बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
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• उदुम्बरवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ७५ | वृक्षस्य फल-पुष्पविकृतिद्वारा
अर्जुनवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ७५ | जलज्ञानम् ८८
निर्गुण्डीवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ७६ | कण्टकारिकावृक्षद्वारा जलज्ञानम् ८८
बदरीवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ७७ | खर्जूरवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ८८
सपलाशबदरीवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ७७ | कर्णिकार-पलाशवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ८८
बिल्वयुक्तोदुम्बरवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ७७ | बाष्प-धूमद्वारा जलज्ञानम् ८९
फल्गुवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ७८ | धान्यद्वारा जलज्ञानम् ८९
कम्पिल्लकवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ७८ | मरुदेशे शिराज्ञानम् ८९
कुमुदाशिराज्ञानम् ७९ | पीलुवृक्षद्वारा शिराज्ञानम् ९०
विभीतकवृक्षद्वारा शिराज्ञानम् ७९ | पीलुवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ९०
सप्तपर्णवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ८० | करीरवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ९१
वल्मीकयुक्तसप्तपर्णवृक्षद्वारा | रोहीतकवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ९१
जलज्ञानम् ८० | अर्जुनवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ९१
वृक्षाधःस्थितदर्दुरद्वारा जलज्ञानम् ८१ | धत्तूरवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ९२
करञ्जवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ८२ | बदरी-रोहितसंयोगद्वारा जलज्ञानम् ९२
मधूकवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ८२ | करीर-बदरीसंयोगद्वारा जलज्ञानम् ९३
तिलकवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ८३ | पीलुयुक्तबदरीवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ९३
कदम्बतः पश्चिमस्थितवल्मीकद्वारा | ककुभ-करीरसंयोगद्वारा जलज्ञानम् ९३
जलज्ञानम् ८३ | अर्जुन-बिल्वसंयोगद्वारा जलज्ञानम् ९३
ताल-नालिकेरद्वारा शिराज्ञानम् ८३ | बल्मीकोपरि दुर्वा-कुशादिद्वारा
कपित्थवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ८४ | जलज्ञानम् ९३
अश्मन्तकवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ८४ | कदम्ब-दूर्वायुतवल्मीकद्वारा
हरिद्रवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ८५ | जलज्ञानम् ९४
जलरहितप्रदेशे जलचिह्नद्वारा | वल्मीकत्रयमध्यस्थितरोहीतक-
जलज्ञानम् ८५ | वृक्षद्वारा जलज्ञानम् ९४
जलरहित-जलसहितदेशज्ञानम् ८६ | शमीवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ९४
वल्मीकयुक्ततिलकादिवृक्षद्वारा | एकस्थानस्थितपञ्चवल्मीकद्वारा
जलज्ञानम् ८६ | जलज्ञानम् ९५
तृणरहित-तृणसहितप्रदेशे धनज्ञानम् ८६ | पलाशयुतशमीवृक्षद्वारा जलज्ञानम् ९५
सकण्टकाकण्टकवृक्षद्वारा धनज्ञानम् ८७ | वल्मीकयुतरोहीतकवृक्षद्वारा
ताडिते सति भूशब्दद्वारा जलज्ञानम् ८७ | जलज्ञानम् ९५
वृक्षशाखाद्वारा जलज्ञानम् ८७ | श्वेतकण्टकयुतशमीवृक्षद्वारा
| जलज्ञानम् ९५
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