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बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)

Brihan Naradiya Purana with Sanskrit & Hindi Commentary

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,008 पृष्ठ

प्रारंभिक पृष्ठ व विषय-सूची

बृहन्नारदीयपुराणम्
( पूर्वभागः )
अनुवादक
तारिणीश झा
व्याकरणवेदान्ताचार्य
शक १९१० : सन् १९८९
हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग
१२, सम्मेलन मार्ग, इलाहाबाद

बृहन्नारदीयपुराणम्
पूर्वभागः
[हिन्दी अनुवाद सहित]
⊙
अनुवादक
तारिणीश झा
व्याकरणवेदान्ताचार्य
⊙
शक १९१० : सन् १९८६
हिन्दी साहित्य सम्मेलन • प्रयाग
१२, सम्मेलन मार्ग, इलाहाबाद

बृहन्नारदीयपुराणम्
पूर्वभागः
[हिन्दी अनुवाद सहित]
अनुवादक
तारिणीश झा
व्याकरणवेदान्ताचार्य
शक १९१० : सन् १९८९
हिन्दी साहित्य सम्मेलन • प्रयाग
१२, सम्मेलन मार्ग • इलाहाबाद

◎
प्रकाशक
डॉ० प्रभात मिश्र शास्त्री
प्रधान मंत्री : हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग
१२, सम्मेलन मार्ग, इलाहाबाद
◎
प्रकाशन वर्ष : शक १९१० : सन् १९८९
प्रथम संस्करण
मूल्य : २००.००
◎
मुद्रक
डॉ० प्रभात मिश्र शास्त्री
सम्मेलन मुद्रणालय, प्रयाग

प्रकाशकीय
यथा श्रेष्ठा नदी गङ्गा पुष्करं च सरो यथा ।
⊙ ⊙ ⊙ ⊙ ⊙ ⊙ ⊙ ⊙ ⊙ ⊙ ⊙ ⊙ ⊙
तथैव नारदीयं तु पुराणेषु प्रकीर्तितम् ॥
(ना० पु० अ० १२५)
हर्ष को बात है कि हमारो पुराण-प्रकाशन योजना का कार्य 'श्रेयांसि बहुविघ्नानि' के रहते हुए भी सुचारु
रूप से चल रहा है । भगवान् की कृपा बनी रही तो आगामी कुछ वर्षों में और भी कतिपय पुराण जनताजना-
र्दन के करकमलों में पहुँचा देंगे ।
सम्प्रति बृहन्नारदीयपुराण (पूर्वभाग) हम प्रस्तुत कर रहे हैं । वैसे तो इस महापुराण में छन्द, ज्योतिष,
तन्त्र, मन्त्र, वेदान्त आदि विविध विषयों पर अच्छा प्रकाश डाला गया है, पर त्रिस्कन्ध ज्योतिष का विवरण
बहुत प्रामाणिक एवं सटीक है । 'हाथ कंगन को आरसी क्या', पाठक गण स्वयं इसे पढ़कर अनुभव करेंगे ।
इस महापुराण का अनुवाद आज से ४० वर्ष पूर्व सम्मेलन के प्राण स्वनामधन्य बाबू पुरुषोत्तमदास
टण्डन की अभिप्रेरणा से सम्मेलन ने कराया था । इस अन्तराल में सम्मेलन को कितनी उच्चावच स्थिति को
देखना पड़ा, यह प्रबुद्ध जनता से छिपी हुई बात नहीं है । सम्मेलन की अक्ष्य स्थिति में पुराण-प्रकाशन-कार्य
बन्द कर दिया गया था । आदाता काल के बाद पुनर्मन्त्रिमण्डल काल में हमने इस कार्य को पुनरुज्जीवित
किया । तबसे कई पुराणों का सुचारु प्रकाशन अब तक हो चुका है । प्रकाशन-क्रम में यह छठा पुष्प (बृहन्नारदीय
पुराण का प्रकाशन) पाठकों को समर्पित है ।
इस पुराण का अनुवाद कार्य दो अनुवादकों ने पूर्ण किया था । इस पुराण में कुल २०७ अध्याय हैं,
जिनमें अध्याय १ से ५३ तक डॉ० घनश्याम त्रिपाठी ने अनुवाद किया और अध्याय ५४ से २०७ तक (कुल १५४
अध्यायों का) अनुवाद आचार्य प्रवर श्री तारिणीश झा ने किया । साथ ही संशोधन-सम्पादन कार्य भी श्री झा ने
सम्पन्न किया है । अतएव हम उन्हें धन्यवाद ज्ञापित करते हैं और इस बृहत् कार्य को सम्पन्न करने में श्री झा के
सहयोगी पण्डित श्री रुद्रप्रसाद मिश्र, श्री हरिमोहन पाण्डेय और विशेषकर साहित्य विभागाध्यक्ष श्री हरिमोहन
मालवीय के प्रति हम धन्यवाद व्यक्त करते हैं ।
विश्वास है, सहृदय पाठकगण हमारे इस महत्त्वपूर्ण प्रकाशन को अपनाकर हमें प्रोत्साहित करेंगे ।
महाकुंभ पर्व डॉ प्रभात शास्त्री
संवत् २०४५ प्रधान मंत्री
हिन्दी-साहित्य, सम्मेलन, प्रयाग
१२, सम्मेलन मार्ग, इलाहाबाद ।

विषय-सूची
अध्याय विषय पृष्ठ संख्या
१ नैमिषारण्य में मुनियों की तपस्या १
२ नारद द्वारा विष्णु की स्तुति ७
३ भूगोल वर्णन १२
४ मार्कण्डेय मुनि का चरित्र वर्णन १९
५ मार्कण्डेय मुनि की कथा २७
६ गंगा-माहात्म्य-वर्णन ३३
७ गंगा-माहात्म्य-वर्णन ३८
८ गंगा माहात्म्य वर्णन ४४
९ गंगाजल के सम्पर्क से राजा सौदास का शापोद्धार ५४
१० राजा बलि से देवताओं की पराजय ६५
११ गङ्गोत्पत्ति-वर्णन ६९
१२ धर्माख्यान-प्रसंग ८४
१३ धर्माख्यान-प्रसंग ९१
१४ पापों का प्रायश्चित्त तथा श्राद्ध-पंचक निरूपण १०१
१५ नरकयातना तथा गंगानयन वर्णन १०८
१६ भगीरथ द्वारा गंगा का आनयन और अपने कुल का उद्धार ११९
१७ उद्यापन सहित शुक्ल पक्षीय द्वादशीव्रत-निरूपण १२८
१८ उद्यापन विधि सहित लक्ष्मीनारायण-व्रत का वर्णन १३८
१९ विष्णु मन्दिर में ध्वजारोपण १३६
२० सोमवंशी राजा सुमति का अपने पूर्वजन्म का इतिहास-कथन १४२
२१ हरिपंचरात्र व्रत का वर्णन १४६
२२ विशेष मास में व्रत करने का वर्णन १५१
२३ भद्रशील ब्राह्मण का उपाख्यान १५३
२४ ब्राह्मण, क्षत्रिय आदि के सदाचार-वर्णन १६१
२५ स्मार्ताचार और आश्रम धर्मनिरूपण १६३
२६ द्विजातियों के वेदाध्यन आदि धर्मों का निरूपण १६८
२७ गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यासी के धर्म का निरूपण १७१
२८ श्राद्ध वर्णन १७६
२९ तिथियों का निर्णय १८४