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सर्वकोश
भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)

भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)

Bhakti Sudha of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished778 पृष्ठ

पृष्ठ 12, कुल 778 में से

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पृष्ठ 12

[ १० ]
✿ भगवती और सृष्टि .................................................... ५१०
✿ मूर्तिरहस्य ............................................................. ५११
✿ दशमहाविद्या ......................................................... ५१४
(१) महाकाली ......................................................... ५१४
(२) तारा ................................................................ ५१४
(३) षोडशी ............................................................. ५१५
(४) भुवनेश्वरी .......................................................... ५१५
(५) छिन्नमस्ता ......................................................... ५१५
(६) त्रिपुरभैरवी ......................................................... ५१६
(७) धूमावती ........................................................... ५१६
(८) बगला ............................................................... ५१६
(९) मातङ्गी ............................................................ ५१७
(१०) कमला ........................................................... ५१७
✿ पूजारहस्य ............................................................ ५१७
✿ पुरुषरूपिणी ......................................................... ५१८
✿ शिवपरात्पर .......................................................... ५२०
✿ ब्रह्मजाया ............................................................ ५२३
✿ भगवतीकी ब्रह्मरूपता .............................................. ५२३
८. गायत्री-तत्त्व ........................................................ ५२४
✿ त्रिपदा गायत्री ...................................................... ५२५
९. शक्तिका स्वरूप ..................................................... ५२७
✿ भगवती ही निखिल प्रपंचकी निर्मात्री ........................ ५३०
१०. माँके श्रीचरणोंमें .................................................. ५३०
✿ कातर प्रार्थना ....................................................... ५३४
✿ सांसारिक मोह-ममताका परिणाम ............................. ५३६
✿ मोहकी विचित्र महिमा ............................................ ५३९
✿ माँ ही एकमात्र शरण .............................................. ५४०
✿ दीनजनोंपर माँकी विशेष कृपा ................................. ५४०
✿ माँकी कृपासे ही माँका स्वरूपबोध .......................... ५४१
✿ स्वकल्पित प्रपंच ही दुःखका हेतु है ......................... ५४३
✿ कामनात्यागसे दृढबोधकी प्राप्ति ............................... ५४३
✿ अखण्डबोधसे संसारकी नश्वरताका भान .................... ५४५
✿ देहभावनासे ही देहकी सत्ता और मनके
कारण ही जगद्विभ्रम ................................................. ५४६
११. शक्तिपीठ-रहस्य ................................................... ५४८
✿ इक्यावन शक्तिपीठ ................................................ ५४९
✿ वर्णमालाएँ .......................................................... ५५२
१२. श्रीरामजन्म-रहस्य ............................................... ५५४
✿ भगवान्‌का आविर्भाव चार रूपोंमें ............................. ५५५
१३. श्रीरामभद्रका ध्यान ............................................... ५५६
✿ भगवान्‌के विविध अंगों तथा आभूषणोंकी
शोभा .................................................................... ५५६
१४. भगवदवतारका प्रयोजन ......................................... ५६०
✿ भगवदवतरणके विभिन्न प्रयोजनोंके विविध
अभिप्राय ................................................................ ५६१
१५. भारतमें ही अवतार क्यों ? ..................................... ५६३
✿ धर्माधर्मके निर्णयमें बुद्धिबल नहीं, शास्त्र ही
प्रमाण है ............................................................... ५६५
✿ शास्त्रोंमें संशोधनकी कल्पना नितान्त
अल्पज्ञता ................................................................ ५६६
✿ भारतवर्ष समस्त भूमण्डलकी नाभि है ....................... ५६६
१६. अवतारमीमांसा ................................................... ५६८
✿ भगवान्‌का पूर्णावतार या अंशावतार ........................... ५६९
✿ अवतारदेह और जीवदेहका पार्थक्य .......................... ५७०
१७. बुद्धावतारका प्रयोजन .......................................... ५७३
✿ वेदोंको माननेवाला आस्तिक और उनकी निन्दा
करनेवाला नास्तिक ................................................... ५७४
१८. निराकारसे साकार ................................................ ५७५
✿ परमात्मामें पारमार्थिक सत्तासे जन्माभाव और
व्यावहारिक दृष्टिसे जन्म का भाव ............................... ५७६
✿ साकाररूपमें प्रकट भगवान्‌के दर्शनमें
विलक्षणता .............................................................. ५७८
✿ साकाररूपमें किसी भी भावसे चित्त लगानेसे
प्राणीका कल्याण ..................................................... ५७९
✿ सगुणस्वरूपका चिन्तन सरल एवं सुगम ..................... ५७९
✿ श्रुतियोंमें सगुण-साकाररूपकी अवधारणा ................... ५८०
✿ भगवद्विग्रहका उपादान ........................................... ५८३
✿ प्राकट्यके विषयमें विभिन्न अभिमतोंकी
मीमांसा और निष्कर्ष ................................................ ५८५
१९. निर्गुण या सगुण .................................................. ५८६
✿ ध्याता, ध्यान और ध्येय ........................................... ५८६
✿ दिव्य स्वरूप-धारणाका प्रयोजन ............................... ५८८
✿ करणग्रामोंकी सार्थकता किसमें ? ............................. ५८९
✿ परमानन्दघन ब्रह्म अद्भुत रसमय है .......................... ५९०
✿ द्रुतचित्तपर भगवान्‌का प्राकट्य ही भक्ति है ................. ५९०
✿ भक्त और भगवान्‌का अभिन्न सम्बन्ध ....................... ५९१
✿ भगवान्‌का स्वरूप ही प्रेम है .................................... ५९२
✿ भगवान्‌में चित्त लगानेसे परम कल्याण ...................... ५९४