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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

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DevanagariHindipublished737 pages

Page 512 of 737

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Page 512

( १२६ )
अग्राशंकुतलैक्यं¹ तुल्यदिशोरन्तरं तथान्यदिशो⁴ ।
प्राच्यपरायाः⁵ शंकोः⁶ तलं दग्रे³ गृहो नं च² ॥ ४२ ॥
शंकुतल प्राच्यपरांतरं भुजो दक्षिणोत्तरं कर्णः² ।
दग्ज्या¹ तद्वर्गांतरमूलं दिङ्मध्यतः³ कोटिः ॥ ४३ ॥
उनाधिक³शंकुगुणाः स्वशंकुभक्ताः पृथक् स्वदग्द्याग्रे¹ ।
कृत्वो⁶नाधिकशंकु⁴दृष्टिं⁵ कृत्वोनशंकुवग्रे² ॥ ४४ ॥
४२. (घ) ३. शंकोस्तलं तदग्रे for (शंकोः तलं दग्रे)
२. भं वा (ग) for (नं च)
(ग) ४. तथान्य दिशोः for (तथान्यदिशो)
५. परयोः for (परायाः)
(ख) ६. शंको for (शंकोः)
३. तलं तदग्रे for (तलंदग्रे)
(क) १. तलेकां for (तलैक्यं) २. भ वा for (नं च)
४३. (घ) २. दक्षिणोत्तरः (ग) (च) for (दक्षिणोत्तरं)
१. दृग्ज्यातंद्वर्गांतर मूलं (ग) (च) for (दग्ज्यावर्गान्तरमूलं)
३. दिङ्मध्यत (च) for (दिङ्मध्यतः)
(क) ६. दुप उप स्वर्गतंर मूलं for (दग्ज्यातद्वर्गांतरमूलं)
४४. (घ) ३. ऊनाधिक (ग) (च) for (उनाधिक)
१. दृग्द्याग्रे (ग) सुदृग्ज्याग्रे for (स्वदग्द्याग्रे)
४. शंक for (शंकु)
२. शंकुवार्गं (शंकुवर्गे) (ग) शक्वर्गे for (शंकुवग्रे)
(ग) ५. दृश्यं for (दृष्टिं)
(च) १. स्वदृग्द्याग्रे for (स्वदग्द्याग्रे)
६. क्रत्वो for (कृत्वो)
२. शंकुवर्गे for (शंकुवग्रे)
(क) १. दृश्या for (स्वदग्द्याग्रे) २. शंकुः for (शंकुवग्रे)