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सर्वकोश
भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)

भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)

Bhakti Sudha of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished778 पृष्ठ

पृष्ठ 14, कुल 778 में से

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पृष्ठ 14

[ १२ ]
✿ निरन्तर भगवत्स्मरण सभीके लिये परम
श्रेयस्कर है ............................................. ६५०
१७. करुणालहरी ............................................ ६५३
✿ प्रेमी भक्तका भगवान्‌के प्रति मधुर उपालम्भ.. ६५३
१८. गजेन्द्र-मुक्ति ......................................... ६५५
✿ आर्तभक्तकी प्रार्थना ................................. ६५५
१९. संकल्प-बल ............................................ ६५८
✿ परमात्मा ही जगत्‌के उपादान और निमित्त
कारण ............................................... ६५९
✿ संकल्पका प्राधान्य .................................. ६५९
✿ संकल्पके अनुसार ही क्रियाकी निष्पत्ति ... ६६१
✿ असत्संकल्पोंको त्यागनेकी रीति ............... ६६१
✿ सत्-तत्त्वका प्रभाव ................................ ६६२
✿ संकल्पसिद्धिका बाधक—अविश्वास ......... ६६२
✿ संकल्पका स्वरूप .................................. ६६४
✿ शुभसंकल्पकी ही भावना करें .................. ६६४
✿ योगियोंका संकल्प-बल ........................... ६६५
✿ मनसे पापकर्मोंका परित्याग और अच्छे
कर्मोंका अनुष्ठान करना चाहिये ............. ६६५
✿ बुरे कर्मोंके संकल्पोंको रोकना परमावश्यक .. ६६६
✿ सत्कर्म और उत्तम मन्त्रोंके जपसे संकल्पका
बल दुगुना हो जाता है ............................ ६६७
✿ मन्त्रजपके अधिकारी-अनधिकारी ............ ६६८
२०. ज्ञान और भक्ति ...................................... ६७०
✿ ज्ञान बड़ा या भक्ति बड़ी ........................... ६७०
✿ भक्ति और ज्ञानका स्वरूप ....................... ६७१
✿ भक्तिसे ज्ञानकी प्राप्ति ............................ ६७२
✿ भक्तिका अर्थ ज्ञान है .............................. ६७३
✿ ज्ञान नामकी स्वतन्त्र वस्तु नहीं है ......... ६७४
✿ वेदोंके दो काण्ड—कर्मकाण्ड और उपासना-
काण्ड................................................. ६७५
✿ भक्तिका उत्कर्ष ................................... ६७५
✿ भक्ति और वेदान्त ................................ ६७६
✿ भक्ति और ज्ञानके उत्कर्ष तथा अपकर्षका
चिन्तन व्यर्थ है ................................... ६७८
✿ भक्तिसे ज्ञानद्वारा परम तत्त्वकी प्राप्ति....... ६८१
✿ सगुणोपासना और निर्गुणोपासनाका तारतम्य .. ६८२
✿ सगुणोपासना सरल है .......................... ६८४
✿ जीवन्मुक्तकी भी भगवान्‌के भजनमें अभिरुचि ... ६९०
२१. भक्तिरसामृतास्वादन .................................... ६९१
✿ प्रेम वाणीका विषय नहीं ......................... ६९३
✿ विरक्तोंद्वारा भी भक्तिकी कामना ............. ६९४
✿ भगवत्प्रेमके साधन ............................... ६९४
✿ चित्तद्रुतिसे भक्तिमें भेद ........................ ६९५
✿ परब्रह्मकी प्रेमास्पदता ............................ ६९६
✿ ब्रह्म, परमात्मा और भगवान्‌में भेद....... ६९७
✿ निर्गुण और सगुणका स्वरूप .................. ६९९
✿ भगवान्‌के सभी गुण भक्तोपयोगी ............. ७००
✿ भगवान्‌की तीन शक्तियाँ ......................... ७०१
✿ बिम्बप्रतिबिम्बभाव ................................. ७०२
✿ अज्ञातज्ञापकत्व ही प्रमाणोंका प्रामाण्य है .... ७०३
✿ आचार्य श्रीमद्मधुसूदनजी सरस्वती—व्यक्तित्व
एवं कृतित्व ......................................... ७०४
२२. क्या ईश्वर और धर्मके बिना काम चलेगा ..... ७०५
✿ विविध शंकाओंके युक्तियुक्त शास्त्रोक्त
समाधान .............................................. ७०५
चतुर्थ खण्ड—ज्ञानतत्त्वदर्शन
१. वेदान्तरससार ........................................... ७१४
✿ मंगलाचरण ......................................... ७१४
✿ वेदप्रामाण्य-तात्पर्यविमर्श ....................... ७१४
✿ ब्रह्मकी सच्चिदानन्दरूपता और जगत्‌की
असच्चिदानन्दरूपता ............................ ७१५
✿ मायाकी अनिर्वचनीयता ............................ ७१५
✿ ज्ञानस्वरूप-विमर्श ................................. ७१६
✿ भगवत्तत्त्व-प्रतिपादन ............................ ७१६
✿ भगवत्तत्त्वकी आत्मरूपता ......................... ७२०
✿ शोधित अहमर्थकी प्रत्यगात्मरूपता .......... ७२३
✿ ब्रह्मात्मतत्त्वकी रसरूपता ......................... ७२५
✿ अविक्रिय विज्ञानघन आत्माकी ब्रह्मरूपता.. ७२७
✿ भ्रमबीज द्वैतमूल अज्ञानातीत आत्माकी
स्वप्रकाश आनन्दरूपता ........................ ७२८
✿ सबीज ब्रह्मकी परिणामोपादानता और निर्बीज
ब्रह्मकी विवर्तोपादानता ........................... ७३०
✿ अनुभवगोचरता और आच्छादकताके कारण
अज्ञानकी भावरूपता न कि ज्ञानाभावरूपता .. ७३२
✿ निष्प्रपंच परमात्मामें कल्पित तादात्म्य-सम्बन्धसे
प्रकृति तथा प्रपंचकी विद्यमानता ............ ७३३
✿ वेदान्ताभ्यासजन्य संस्कारसम्पन्न निरुद्धान्तःकरणसे
निरावरण ब्रह्मसाक्षात्कारकी सम्पन्नता ......... ७३५