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ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)

ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य सहित)

Brahma Sutras with Shankara Bhashya - Gita Press

by महर्षि बादरायण / आदि शङ्कराचार्य

Source: गीताप्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस गोरखपुर · 1950 (origin)

DevanagariSanskritpublished417 pages

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सूत्र ३९-४० ] अध्याय १ ७५
का वाचक है; फिर २४वें सूत्रसे कठोपनिषद्में वर्णित अङ्गुष्ठमात्र पुरुषके
स्वरूपपर विचार चल पड़ा; क्योंकि दहराकाशकी भाँति वह भी हृदयमें ही
स्थित बताया गया है। उसी प्रकरणमें देवादिके वेदविद्यामे अधिकार-सम्बन्धी
प्रासङ्गिक विषयपर विचार चल पड़ा और अड़तीसवें सूत्रमे वह प्रसङ्ग समाप्त
हुआ। फिर उनतालीसवें सूत्रमे पहलेके छोड़े हुए अङ्गुष्ठमात्र पुरुषके स्वरूपपर
विचार किया गया। इस प्रकार बीचमें आये हुए प्रसङ्गान्तरोंपर विचार करके
अब पुनः दहराकाशविषयक छूटे हुए प्रकरणपर विचार आरम्भ किया
जाता है—
ज्योतिर्दर्शनात् ॥ १ । ३ । ४० ॥
ज्योतिः = यहाँ 'ज्योति' शब्द परब्रह्मका ही वाचक है; दर्शनात् = क्योंकि
श्रुतिमे ( अनेक स्थलोपर ) ब्रह्मके अर्थमे 'ज्योतिः' शब्दका प्रयोग देखा जाता है।
व्याख्या-छान्दोग्योपनिषद्के अन्तर्गत दहराकाशविषयक प्रकरणमे यह कहा
गया है कि 'य एष सम्प्रसादोऽस्माच्छरीरात्समुत्थाय परं ज्योतिरुपसम्पद्य स्वेन
रूपेणाभिनिष्पद्यते।' (८।३।४) अर्थात् 'यह जो संप्रसाद (जीवात्मा)
है, वह शरीरसे निकलकर परम ज्योतिको प्राप्त हो अपने स्वरूपसे सम्पन्न हो
जाता है।' इस वर्णनमे जो 'ज्योतिः' शब्द आया है, वह परब्रह्म परमात्माका
ही वाचक है; क्योंकि श्रुतिमे अनेक स्थलोपर ब्रह्मके अर्थमें 'ज्योतिः' शब्दका
प्रयोग देखा जाता है। उदाहरणके लिये यह श्रुति उद्धृत की जाती है—
'अथ यदतः परो दिवो ज्योतिर्दीप्यते।' (छा० उ० ३। १३।७) अर्थात्
'इस द्युलोकसे परे जो परम ज्योति प्रकाशित हो रही है।' इसमे 'ज्योतिः' पद
परमात्माके ही अर्थमे है; इसका निर्णय पहले भी किया जा चुका है। ऊपर
दी हुई (८।३।४) श्रुतिमे 'ज्योतिः' पदका 'परम्' विशेषण आया है;
इससे भी यही सिद्ध होता है कि परब्रह्मको ही यहाँ 'परम ज्योति' कहा गया है।
सम्बन्ध—उपर्युक्त सूत्रमें 'दहर'के प्रकरणमें आये हुए 'ज्योतिः' पदको
परब्रह्मका वाचक बताकर उस प्रसङ्गको वहीं समाप्त कर दिया गया। अब यह
जिज्ञासा होती है कि 'दहराकाश'के प्रकरणमें आया हुआ 'आकाश' शब्द
परब्रह्मका वाचक हो, परन्तु छा० उ० (८।१४।१) मे जो 'आकाश' शब्द आया है,
वह किस अर्थमे है? अतः इसका निर्णय करनेके लिये आगेका सूत्र प्रारम्भ करते हैं--