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बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

by नरपति नाल्ह

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DevanagariHindipublished315 pages

Page 4 of 315

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( ८ )

प्रति के पाठ का भी उल्लेख किया है, जिसका उल्लेख अन्यत्र नहीं है। काव्य-
गत 'काव्यसौष्ठव', काव्य की 'भाषा' तथा पुस्तक में दिये गए परिशिष्ट 'क'
और 'ख' में जहाँ नया दृष्टिकोण उपस्थित करने का प्रयास किया गया है, वहीं
ग्रन्थ की रचनातिथि का निर्णय भी वैज्ञानिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
प्रस्तुत वैज्ञानिक ढंग से सम्पादित इस कार्य को करने में मेरी कठिनाइयों
का स्वागत करने और उन्हें हल करने के लिए सर्वदा तत्पर रहनेवाले विद्वान्
डा० सुकुमार सेन का मैं ऋणी हूँ। उन्हीं के पथ-प्रदर्शन से यह अध्ययन
प्रस्तुत होकर कलकत्ता विश्वविद्यालय की डी० लिट्० उपाधि के हेतु स्वीकृत
हो सका है।
अन्त में, मैं एशियाटिक सोसाइटी के पुस्तकाध्यक्ष तथा यहाँ के अन्य
अधिकारियों का आभारी हूँ जो मुझे कार्य की प्रगति में यथाशक्ति
सुविधाएँ प्रदान करते रहे। लखनऊ विश्वविद्यालय के रीडर डा० विपिन-
विहारी त्रिवेदी के प्रति भी कृतज्ञता-ज्ञापन करना मैं अपना कर्तव्य समझता
हूँ, जिन्होंने इस कार्य को अग्रसर करने में मुझे सर्वदा प्रेरणा दी।

प्रेसीडेंसी कालेज, कलकत्ता
३० जून, १६६२ } तारकनाथ अग्रवाल