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सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished760 पृष्ठ

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६१. गोलक्षणाध्यायः अश्वस्य शुभलक्षणम् १८८
गोलक्षणाध्याये आगमप्रदर्शनम् १६८ | अश्वस्याशुभरोमावर्तलक्षणम् १९०
गोरशुभलक्षणम् १६८ | अश्वस्य शुभरोमावर्तलक्षणम् १९०
वृषभस्याशुभलक्षणम् १६९ | अश्वस्य दश ध्रुवावर्ताः १९२
शुभवृषभलक्षणम् १७१ | अश्वानां वयोज्ञानप्रकारः १९३
हंससंज्ञकवृषभलक्षणम् १७३ |
अन्यच्छुभवृषभलक्षणम् १७४ | ६७. हस्तिलक्षणाध्यायः
| भद्रजातिहस्तिलक्षणम् १९५
६२. श्वलक्षणाध्यायः | मन्दजातिहस्तिलक्षणम् १९५
शुनः लक्षणम् १७६ | मृग-सङ्कीर्णजातिहस्तिलक्षणम् १९५
शुनीलक्षणम् १७६ | हस्तिनः उन्नतिदैर्घ्यपरिणाहानां
६३. कुक्कुटलक्षणाध्यायः | प्रमाणम् १९६
शुभकुक्कुटलक्षणम् १७८ | हस्तिनः वर्णमदलक्षणम् १९६
अशुभकुक्कुटलक्षणम् १७८ | हस्तिनः शुभलक्षणानि १९७
कुक्कुटीलक्षणम् १७९ | हस्तिनः अशुभलक्षणानि १९८
६४. कूर्मलक्षणाध्यायः | ६८. पुरुषलक्षणाध्यायः
कूर्मस्य शुभलक्षणम् १८० | पुरुषाभिधेयार्थसंग्रहः २००
अन्यदपि कूर्मस्य शुभलक्षणम् १८० | पुरुषपादयोः शुभलक्षणानि २०२
| पादयोरशुभलक्षणानि २०३
६५. छागलक्षणाध्यायः | जङ्घोरुजानूनां लक्षणम् २०४
छागस्य शुभाशुभलक्षणम् १८२ | जङ्घयोर्लोमलक्षणम् २०४
छागस्य शुभलक्षणम् १८२ | जानुलक्षणम् २०४
कुट्टकछागलक्षणम् १८३ | लिङ्गलक्षणम् २०५
कुटिलछागलक्षणम् १८३ | वृषणलक्षणम् २०६
जटिलछागलक्षणम् १८४ | मणि-मूत्रलक्षणम् २०६
वामनछागलक्षणम् १८४ | बस्ति-शुक्र-मैथुनानां लक्षणानि २०८
कुट्टककुटिलजटिलवामन- | स्फिगलक्षणम् २०९
छागफलम् १८५ | कटि-जठरलक्षणम् २०९
छागानामशुभलक्षणम् १८५ | पार्श्वकुक्षोदरलक्षणम् २०९
छागानां शुभलक्षणम् १८५ | नाभिलक्षणम् २१०
६६. अश्वलक्षणाध्यायः | उदरवर्तिवलिलक्षणम् २११
| पार्श्वलक्षणम् २१२
अश्वप्रदेशज्ञानम् १८७ | चूचुकलक्षणम् २१२
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