ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
by आचार्य ब्रह्मगुप्त
DevanagariHindipublished737 pages
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प्रश्नेपयोगहृतया लब्धा प्रक्षेपका गुणा लाभाः ।
ऊनाधिकोत्तराद्धं स्तद्यु तोनया स्वफलमूनं युतम् ॥ १६ ॥
मिश्रक व्यवहार समाप्तः
पदमेकहीनमुत्तरगुणितं संयुक्तमादिनांत्यधनम् ।
आदि युतान्त्यधनाद्धंमध्यधनं पदगंणं गुणितम् ॥ १७ ॥
उत्तरहीनाद्विगुणादिशेषवर्गं धनोत्तराष्ट्रवधे ।
प्रशिनप्य पदं शेषोनं द्विगुणोत्तरं हृतं गच्छः ॥ १८ ॥
एकोत्तरमेकाद्यं यदीष्टगच्छ्क्स्य भवति संकलितम् ।
तद् वियुतं गच्छ गुणितं तृ हूतं संकलितम् ॥ १६ ॥
१६. (घ) १. प्रक्षेपयोगहृतया (ग) (च) for (प्रश्नेपयोगहृतया)
२. लब्ध्वा for (लब्धा) ३. प्रक्षेपका (ग) प्रक्षेपक for (प्रश्नेपका)
४. त्तरास्तद्युतो (ग) (च) for (त्तराद्धंस्तद्युतो)
५. मूनयुतम् (ग) (च) for (मूनंयुतम्)
(ग) 'मिश्रक' से 'समाप्तः' तक अंकित नहीं है ।
(च) २. प्रक्षेपका for (प्रश्नेपका)
६. व्यवहारः for (व्यवहार)
१७. (ग) १. पदगुणं for (पदगंणं) २. गणितम् for (गुणितम्)
१८. (घ) १. उत्तरहीन (ग) (च) for (उत्तरहीना)
२. शेषवर्गं (ग) (च) शेषवग्रं for (शेषवर्गं)
३. प्रक्षिप्य (ग) (च) for (प्रशिनप्य)
४. हृतं (ग) यह पद अंकित नहीं है । for (हृतं)
(ग) ५. द्विगुणोत्तरं for (द्विगुणोत्तर)
(च) ४. हृतं for (हृतं)
१९. (घ) १. यदिष्ट (ग) (च) for (यदीष्ट) २. गच्छस्य (ग) (च) for (गच्छ्क्स्य)
३. हृतं (ग) त्रिहृतं for (तूहूतं)
(ग) ४. एकोत्तमेकाद्यं for (एकोत्तरमेकाद्यं)
५. गच्छ for (गच्छ) ६. संकलितं सकलितम् for (संकलितम्)
(च) ५. वियुतगच्छ for (वियुतगच्छ) ३. त्रिहृतं for (तूहूतं) ।