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सर्वकोश
भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)

भक्ति सुधा (स्वामी करपात्री जी महाराज - पराभक्ति, रस-मीमांसा एवं प्रेम-तत्त्व दार्शनिक महाग्रन्थ)

Bhakti Sudha of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished778 पृष्ठ

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पृष्ठ 11

[ ९ ]
द्वितीय खण्ड—देवोपासनातत्त्व
१. गणपति-तत्त्व .................................................... ४५०
✿ गणपति ब्रह्म ही हैं ............................................ ४५०
✿ शास्त्रद्वारा ही गणपतिके ब्रह्मत्वका परिज्ञान .. ४५०
✿ गणेशजीके विविध नामों तथा आयुधों आदिका
स्वरूप ............................................................. ४५१
✿ गणपति, श्रीकृष्ण, शिव आदि एक ही
तत्त्व हैं ............................................................ ४५२
✿ सर्वविघ्नोंके विनाशक गणेशकी आदि-
पूज्यता ............................................................ ४५३
✿ मरणासन्नावस्था तथा श्राद्ध आदिमें भी गणेश-
स्मरण आवश्यक ............................................ ४५४
✿ क्या गणेश अनार्योंके देव हैं ? .......................... ४५४
२. भगवान् सूर्य—हमारे प्रत्यक्ष देवता .................... ४५६
✿ गायत्री-उपासना सर्वदेवमय आदित्यकी
उपासना है ..................................................... ४५७
३. श्रीशिव-तत्त्व .................................................... ४५८
✿ भगवान् शिव—समस्त प्राणियोंके विश्राम-
स्थान ............................................................. ४५८
✿ विश्वका उत्पादक, पालक, संहारक—एक या
अनेक ? ......................................................... ४५८
✿ एक तत्त्वका अनेक नाम-रूपोंमें परिणमन .... ४५९
✿ संहारमें भी भगवत्कृपा .................................. ४६०
✿ शिव सर्वाराध्य परम दैवत हैं ........................... ४६०
✿ शिव-विष्णुका सर्वथा अभेद ........................... ४६२
✿ शिवके सगुणस्वरूपकी मनोहरता एवं
मंगलमयता .................................................... ४६२
✿ भगवान् शिव आशुतोष हैं ............................... ४६३
४. शिवसे शिक्षा ..................................................... ४६४
✿ शिवकुटुम्बका वैचित्र्य ................................... ४६५
५. शिवलिंगोपासना-रहस्य ...................................... ४६६
✿ सच्चिदानन्द परमात्माका शिवशक्ति-रूपमें
प्राकट्य .......................................................... ४६६
✿ शास्त्रनिषिद्ध विषयोंमें आनन्द और प्रेम दोष
है, हेय है ........................................................ ४६७
✿ शुद्ध प्रेम ही शुद्ध काम है ................................. ४६७
✿ शिव-शक्तिमें ही लिंगयोनि-भावकी
कल्पना .......................................................... ४६८
✿ ईश्वरभाव मायासे आवृत और शिवभाव
अनावृत है ....................................................... ४७०
✿ ज्योतिर्लिङ्गका स्वरूप ................................. ४७०
✿ शिव ही शक्ति और शक्ति ही शिव हैं ........ ४७२
✿ शिवलिंग योनिरूपा कुण्डलिनीसे
परिवेष्टित ..................................................... ४७३
✿ लिंगपूजनसे भुक्ति एवं मुक्ति .......................... ४७३
✿ लिंगयोनिभाव ही अर्धनारीश्वर ....................... ४७६
✿ कामनाभेदसे लिंगके विविध भेद ...................... ४७७
✿ बाण और नर्मद लिंगकी परीक्षा ....................... ४७७
✿ एक ही परमात्माके अनेक नाम ......................... ४७८
✿ शिवको तामसदेवता कहना अनभिज्ञता ....... ४७९
✿ भगवान् शिव रसमय, कल्याणमय ............. ४७९
६. श्रीविष्णु-तत्त्व .................................................... ४८०
✿ अनेक ईश्वरका मानना युक्तिविरुद्ध ................. ४८०
✿ जगत्पालनके लिये भगवान् विष्णुमें सर्वातिशायी
ऐश्वर्य ............................................................. ४८१
✿ भगवान्का स्थूल विराट् स्वरूप ..................... ४८२
✿ भगवान्के आभूषणों एवं आयुधोंका रहस्य .. ४८३
✿ भगवद्धाम .................................................... ४८४
७. श्रीभगवती-तत्त्व ............................................... ४८६
✿ महाचिति भगवतीमें सम्पूर्ण विश्व भासित ... ४८६
✿ महाचिति ही भगवती, आत्मा, पुरुष ब्रह्म आदि
शब्दोंसे व्यवहृत ............................................. ४८६
✿ भगवती मायारूपा नहीं है ................................ ४८६
✿ मायाविशिष्ट ब्रह्म ही भगवती है ..................... ४८८
✿ शक्तिका खण्डन ............................................ ४९०
✿ शक्ति-समर्थन ................................................ ४९४
✿ मायारूपिणी भगवती ....................................... ४९९
✿ माया और अविद्या ......................................... ५००
✿ मायाकी अनिर्वचनीयता .................................. ५०१
✿ तान्त्रिक दृष्टिमें शक्ति ..................................... ५०२
✿ प्रकृतिकी सत्ता ............................................. ५०२
✿ भगवती और मायाका वैलक्षण्य ...................... ५०२
✿ रात्रिरूपिणी .................................................. ५०२
✿ चण्डी ............................................................ ५०३
✿ नवार्णमन्त्रार्थ ................................................. ५०४
✿ प्रथम चरित्र ................................................. ५०५
✿ उत्तर चरित्र .................................................. ५०६
✿ 'देवीसूक्त' में भगवतीका स्वरूप ................... ५०९
✿ भगवतीकी विविध विभूतियाँ ......................... ५१०