ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
by आचार्य ब्रह्मगुप्त
DevanagariHindipublished737 pages
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छिद्रे स्वधिया⁵ क्षेप्यं¹ समं तथा⁶ पारदं² यदा³ भ्रमति ।
कालसममिष्टमानैश्चक्रकमुतान⁴मूर्द्धं वा ॥ ५१ ॥
कीलस्योपरि¹गमिभिन तिर्यक्³ सूत्रके धूतमलाषु² ।
प्राग्वन्नलके प्रक्षिप्य नाडिका श्रवति⁴ पानीये ॥ ५२ ॥
५१. (घ) (वि०—इसकी क्रमसंख्या ५२ है)
\t१. ष्येप्यं for (क्षेप्यं) (ग) 'क्षेप्यं' लुप्त है ।
\t२. पारतं (ग) (च) for (पारदं)
\t३. यथा (ग) (च) for (यदा)
\tमुत्तान (ग) (च) for (कमुतान)
(ग) ५. स्वधियां समं for (स्वधिया क्षेप्यं)
\t(वि०—इसकी श्लोक संख्या ५५ है)
(च) १. ष्येप्यम् for (क्षेप्यम्)
\t(वि०—श्लोक संख्या ५२ अंकित है)
(ङ) १. क्षिप्त्वा for (क्षेप्यं)
\t३. 'यदा' लुप्त ।
\t६. यथा (for) तथा
\t४. समुत्तान for (कमुतान)
\t७. मूर्ध्वं वा for (मूर्द्धं वा)
५२. (घ) (वि०—इसकी क्रम संख्या ५३ है)
\t१. गामिनि न (ग) गामिनितत्पर्यय for (गमिभिन)
\t२. मलाबु (ङ) मलाबु for (मलाषु)
(ग) (वि०—इसकी श्लोक संख्या ५६ है)
(च) १. परिगामिनि (ङ) for (परिगमिभिन)
\t(वि०—श्लोक संख्या ५३ अंकित है)
(ङ) ३. तत्पर्य for (तिर्यक्)
\t४. स्रवति for (श्रवति)