भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)
Bhaishajya Ratnavali Hindi
by कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल)
Source: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (origin)
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About this granth
The Bhaishajya Ratnavali (भैषज्य रत्नावली) of Kaviraj Govind Das Sen is an Ayurvedic treatise on therapeutics, widely used by practitioners as a trusted collection of formulations. As the introduction to this edition points out, it gathers tested preparations of both kinds: herbal ones such as decoctions, powders, linctuses, asavas and arishtas, and mineral and metallic preparations from rasashastra, so that physicians of every level can use it.
The work proceeds disease by disease. Under each condition it gives the relevant formulations, for example decoctions of the five roots and the ten roots for fever, linctuses such as kutajavaleha, medicated ghee and oils, and remedies for hiccup and other ailments, with quantities of ingredients and methods of preparation.
This edition gives the verses with a Hindi commentary in prose order, enlarged, revised and translated by the late Vaidya Shankarlal, described as the author and commentator of many books. It was printed by Khemraj Shrikrishnadas at the Shri Venkateshwar Steam Press, Bombay, in Samvat 2009 (1952). At 1416 pages it is a reference work for students and practitioners.
| ( ४ ) | भैषज्यरत्नावली- | ||
|---|---|---|---|
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
| उन्मत्तरस, अभ्रभैरव, सौभाग्यवटी | १०६ | त्रिदोषदवानलकालमेघ | ” |
| श्रीवेतालरस, चक्री | १०७ | श्रीप्रतापलङ्केश्वररस | १३९ |
| द्वितीय चक्री, ब्रह्मरन्धररस | १०८ | कफकेतु, अन्य कफकेतु | १४२ |
| आनन्दभैरवीवटी, त्रैलोक्यसुन्दररस | १०९ | मध्यजीर्ण विषमज्वरादिमें— | |
| मृतोत्थापनरस, मृतसंजीवनरस | ११० | श्लेष्मकालानलरस | १४३ |
| सन्निपातभैरवरस | १११ | ज्वरमातंगकेसरीरस, ज्वर-मुरारि रस | १४४ |
| सूचिकाभरणरस | ११२ | श्रीज्वरमुरारि | १४५ |
| पुनः सूचिकाभरणरस | ” | ज्वरकेसरी, ज्वरभैरवरस | १४६ |
| बृहत्सूचिकाभरणरस, पानीयवटिका | ११३ | विद्याधररस, पञ्चाननरस | १४७ |
| सिद्धफलापानीयवटिका | ११६ | चन्द्रशेखररस, अर्द्धनारीश्वररस | १४८ |
| चिन्तामणिरस | ११८ | मृतसंजीवनरस | १४९ |
| द्वितीय चिन्तामणिरस | ११९ | श्रीरसराज, मुग्धाघेटकरस | १५० |
| रसराजेन्द्र | १२० | शीतारिरस, पर्णखणडेश्वररस | १५१ |
| पंचपित्तयुक्त रसका बलवत्त्व | १२१ | शीतभञ्जी रस | १५२ |
| पञ्चवक्त्ररस | ” | स्वल्पज्वरांकुशरस, द्वितीयज्वरांकुश | १५३ |
| त्रिदोषनीहारसूर्यरस, सन्निपातसूर्यरस | १२२ | तृतीयज्वरांकुशरस, मध्यमज्वरांकुशरस | १५४ |
| अघोरनृसिंहरस | ” | सर्वज्वरांकुश, बृहज्ज्वरांकुशरस | १५५ |
| प्रतापतपनरस, प्राणेश्वररस | १२४ | महाज्वरांकुश रस | १५६ |
| सन्निपातभैरव | १२५ | चूडामणिरस | १५७ |
| द्वितीय सन्निपातभैरवरस | १२६ | बृहच्चूडामणिरस | १५८ |
| मृत्युञ्जय रस | १२७ | बृहज्ज्वरचूडामणि रस | १५९ |
| श्रीसन्निपातमृत्युञ्जय रस | १२८ | भानुचूडामणिरस | ” |
