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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

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DevanagariHindipublished737 pages

Page 415 of 737

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Page 415

( २६ )
तद्भूुजफल कृतियोगान्मूलं कर्णः<sup>१</sup> पदेष्वयुग्युक्षु<sup>५</sup> ।
स्वपरिधिगुणा<sup>२</sup> क्रमोत्क्रमजीवा भांशै<sup>३</sup> ३६० हृ<sup>४</sup>तान्मन्दे ॥ १५ ॥
क्षयधनधनक्षयास्तत्फलानि शीघ्रेऽन्यथा धनं धनयोः ।
ऋणमृणयोर्योगा<sup>२</sup>न्तरमृणधनयोस्तुल्ययोः<sup>३</sup> शन्यं ॥ १६ ॥
तच्चापं मन्दफलं फलयोगान्तरवशाद्धनमृणं<sup>३</sup> वा ।
शीघ्रफलं तद्गुणिताद्व्या<sup>२</sup>सार्द्धात् कर्णालब्धधनुः ॥ १७ ॥ ३२७०
देशान्तरे खमध्ये<sup>१</sup> भुजफलचापे भुजांतरे च कृते ।
उन्मण्डलेऽर्क<sup>२</sup> चन्द्रौ स्पष्टौ रविचरदले क्षितिजे ॥ १८ ॥
अर्कोदया<sup>१</sup>स्तमययोर्विना चरार्द्धेन रात्रिदिनदलयोः ।
न स्फुटमार्यभटोक्तं स्पष्टीकरणं स्फुटोक्तिरतः ॥ १६ ॥

१५. (घ) १. कर्णं पटेष्वग्युक्षुः for (कर्णः पदेष्वयुग्युक्षु)
२. गुणाः (च) for (गुणा)
३. म्यांशे for (भांशै ३६०) (ग) हृताफलं मंदे for (हृतान्मन्दे)
४. मांदेः (क) हृतामांदो (ख) हृतामन्दे for (हृतान्मन्दे)
(क) ५. पदेष्वयुक् युक् स्यात् for (पदेष्वयुग्युक्षु)
(ख) ६. क्रमोक्रमजीवा for (क्रमोत्क्रमजीवा)
(च) १. कर्णंपदेष्वयुक्षः for (कर्णः पदेष्वयुग्युक्षु)
३. ज्यां (भां) शै for (भांशै) ४ हृतामंदं for (हृतान्मन्दे)
१६. (घ) १. धनयोः for (धनयोस्)
(ग) २. योगोत्तर for (योगान्तर)
३. तुल्ययो for (तुल्ययोः)
१७. (घ) १. गुणुता for (गुणिताद्)
(ग) २. व्यासाद्धैत् (क) व्यासोर्द्धात् for (व्यासार्द्धात्)
(क) ३. मृणांवति for (मृणांवा)
(च) १. तद्गुणिताद् for (तद्गुणिताद्)
१८. (घ) १. स्वमध्यो (ग) स्वमध्ये (क) स्वमध्यौ (ख) स्वमध्यो for (खमध्ये)
(च) १. स्वमध्यो for (खमध्ये)
२. र्का for (ऽर्क)
१६. (ख) १. अर्कोदयास्तममयोर्विना for (अर्कोदयास्तमययोर्विना)
२. राभि for (रात्रि)
(च) १. अर्ककोदयास्तमययोर्विना for (अर्कोदयास्तमययोर्विना)