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बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

by नरपति नाल्ह

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DevanagariHindipublished315 pages

Page 297 of 315

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Page 297
  • १६४ -

है। पण्डितों ने इस नाम की उत्पत्ति और इसके अर्थ पर विभिन्न विचार प्रकट
किये हैं। ओड्र बहुत पुराना नाम है और आज का नाम ओड़ीसा या उड़ीसा
इसी से बना ज्ञात होता है। जैसे ओद्र + देश = ओड़ीसा। इस शब्द का
सम्बन्ध इसी नाम के लाल गुलाब के फूल से लगाया जाता है, जिसे यहाँ के
रहनेवाले स्वर्ग के पाँच फूलों में से एक समझते हैं। लेकिन पण्डितों ने इस
शब्द की उत्पत्ति के सम्बन्ध में कहा है कि इस शब्द का अर्थ गढ़ा या धूल
है। और इस शब्द के अपने कथित अर्थ को यह कह कर ठीक बनाते हैं कि
चूंकि इस प्रदेश के लोग संस्कृत विद्वानों की दृष्टि में बहुत ऊँचे नहीं समझे
जाते थे इसलिये यह अर्थ ठीक है। इसका दूसरा नाम उत्कल अवश्य संस्कृत
नाम है, जिसका अर्थ उन्नतिशील प्रदेश होता है। (The glorius country)
कुछ लोग इस शब्द का अर्थ Land of Bird killer लगाते हैं। तथा कुछ
ऐसे भी विद्वान् हैं, जो इसका अर्थ (The outlying Stup) बताते हैं।
इस प्रदेश का प्राचीन इतिहास यह बताता है कि यहाँ के आदि निवासी
भुइयाँ, सवर, गोंड और खोंट थे जो अपनी अपनी जातियों के प्रधान के साथ
पृथक-पृथक समूह बना कर रहते थे। कुछ काल के बाद आर्य गणों का यहाँ
प्रवेश हुआ और ये लोग अपनी बुद्धि और क्षमता के द्वारा उन आदि वासियों
पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने में समर्थ हुए। इतिहास यह भी बताता है कि
किस प्रकार "आर्य गण जिनमें मुख्यतया राजपूत थे, उत्तर से तीर्थ यात्रा के
हेतु "पुरी" में आकर बस गये और अपना राज्य स्थापित किया। आर्यों के
राज्य स्थापित कर लेने के बाद भी उड़ीसा में छोटे-छोटे राज्यों की बहुलता
रही तथा इसके मध्यकालीन इतिहास को जानने के लिए इसके निमित्त
छोटे छोटे राज्यो के सम्बन्ध में जानना आवश्यक है। पटना राज्य के आधु-
निक राज्य-परिवार वाले आज से प्राय ६०० वर्ष पूर्व यहाँ आये थे और
उन्होंने अठारह गढ़ जात को जीतकर इस राज्य की स्थापना की। ऐसा कहा
जाता है कि इस राज्य परिवार के लोग चौहान जाति के राजपूत थे, जो मैनपुरी
के समीप रहते थे और वहाँ से मुसलमानों द्वारा भगा दिये गये थे। पटना में इस
जाति के लोगोंने बस कर अपने बल और पौरुष के द्वारा शीघ्र ही आजकल के
सम्बलपुर कहे जाने वाले जिले तथा इसके आसपास के राज्यों सोनपुर और
बामरा पर अपना आधिपत्य जमा लिया। इसके बाद ही यह जीता हुआ
भूखण्ड इस परिवार के दो भाइयों में विभाजित हो गया। इस विभाजन में
जिस भाई के हिस्से में सम्बलपुर का राज्य मिला, वही महान् हुआ और पटना
को हिस्से में पाने वाला भाई उसके अधीन हुआ। मराठों ने पहले पहल