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बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

by नरपति नाल्ह

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DevanagariHindipublished315 pages

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Page 79
  • ७२ -
    वस्तु-वर्णन
    काव्यों में प्रायः ऐसा देखा जाता है कि विवरण के लिये कवि या तो स्वयं
    वस्तुओं का वर्णन करता है अथवा पात्रों द्वारा उनका वर्णन करवाता है ।
    वस्तु-वर्णन की कुशलता काव्य में जीवन डालकर उसे सरस बनाने में समर्थ
    होती है । बीसलदेव रासो में फुटकर वर्णनों का ताँता तो नहीं है लेकिन दो
    चार स्थल ऐसे अवश्य हैं जहाँ कवि ने स्वयं वस्तुओं का वर्णन किया है अथवा
    पात्रों द्वारा उनका वर्णन करवाया है । देखिये :-
    विवाह वर्णन—रासो में राजमती और बीसलदेव के विवाह का वर्णन हमें
    विस्तारपूर्वक मिलता है। हिन्दू-जाति की परम्पराओं के अनुसार कन्या के
    बढ़ते ही उसके घरवालों को कन्या के विवाह की व्यग्रता (विशेष कर उसकी
    माता को) से प्रारम्भ कर वर की खोज, ब्राह्मण द्वारा लग्न भेजना, तिलक, बारात
    की तैयारी तथा यात्रा, अगवानी, कन्यादान, भांवरी, दान, दहेज और वधू की
    विदाई आदि के वर्णन पढ़ने को मिलते हैं। विवाह का वर्णन कवि ने तत्कालीन
    भारत के दो प्रमुख शासकों विग्रहराज और भोज की मर्यादा के अनुकूल किया
    है । इसलिए इस वर्णन में हमें राजसी ठाट बाट का चित्र मिलता है। सांभर
    नरेश की बारात का वर्णन करते हुए कवि कहता है कि—
    "पूजियो गणपवि चालीधर जान ।
    छहइ चउरासीय हुण जी मान ॥
    असी सहस घोड़ा घड़ा ।
    साठ सहस पालकी अपारि ॥
    गूजर गहड़ चाल्या घणा ।
    रायराण तण अंत न पार ॥"
    विवाह वर्णन में जहाँ कवि ने राजसी ठाट बाट का दृश्य उपस्थित किया
    है वहाँ प्रथम, द्वितीय, तथा तृतीय भांवर के समय राजा भोज द्वारा सांभर
    नरेश को दहेज स्वरूप देशों को दिखाते समय यह भूल गया कि वह जिन देशों
    का दहेज दिला रहा है वे राजा भोज के अधिकार में थे भी या नहीं।
    षड् ऋतु—बारह मास वर्णन—राजा बीसलदेव के प्रवास-काल के पश्चात्
    रानी राजमती के विरह का वर्णन करते समय कवि ने षड्ऋतुओं का वर्णन,
    उनमें प्राकृतिक उद्दीपन होने के कारण, रानी के विरह की व्यथा को प्रभावोत्पादक
    बनाने के लिये किया है। विरहाग्नि राजमती को प्रत्येक मास में सताती है ।