| प्रभाव रस | १२९ | चिन्तामणिरस | १६० |
| कालाग्निशैवरस | १३० | द्वितीय चिन्तामणिरस | ” |
| त्रैलोक्यचिन्तामणिरस | १३१ | बृहत्ज्वरचिन्तामणिरस | १६१ |
| रसेश्वर | १३२ | बृहच्चिन्तामणिरस, त्र्याहिकारिरस | १६२ |
| वडवानल, बृहद्वडवानलरस | १३३ | चातुर्थिकारिरस, विश्वेश्वररस | १६३ |
| सन्निपातवडवानलरस, स्वच्छन्दनायकरस | १३४ | विक्रमकेसरीरस, ज्वरकाल-केतुरस | १६४ |
| सिंहनाद रस | १३५ | त्रिपुरारिरस | ” |
| स्वल्पकस्तूरीभैरव रस | १३६ | मेघनादरस, शीतारिरस | १६५ |
| मध्यमकस्तूरीभैरव रस, बृहत्कस्तूरीभैरवरस | ” | स्वच्छन्दभैरव रस | १६६ |
| कस्तूरीभूषणरस | १३७ | ज्वरारिरस ज्वराशनिरस | १६७ |
| अर्कमूर्ति, त्रिदोषदावानलरस | १३८ | ज्वरान्तकरस, वातपित्तान्तकरस | १६८ |
| श्रीजयमंगलरस | १६९ | ||
| ज्वरकुञ्जरपारीन्दरस | १७० | ||
| विद्यावल्लभ रस | १७१ |
विषयानुक्रमणिका । (५)
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| शीतारिरस, ज्वरशूलहररस | १७२ | तिलके तेलकी मूर्च्छाविधि | २०१ |
| षडाननरस | १७३ | तैलादिके पकाने का समय | २०२ |
| कल्पतरुरस | १७४ | पाकसिद्धिलक्षण | ” |
| तालाङ्करल, पर्पटीरस | १७५ | जीर्णज्वरमें पेयादि देने की अवधि | ” |
| त्रैलोक्यचिन्तामणिरस | १७६ | ज्वरमें संशोधन | ” |
| महाराजवटी | १७७ | ज्वरमें वमन, ज्वरमें विरेचन | २०३ |
| सर्वतोभद्ररस | १७८ | ज्वरमें क्षीणहुए मनुष्यको वमन, विरेचनकी विधि | ” |
| ज्वराश-अभ्रक | १७९ | ज्वरमें शिरोविरेचन | ” |
| जीवनानन्दाभ्र, चन्दनादिलोह | १८० | ज्वरमें शिरःपीडानिवारक लेप | २०४ |
| विषमज्वरान्तकलोह | १८१ | दुग्धप्रकरणम् । | |
| बृहद्विषमज्वरान्तकलोह | ” | क्षीरपाकविधि, नावा ज्वरमें आहारादिरत्न | २०५ |
| पुटपक्व विषमज्वरान्तकलोह | १८२ | गन्धककज्जलीविधि | २०६ |
| सर्वज्वरहरलोह | १८३ | ज्वरवाले | २०७ |
| बृहतसर्वज्वरहरलोह | १८४ | नक्षत्रजनितरोगफल | २०८ |
| द्वितीय बृहतसर्वज्वरहरलोह | १८५ | ज्वरमुक्तके लक्षण | २०९ |
| बृहज्ज्वरान्तकलोह | १८६ | ज्वरमुक्तरोगोको वर्जनीय पदार्थ | ” |
| लोहासव | १८८ | पथ्यापथ्यविधिः । | |
| घृतप्रकरणम् । | नवीनज्वरमें अपथ्य, मध्यज्वरमें पथ्य | २१० | |
| पिप्पल्यादिघृत | १९० | पुरानेज्वरमें पथ्य | ” |
| क्षीरषट्पलकघृत, दशमूलषट्पलकघृत | १९१ | ज्वरमें अपथ्य | २११ |
| वासामृत, गुडूच्यादिघृत | १९२ | आरोग्यस्नानकाल | २१२ |
| तैलप्रकरणम् । | ज्वरातिसार-चिकित्सा । | ||
| अंगारक तैल, बृहदङ्गारकतैल | १९३ | ह्रीवेरादि | २१३ |
| लाक्षादितैल, महालाक्षादितैल | ” | पाठादि, नागरादि, उशीरादि | २१४ |
| षट्कडूङ्गतैल | १९४ | शुण्ठीदशमूल, गुडूच्यादि | ” |
| महाषट्कडूङ्घरतैल, बृहतपिप्पल्यादितैल | १९५ | कालेङ्गादि, घनजलादि | २१५ |
| किरातादितैल | १९६ | धान्यानागरापि, विल्वादि, कुटजादि | ” |
| बृहत्किरातादितैल | १९७ | पाठादि, किरातादि, विडङ्गादि | २१६ |
| ज्वरभैरवतैल | १९८ | शुण्ठ्यादि, वत्सकादि, भूनिम्बादि | ” |
| घीको मूर्च्छित करनेकी विधि | १९९ | कणादि, पञ्चमूल्यादि, वृहत्पञ्चमूल्यादि | २१७ |
| तैलकी साधारणमूर्च्छाविधि | २०० | धान्यशुण्ठी, विल्वपञ्चक | २१८ |
| कटुतैलकी मूर्च्छाविधि | ” | ||
| एरण्डतैलकी मूर्च्छाविधि | २०१ |
( ६ ) भैषज्यरत्नावली-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| उत्पलषट्क, उत्पलाद्यचूर्णं | २१८ | पथ्यादिचूर्णं | २८३- |
