सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)

भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)

Bhakti Sudha of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished778 पृष्ठ

पृष्ठ 7, कुल 778 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 7

विषय-सूची
प्रथम खण्ड — श्रीकृष्णलीला-दर्शन

१. श्रीकृष्ण-जन्म .................................................. १५
✤ श्रीनन्दराय और देवी नन्दरानीजीका परिचय . १५
✤ नन्दरानीके पुत्रदर्शनका उल्लास ..................... १८
२. श्रीकृष्णकी बालक्रीडा ...................................... १९
✤ जन्मोत्सवका उल्लास ....................................... १९
✤ बालरूपकी झाँकी ............................................. १९
✤ स्तुति-निवेदन ................................................. २०
✤ यशोदाजीको बालरूपके दर्शन .......................... २१
✤ व्रजांगनाओंको माधुर्यरूप बालप्रभुका दर्शन ... २२
✤ श्रीनन्दरानीद्वारा पयःपान कराना ..................... २३
✤ श्रीब्रजेश्वरीका बालकृष्णके मनोरम अंगोंको
देखकर मुग्ध होना ............................................ २३
✤ बालदर्शनसे श्रीनन्दरायजी आनन्दमूर्च्छित
हो गये ............................................................. २४
✤ भगवान्‌का जातकर्म-संस्कारोत्सव ................ २४
✤ श्रीगर्गजीद्वारा भगवान्‌का नामकरण-संस्कार . २५
✤ श्रीबलभद्रजी और कृष्णजीकी माधुर्यमयी
शिशुलीला ....................................................... २५
✤ नवनीतचोरी-लीला ......................................... २६
✤ मैया, मैं तो चन्द्र-खिलौना लैहों .................... २६
✤ नर्तन और वेणुवादन-लीला ............................. २७
३. भगवान्‌का मंगलमय स्वरूप ............................. २८
✤ भगवान् सर्वथा अनुपमेय ................................ २८
✤ भगवान्‌के मंगलमय दिव्य अंगोंकी शोभा ... २९
✤ भगवान्‌के नेत्रोंकी अरुणिमा ............................ ३०
✤ भगवान्‌की दिव्य नासिकाकी शोभा ......... ३१
✤ भगवान्‌के मधुर मन्द हास्ययुक्त मुखारविन्दकी
शोभा .............................................................. ३२
✤ दिव्य विग्रहके अनुलेपनकी शोभा ............ ३३
✤ भगवान्‌का दिव्यातिदिव्य सौन्दर्य-माधुर्य ... ३५
✤ भगवान्‌के कटितटकी शोभा .......................... ३६
✤ भगवान्‌के चरणारविन्दोंकी शोभा ................... ३८
✤ भगवान्‌के चरणचिह्नोंकी शोभा ................... ३९
✤ भगवान्‌के युगलस्वरूपके चिन्तनसे अन्तः-
करणकी निर्मलता ............................................. ४०
४. 'साक्षान्मन्मथमन्मथः' ........................................ ४१
✤ भगवान् तथा कामदेवका संवाद ................. ४१
✤ जीवात्मा और परमात्माका मिलन ............. ४४
✤ आनन्दकी अभिलाषा ................................. ४७
✤ भक्तियोगके विधानके लिये भगवान्‌का
अवतरण ........................................................... ४८
✤ भक्तिका ज्ञानरूपमें परिणमन ..................... ५२
५. श्रीवृन्दावनमें वर्षा और शरद् ........................... ५३
✤ श्रीमद्भागवतमें वर्णित वर्षा एवं शरद्-
ऋतुकी शोभा ................................................ ५३
✤ श्रीरामचरितमानसमें वर्षा एवं शरद्-ऋतुका
वर्णन ................................................................ ५६
६. वेणुरव ................................................................... ५६
✤ वेणुवादन-भगवान्‌की मंगलमयी लीला ... ५६
✤ वेणुध्वनि-श्रवणका विलक्षण प्रभाव ......... ५७
७. किरातिनियोंका स्मररोग ................................... ५९
✤ भगवत्सम्बन्धसे तृष्णा, काम आदि भी भूषण
बन जाते हैं ...................................................... ६०
८. वेणुगीत ............................................................... ६४
✤ भगवान्‌के श्रीचरणोंमें अनुराग होना लोकोत्तर
सौभाग्य है ..................................................... ६५
✤ भगवान्‌का वृन्दावन-आगमन ..................... ६६
✤ श्रीवृन्दारण्यकी शोभा .................................... ६७
✤ अदृश्य वस्तुकी सत्ताका दृष्टान्त ................ ६७
✤ वृन्दावनमें भगवान्‌का आतिथ्य ................. ६९
✤ भगवान्‌के प्रवेशसे वृन्दावनधाम रसमय हो
गया ................................................................... ७१
✤ भगवत्सम्मिलनके लिये उत्कण्ठाके उत्कर्षकी
आवश्यकता ................................................... ७२
✤ वेणु-कूजनका प्रभाव ................................... ७२
✤ भक्तिका स्वरूप ......................................... ७७
✤ भगवान्‌का विग्रह फलात्मक है, साधन
नहीं ................................................................... ७८
✤ बाह्य रमण और आन्तर रमण ...................... ७९
✤ मनोमयी प्रतिमाका वैशिष्ट्य ...................... ७९
✤ भक्तकी भावनाके अनुसार ही भगवान्‌का
स्वरूपधारण .................................................... ७९
✤ अमलात्मा महायोगीन्द्र भी भगवान्‌के लोकोत्तर
माधुर्यसे मुग्ध हो जाते हैं ............................. ८०