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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

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DevanagariHindipublished737 pages

Page 681 of 737

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Page 681

( २६७ )
यत्स्पष्टीकरणार्थं गोलादुत्क्षेप$^१$तत्कृतं सर्वं$^३$ गोलाध्यायः$^२$ ।
सप्तत्यार्याणामेक$^४$ विंशोयम् ॥ ७० ॥
मध्याद्यमिह यदुक्तं तत्प्रत्यक्षमिव दर्शयति यस्मात् ।
तस्मादाचार्यत्वं गोलविदो$^१$ भवति नान्यस्य ॥ ७१ ॥
आचार्येण$^१$ ज्ञातः$^२$ श्रीषेणार्यभटविष्णुचंद्राद्यैः$^३$ ।
गोले$^४$ यस्मात्तस्माद् ब्राह्मो$^५$ गोलः कृतः स्पष्टः ॥ ७२ ॥
गणितज्ञो गोलज्ञो गोलज्ञो ग्रहगतिं विजानाति ।
यो गणितगोलबाह्यो जानाति ग्रहगतिं$^२$ सः$^३$ कथम् ॥ ७३ ॥
$^१$इति ब्रह्मगुप्ते गोलाध्यायः (२१ अध्यायः समाप्तः)
एक विंशतितमः समाप्तः

७०. (घ) १. दुत्प्रेक्ष (ग) दुत्प्रेक्ष्य (ङ) for (दुत्क्षेप)
२. (वि०- यह दूसरी पंक्ति का आरम्भिक शब्द है) (ग) (ङ)
(ग) ३. सर्वा for (सर्वं) ४. समाप्ति सूचक ॥ छः ॥ ॥छः॥ ॥छः॥
(च) १. दुत्प्रेक्षतत्कृतं for (दुत्क्षेपतत्कृतं)
(ङ) +इति श्री ब्राह्मस्फुट सिद्धान्ते गोलाध्यायो नामैकविंशतितमो ऽध्यायः+
(वि०-वस्तुतः गोलाऽध्याय यहां ७० वें श्लोक पर समाप्त हो गया है।
परन्तु उपर्युक्त प्रति में यन्त्राध्याय के पहले तीन श्लोक मिलाकर ७३ पर
समाप्त किया है)
७१. (घ) १. गोलो भवति for (गोलविदो भवति) (वि० - इसकी क्रमसंख्या १ है)
(ङ) वि० - यह 'यन्त्राध्याय' का प्रथम श्लोक है)
७२. (घ) १. आचार्येर्न (ङ) for (आचार्येण) (ग) २. ज्ञाता for (ज्ञातः)
३. 'विष्णु' पद लुप्त है। ४. गोलो (ङ) (च) for (गोले)
५. ब्राह्मो (ङ) for (ब्राह्मो) (वि०-इसकी क्रमसंख्या २ है)
१. आचार्येर्न for (आचार्येण) (ङ) (वि० - यह यन्त्राध्याय का द्वितीय श्लोक है)
७३. (घ) १. इति भह जिष्णुसुतब्रह्मगुप्त विरचिते ब्रह्मस्फुट सिद्धांतो गोलाध्यायः एक
विंशतितमः । for (इति ब्रह्मगुप्ते गोलाध्यायः)
(ग) २. ग्रहति for (ग्रहगतिं) ३. स (ङ) (च) for (सः)
१. ये पद लुप्त है (वि० - इसकी क्रमसंख्या ३ है)
(च) १. इति भह जिष्णुसुत ब्रह्मगुप्त विरचिते ब्राह्म स्फुटसिद्धांतो गोलाध्यायः
एक विंशतितमः for (इति ब्रह्मगुप्ते गोलाध्यायः २१ अध्यायः समाप्तः)
(ङ) (वि० - यह यन्त्राध्यायः का तीसरा श्लोक है)