ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
by आचार्य ब्रह्मगुप्त
DevanagariHindipublished737 pages
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( २१५ )
²कोणाच्छायाकर्णेन भक्तमवलंबकेन संगुणितम् ।
इष्टापक्रमजीवा त्रिप्रश्नोक्त्या स्फुटोर्कोतः¹ ॥ ५८ ॥
³मध्यमगति ⁴स्फुटगति त्रिप्रश्नात् सोत्तरान् विजानाति यः¹ ।
स भवत्याचार्यो ⁵ब्रह्मोक्ता ²ज्ञानतंत्रज्ञाः ॥ ५९ ॥
अध्यायः पंचदश⁵स्त्रिप्रश्नस्योत्तरं यदीह नोक्तम् ।
⁶आर्याषिष्टचोक्तं तद्गोला²दुत्प्रेक्ष्य ³बुद्धिमता ॥ ६० ॥
⁴इत्तिब्रह्म गुप्ते त्रिप्रश्नाध्यायः
पंचदश अध्यायः समाप्तः
५८. (ङ) २. कोराच्छाया for (कोणाच्छाया) १. ऽर्कोजतः for (र्कोतः)
५९ (घ) १. 'यः' दूसरी पंक्ति का पहला पद है ।
२. तंत्रज्ञः (च) for (तंत्रज्ञाः)
(ग) ३. मध्यगतिः for (मध्यमगति)
४. स्पष्टगतिः for (स्फुटगति) १. 'यः' लुप्त है
५. वै ब्रह्मोक्तान्यान्य तंत्रज्ञा for (ब्रह्मोक्ताज्ञानतंत्रज्ञाः)
(ङ) ३. मध्यगति for (मध्यमगति) ४. स्पष्टगति for स्फुटगति)
६. त्रिप्रश्नान् for (त्रिप्रश्नात्) १. 'यः' लुप्त ।
५. ब्रह्मोक्तान् for (ब्रह्मोक्ता) २. योऽन्यतंत्रज्ञः for (ज्ञानतंत्रज्ञाः)
६०. (घ) १. यदिह (ग) (ङ) for (यदीह) २. दुप्रेक्ष्य for (दुत्प्रेक्ष्य)
३. बुद्धिमताः for (बुद्धिमता)
वि०—४. 'इति' से आरंभ कर 'समाप्त' तक मूल में लुप्त है ।
(ग) ५. त्रि for (स्त्रि) ६. तच्चार्याषिष्टचो यं for (आर्याषिष्टचोक्तं)
४. इति ब्रह्मसिद्धांते त्रिप्रश्नोत्तर पंचदशोध्यायः for (इत्ति ब्रह्मगुप्ते त्रिप्रश्ना-
ध्यायः)
(च) १. यदिह for (यदीह)
४. 'इति' से 'समाप्तः' तक समस्त लुप्त
(ङ) १. तच्चार्याषिष्टचाद्यं for (आर्याषिष्टचोक्तं)
२. गोलादुत्प्रेक्ष्य for (तद्गोलादुत्प्रेक्ष्य)