भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)
Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary
श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा
DevanagariHindipublished380 पृष्ठ
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श्रीधाम वृन्दावन के छः गोस्वामियों को
नानाशास्त्र विचारणैक निपुणौ सद्धर्मसंस्थापकौ
लोकानां हितकारिणौ त्रिभुवने मान्यौ शरण्याकरौ।
राधाकृष्ण पदारविन्द भजनानन्देन मत्तालिकौ
वन्दे रूप सनातनौ रघुयुगौ श्रीजीव गोपालकौ।
'मैं श्रीसनातन, श्रीरूप, श्रीरघुनाथ भट्ट, श्रीरघुनाथ दास, श्रीगोपाल भट्ट तथा श्रील
जीव-इन छः गोस्वामियों को सादर प्रणाम करता हूँ! ये सभी सनातन धर्म की स्थापना
करके जगत् का रंजन करने के लिए शास्त्र-विचार में निपुण हैं। इसलिए भी ये त्रिलोकी में
मान्य हैं तथा सब प्रकार से शरण लेने योग्य हैं, क्योंकि गोपीभाव में निमग्न होकर श्रीराधाकृष्ण
की दिव्य सेवा में निरत हैं।‘’