशश्च, गुदार्तिश्च, वृषणोत्क्षे-
पञ्च, शेफःस्तम्भश्च, वङ्क्षणानाहश्च, श्रोणिभेदश्च, विड्भेदश्च,
उदावर्तश्च, खञ्जत्वं च, [कुब्जत्वं च,] वामनत्वं च, त्रिकग्रहश्च,
पृष्ठग्रहश्च, पार्श्वावमर्दश्च, उदरावेष्टश्च, हृन्मोहश्च, हृद्द्रवश्च, वक्ष-
उद्धर्षश्च, वक्षउपरोधश्च, (वक्षस्तोदश्च,) बाहुशोषश्च ग्रीवास्तम्भश्च,
मन्यास्तम्भश्च, कण्ठोद्ध्वंसश्च, हनुस्तम्भश्च, ओष्ठभेदश्च, (अक्षिभेदश्च,)
दन्तभेदश्च, दन्तशैथिल्यं च, मूकत्वं च (गद्गदत्वं च,) वाक्सङ्गश्च,
कषायास्यता च, मुखशोषश्च, अरसज्ञता च, [अगन्धज्ञता च, घ्राण-
नाशश्च,] कर्णशूलं च, अशब्दश्रवणं च, उच्चैःश्रुतिश्च, बाधिर्यं च,
वर्त्मस्तम्भश्च, वर्त्मसंकोचश्च, तिमिरं च, अक्षिशूलं च, अक्षिव्युदासश्च,
भ्रूव्युदासश्च, शङ्खभेदश्च, ललाटभेदश्च, शिरोरुक् च, केशभूमिस्र्फुटनं
च, अर्दितं च, एकाङ्गरोगश्च, सर्वाङ्गरोगश्च, [पक्षवधश्च,] आक्षेपकश्च
दण्डकश्च, श्रमश्च, भ्रमश्च, वेपथुश्च, जृम्भा च, विषादश्च, (हिक्का च),
अतिप्रलापश्च, ग्लानिश्च, रौक्ष्यं च, पारुष्यं च, श्यावारुणावभासता
च, अस्वप्नश्च, अनवस्थितत्वं चेत्यशीतिर्वातविकारा वातविकाराणा-
मपरिसंख्येयानामाविष्कृततमा व्याख्याताः ॥ ११ ॥
सबसे प्रथम वात रोगों को कहते हैं। यथा—नखों का टूटना, विपादिका
(पांव का फटना ), पादशूल (पांव की वेदना ), पादभ्रंश, पादसुप्तता (पांव
का सोना, ज्ञानशून्यता ), वातलक्षुका, गुल्फग्रह; पिण्डिकोद्वेष्टन (पिण्डलियों
में ऐंठन ), गृध्रसी, जानुभेद और जानु विश्लेष, ऊरुस्तम्भ, ऊरुसाद, पंगुता,
गुदभ्रंश, गुदार्ति, वृषणोत्क्षेप (अंडकोश का ऊपर खींचना ) शेफस्तम्भ ( शिश्न
में अकड़ाहट रहना ), वंक्षण में आनाह, श्रोणिभेद ( नितम्बों का फटना ),
विड्भेद (मलभेद ), उदावर्त्त, खञ्जत्व (लंगड़ापन ), कुब्जत्व (कुबड़ापन ),
वामनत्व (नाटापन ), त्रिकग्रह, पृष्ठग्रह. पार्श्वावमर्द (पसलियों की पीड़ा),
उदरावेष्टन (पेट में ऐंठन ), हृन्मोह (हृदय की मूर्छा ), हृद्द्रव (हृदय का
द्रवित या धड़कन अधिक होना ) वक्षःउद्धर्ष (छाती में पीड़ा ), वक्षोपरोध
(छाती का रुकजाना ), बाहुशोष (भुजा का सूखना ), ग्रीवास्तम्भ (ग्रीवा
का अकड़ना ), मन्यास्तम्भ (घाड़ की अकड़ाहट ), कण्ठोद्ध्वंस (स्वरभंग ),
हनुस्तम्भ (मुख का, जबड़ों का खुला रहना ), ओष्ठभेद (ओष्ठ की विदीर्णता)
दन्तभेद (दांतों का टूटना ), दन्तशैथिल्य (दांतों की शिथिलता ), मूकत्व
(गूंगापन ), वाक्संङ्ग (वाणी का रुकना ), मुख का कसैलापन, मुख की