भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)
Bhakti Sudha of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ ११ ]
तृतीय खण्ड—भक्तितत्त्व
१. भगवत्प्राप्ति .................................................. ५९५
✿ भगवान्में उत्कट प्रीति होनेपर तत्क्षण ही
भगवत्प्राप्ति ..................................................... ५९५
२. नामरूपकी उपयोगिता .......................................... ५९६
✿ नामरूपसे नामरूपातीत तत्त्वकी प्राप्ति ...... ५९७
✿ मनकी एकाग्रताके लिये सात्त्विक कर्म और
ज्ञानका अवलम्बन अपेक्षित .......................... ५९७
✿ नामरूपसे अतीत परब्रह्मकी दिव्यलीलाशक्तिके
सहयोगसे नामरूपयुक्त सगुण-साकार रूपमें
अभिव्यक्ति ..................................................... ५९८
✿ सभी नामरूप भगवान्के ही हैं ..................... ५९८
✿ भगवदर्थनामरूपकर्मसे भवबन्धनकी विमुक्ति ... ५९९
३. इष्टदेवकी उपासना ............................................ ५९९
✿ निन्दाका तात्पर्य अपने अभीष्टकी प्रशंसामें .. ५९९
✿ अपने इष्टमें अनन्यता .................................. ६००
✿ शिव-विष्णुमें अभेद-बुद्धि ............................. ६०१
✿ जिस रूपमें प्रीति हो, उस रूपकी उपासना
करनी चाहिये ................................................. ६०२
✿ उपासनाके लिये अपनी कुल-परम्पराका
समादर ........................................................... ६०३
✿ कृपापरवश भगवान्द्वारा अनेक मंगलमय
स्वरूपोंका धारण ............................................ ६०४
✿ श्रौत-स्मार्तप्रतिपादित स्वधर्मका सम्पादन
परमेश्वरका आराधन है ................................... ६०५
४. मानसी आराधना ................................................ ६०६
✿ उपासनामें भावनाका प्राधान्य ........................ ६०८
५. सगुणोपासनामें सरलता ....................................... ६०९
✿ सगुणोपासना एवं निर्गुणोपासनाका तारतम्य .. ६०९
६. अव्यभिचार भक्तियोग ........................................ ६११
✿ मानसी-सेवा ................................................ ६१२
✿ चार प्रकारके भक्त ........................................ ६१२
✿ सविकल्पक और निर्विकल्पक ब्रह्म ........... ६१३
✿ ब्रह्म—अतिशयताकी कल्पनासे अतीत ...... ६१५
७. सबसे सगे भगवान् ............................................ ६१६
✿ एकमात्र भगवान्का सम्बन्ध ही स्थिर है .... ६१७
८. विभीषण-शरणागति ............................................. ६१८
✿ जीवभावसे मुक्त हुए बिना पूर्ण स्वातन्त्र्य
सम्भव नहीं ..................................................... ६१८
✿ भगवान्के प्रति अनन्य प्रेम ही भक्ति है ..... ६१९
✿ सत्संकल्पकी महिमा .................................... ६२२
✿ भगवान्की भक्तपरवशताका एक दृष्टान्त ... ६२४
✿ भगवान्के अवतरणका हेतु—अमलात्मा
परमहंसोंके लिये भक्तियोगका विधान ......... ६२७
९. चतुर्विधा भजन्ते ................................................ ६२८
✿ ज्ञानी भक्त ................................................... ६२८
✿ जिज्ञासु भक्त ................................................. ६२९
✿ आर्त भक्त .................................................... ६३०
✿ अर्थार्थी भक्त ................................................ ६३०
१०. भगवच्छरणागतिसे ही गति ................................. ६३१
✿ अनन्य भगवत्परायणताका एक दृष्टान्त ..... ६३२
११. भगवान्का अवलम्बन अनिवार्य ........................... ६३३
✿ स्वधर्मानुष्ठानसे कल्याणकी प्राप्ति ................. ६३४
१२. प्रेमतत्त्व ........................................................... ६३५
✿ अन्तःकरणकी सात्त्विकी वृत्ति ही प्रेम है ..... ६३५
✿ भगवान् ही प्रेमके उद्गम-स्थान किंवा
प्रेमस्वरूप हैं ................................................. ६३६
✿ प्रेम, प्रेमी और प्रेमास्पदका अभेद सम्बन्ध ... ६३९
१३. भगवान् और प्रेम .............................................. ६४०
✿ आत्मामें सर्वातिशायी प्रेम होता है ............. ६४०
✿ उच्चकोटिका ज्ञान भी प्रेमके बिना सुशोभित नहीं
होता .............................................................. ६४१
✿ रागानुगा प्रीतिके सम्पादनके लिये भगवान्का
प्राकट्य ......................................................... ६४२
१४. भगवत्कथामृत ................................................. ६४३
✿ ब्रह्मसुख बृहत्तम सुख है ............................. ६४४
✿ भगवान् सबके परम प्रकाशक ..................... ६४५
✿ श्रवणकी महिमा .......................................... ६४५
✿ श्रवणमें सभीका अधिकार ............................ ६४५
१५. प्रभुकृपा ........................................................... ६४६