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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

by आचार्य ब्रह्मगुप्त

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DevanagariHindipublished737 pages

Page 408 of 737

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Page 408

( २२ )
मध्यगतिज्ञं वीक्ष्य¹ श्री³षेणार्यभटविष्णु⁵चन्द्राज्ञाः⁴।
सदसि न भवन्त्यभिमुखाः सिंहं दृष्ट्वा² यथा हरिणाः ॥ ६० ॥
युगभगणमान याता⁵हर्गण¹ दिनवारमध्यमाद्येषु ।
मध्यमगति द्विषष्ट्यार्याणां² प्रथमकृतो³ है⁴ ॥ ६१ ॥

६०. (ग) १. वीक्ष for (वीक्ष्य)
२. दिष्ट्वा for (दृष्ट्वा)
(क) ३. श्रीहर्षेणार्य for (श्रीषेणार्य)
(ख) ५. विभुचन्द्राद्या for (विष्णुचन्द्राज्ञाः)
६. हरिणाः for (हरिणाः)
६१. (घ) १. हर्गण for (हर्गण)
२. द्विषष्ट्यार्याणां (ग) द्विषष्ट्यार्या (क) द्विषष्ठ्यार्याणां for (द्विषष्ट्यार्याणां)
३. प्रथमः कृतोध्यायः (ग) (क) प्रथमाः for (प्रथमकृतो है)
(ग) वि० + इति श्री ब्रह्मसिद्धांते मध्यमाधिकारः प्रथमः +
(ख) ५. यतो for (याता)
२. द्विषष्टार्याणां for (द्विषष्ट्यार्याणां)
(ख) की दृष्टि से ६३ श्लोक हैं, २३ वां अधिक है।
(च) ३. प्रथमः for (प्रथम)
४. कृतोध्यायः for (कृतोहै)