ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
by आचार्य ब्रह्मगुप्त
DevanagariHindipublished737 pages
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( २३६ )
यो जानाति^२ युगगतं कथितार्दयिमास^४ शेषकादिष्टात् ।
अवभाव^१ शेषतो वा तद्योगाद्वासकुदृज्ञः^३ ॥ ११ ॥
एकेष्टदिवसघटिका विनाडिका मंडलादिशेषकयोः ।
सदृश^१च्छेदो धृतयो^२स्तद्घात्^३ महर्गणायमतः ॥ १२ ॥
हतयो^३परस्परं यच्छेषं^४ गुणकारभागहारकयोः ।
तेन हतौ^२ निच्छेदौ^५ तावेव परस्परं हतयोः^१ ॥ १३ ॥
लब्धमध्येधः^३ स्थाप्यं यथेष्ट गुणकारसंगुणं शेषम्^४ ।
शुध्यति तथैक^१हीनं गुणकः स्थाप्यः पलं^२ चांत्यात्^५ ॥ १४ ॥
११. (घ) १. अवमाव (ग) (च) (ङ) for (अवभाव)
(ग) (वि०—इसकी श्लोक संख्या २५ है)
२. यो युगगतं for (यो जानाति युगगतं)
(च) ३. कुदृज्ञः for (कुदृज्ञः)
(ङ) (वि---श्लोक संख्या २५ है)
२. जानाति यो for (यो जानाति) ४. दधिमास for (दयिमास)
१२. (घ) १. सदृश (च) for (सदृश) २. हृतयो (च) for (धृतयो)
३. स्तद्घात for (स्तद्घात्)
(ग) यह श्लोक इस प्रति में उपलब्ध नहीं है ।
(च) ३. तद्घात् for (तद्घात्)
(ङ) श्लोक अनुपलब्ध है ।
१३. (घ) १. हृतयोः (ग) (ङ) for (हतयोः)
२. हृतौ (ग) (च) for (हतौ)
(ग) ३. हृतयोः (च) for (हतयो)
(वि०—इसकी श्लोक संख्या ६ है) (ङ)
(ङ) ३. हृतयोः for (हतयो) ४. यच्छेषं for (यच्छेषं)
५. निश्छेदौ for (निच्छेदौ)
१४. (घ) १. यथैक (च) (ङ) for (तथैक)
२. स्थाप्यपलं (ग) स्थाप्यफलं for (स्थाप्यः पलं)
(ग) ३. लब्धमध्योध for (लब्धमध्येधः) ४. शेषे for (शेषं)
५. वांत्यात् for (चांत्यात्)
(वि०—इसकी श्लोक संख्या १० है) (ङ)
(च) ५. चाप्तात् or चात्यात् for (चांत्यात्)
(ङ) ३. लब्धमघोऽधः for (लब्धमध्येधः)