Skip to content
SarvaKosh
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

Report a copyright issue

DevanagariHindipublished737 pages

Page 445 of 737

Read in context
Page 445

( ५६ )
विषुवत्कर्णविभक्तः १ छेद्यो वा द्वादशाहतः ३ शंकुः ।
शंकुकृति २ विहीनाया व्यासाद्धं कृतेः पदं दृग्ज्या ४ ॥ २७ ॥
दृग्ज्या द्वादश गुणिता ३ विभाजिता शंकुना ७ फल १ छाया ।
व्यासाद्धं ४ छेदहतं ५ विषुवत्कर्णाहतं ६ कर्णः ॥ २८ ॥
गुणितं वा द्वादशभिर्व्यासाद्धं २ शंकुनाहतं १ कर्णः ।
जीवा क्षयवृद्धिर्ज्याययुतहीना ज्या ३ क्रियतुल्यादौ ॥ २९ ॥
२७. (घ) १. विभक्तं (च) for (विभक्तः)
२. शंकुकृतिविहीनाया (ग) (क) (ख) for (शंकुकृतिविहीनाया)
(क) ३. हतः (ख) हतशंकुः for (हतःशंकुः)
(ख) ४. फलं दृग्जा for (पदंदृग्ज्या)
(च) द्वादशाहतः for (द्वादशाहतः)
२. शंकुकृतिविहीनाया for (शंकुकृतिविहीनाया)
२८. (घ) १. फलं (ग) (क) (ख) फलं for (फल)
२. कर्णं for (कर्ण)
३. +१२+ (च) +१२+
(ग) ४. व्यासाद्धच्छेदहतं for (व्यासाद्धं छेदहतं)
(क) ५. हतं (च) for (हतं)
(ख) ७. शांकुला for (शंकुना)
२६. (घ) १. हतं for (हतं) (ग) (क) (ख) हतकर्ण for (हतकर्णः)
(क) २. व्यासाद्धं (ख) व्यासाधं for (व्यासाद्धं)
(ख) ३. जा for (ज्या)