सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

नरपति नाल्ह द्वारा

कॉपीराइट समस्या बताएँ

DevanagariHindipublished315 पृष्ठ

पृष्ठ 197, कुल 315 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 197
  • ६१ -
    बहसाप^१ धुरि^२ लुणिजइ^३ धाम ।
    सीसा पाखइ^४ घरु^५ पाका जी^६ पान ॥
    कनक काया घट सीविजइ ।
    म्हाकउ^७ मुरध राउ न^८ जाणइए सार ॥
    हाथि झागामी ताझयउ ।
    उतउ^९ उमउ^१० सेवइ^११ राज दुवार ॥
    देवि सपी द्विव^१२ लागउ^१३ छुहइ^१४ जेठ ।
    यह छंद श्र० २ खंड ३ में १३-१४ आ० ६ खंड ३ में १२, आ०
    ६ में १२७, आ० १२ में ११५ है। लेकिन श्र० २ और आ० ६ में ४
    और ५ के बीच की पंक्ति है:—दंत क्याडूया नह नह रंग्या । और श्र०
    २ में ५ और ६ के बीच निम्न पंक्तियाँ हैं:—
    “सपी सहेली कहूईक बात ।
    गहरइ फरकइ छुइ दाहिणो गात ॥”
    इस छंद की तीसरी पंक्ति आ० १२ में नहीं है ।
    १. आ० ६ बेसापा, आ० १२ बेसाये ।
    २. श्र० ६ सषी, आ० १२ धरि ।
    ३. श्र० २ ल्हणुजै, आ० ६ लुणिज । आ० १२ लुणिजे ।
    ४. आ० १२ सीसा पायी ।
    ५+६. आ० २ पाका, आ० ६ नइ पाका, आ० ६ हो पाका, आ० १२
    पाका हो ।
    ७. श्र० २ आ० ६ (में नहीं है) ।
    ८. आ० ६ नाह ।
    ९+१०. श्र० पाइकइ, आ० ६ ऊमउ, आ० १२ ऊमा ।
    ११. आ० १२ सेविह्यै ।
    यह छंद श्र० २ खंड ३ में १५, आ० ६ खंड ३ में १३, आ० ६ में
    १२८, आ० १२ में ११६ है ।
    १२. आ० २ आ० ६ (में नहीं है) आ० ६ नहिवइ ।
    १३+१४. आ० ६ लागो, आ० ६ लागो, आ० ६ लागो है आ० १२
    लागो ।