| व्योषाद्यचूर्णं, कलिङ्गादिगुटिका | २१९ | द्वन्द्वजातीसार-चिकित्सा | ” |
| कुटजावलेह | २२० | वातपित्तातिसार-चिकित्सा । | |
| द्वितीय कुटजावलेह | २२१ | कलिङ्गादि | ” |
| सिद्धप्राणेश्वर रस, कनकसुन्दररस | २२२ | पित्तश्लेष्मातिसार-चिकित्सा | ” |
| बृहत्कनकसुन्दररस, गगनसुन्दररस | २२३ | मुस्तादि, समङ्गादि | ” |
| कनकप्रभावटी | ” | कुटजादि | २३९ |
| मृतसंजीवनी वटी, आनन्द-भैरवरस | २२४ | वातश्लेष्मातिसार-चिकित्सा | ” |
| अमृतार्णवरस, कारुण्यसागररस | २२५ | चित्रकादि | ” |
| मृतसंजीवनरस | २२६ | त्रिदोषातिसार-चिकित्सा | ” |
| प्राणेश्वररस | २२७ | समङ्गादि-कषाय | ” |
| अभ्रवटिका | २२८ | पञ्चमूली-बलादि | २४० |
| अतिसार-चिकित्सा । | पुटपक्वौषधप्रयोगविधि, कुटज-पुटपाक | ” | |
| आम और पक्वके लक्षण | २२९ | श्योनाकपुटपाक, दाडिमपुटपाक... | २४१ |
| आम और पक्वके अन्य लक्षण | २३० | कुटज-लेह | ” |
| आम और पक्वातिसारकी चिकित्सा | ” | कुटजाष्टकावलेह | २४२ |
| आमातिसार-चिकित्सा | ” | दुग्ध-पानविधि | २४३ |
| धान्यपञ्चक और धान्यचतुष्क | २३३ | शोथातीसार-चिकित्सा | ” |
| स्वल्प शालपर्ण्यादि, बृहच्छाल-पर्ण्यादि | ” | भय-शोकज अतीसार चिकित्सा | ” |
| वत्सकादि, पथ्यादि | ” | पृश्निपर्ण्यादि | ” |
| यमान्यादि, कलिङ्गादि, कञ्चटादि | २३४ | रक्तातीसार-चिकित्सा | २४४ |
| कुटजादि | ” | रलाञ्जनादिचूर्णं, नारायणचूर्णं | २४७ |
| त्र्यूषणादिचूर्णं, शुण्ठ्यादिचूर्णं | २३५ | गुड़पाकमें विधि | २४८ |
| वातातीसार-चिकित्सा | ” | साधारणातिसार-चिकित्सा | ” |
| पूतकादि | ” | बिल्वादि, पटोलादि, प्रियंग्वादि... | ” |
| पथ्यादि, वचादि | २३६ | जम्ब्वादि | ” |
| पित्तातीसार-चिकित्सा | ” | वत्सकादि, नाभिप्रलेप | २४९ |
| मधुकादि, बिल्वादि | ” | प्रवाहिका-चिकित्सा | ” |
| कट्फलादि, किराततिक्तकादि | ” | अहिफेनयोग, अहिफेनवदिका | २५० |
| अतिविषादि | २३७ | जातीफलादिवटी, पूर्णचन्द्रोदयरस | २५१ |
| श्लेष्मातीसार-चिकित्सा | ” | बृहद्गगनसुन्दररस, लोकनाथरस... | २५२ |
| पथ्यादि, चव्यादि | ” | बृहच्चिन्तामणिरस, भुवनेश्वररस | २५३ |
| पाठादिचूर्णं, हिंङ्ग्वादिचूर्णं | ” |
विषयानुक्रमणिका । ( ७ )
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| जातीफलरस | ... २५४ | बृहद्ग्रहणीवज्रकपाट | ... २९० |
| अभयनृसिंहरस, आनन्दभैरवरस... | २५५ | संग्रहग्रहणीकपाटरस | ... २९१ |
| कर्पूररस, बब्बूलारिष्ट, कुटजारिष्ट | २५६ | ग्रहणीगजेन्द्रवटिका | ... २९२ |
| अहिफेनासव | ... २५७ | जातीफलाद्यवटिका | ... २९३ |
| अतीसारमें वर्जनीय, अतीसारमें पथ्य | ... २५८ | बृहज्जातीफलाद्यवटिका | ... " |
| अतीसारमें अपथ्य | ... २५९ | वडवामुख रस | ... २९४ |
| ग्रहणीरोगकी चिकित्सा । | ग्रहणीशार्दूलरस | ... २९५ | |
| नागराद्यचूर्ण, पाठाद्यचूर्ण | ... २६१ | महागन्धक और सर्वाङ्गतुन्दररस | ... २९६ |
| कपित्थाष्टकचूर्ण, स्वल्प-गङ्गाधर-चूर्ण | ... २६२ | वैद्यनाथवटी | ... २९७ |
| मध्यम-गङ्गाधरचूर्ण, बृहद्गङ्गाधर-चूर्ण | ... २६३ | खसर्पणवटी | ... २९८ |
| वृद्धगङ्गाधरचूर्ण | ... २६४ | रसाभ्रवटी, महाअभ्रवटी | ... २९९ |
| स्वल्पलवङ्गाद्यचूर्ण, बृहल्लवङ्गाद्यचूर्ण | २६५ | पीयूषवल्लीरस | ... ३०१ |
| महालवंगाद्यचूर्ण | ... २६७ | पानीयभक्तवटी | ... ३०२ |
| स्वल्पनायिकाचूर्ण, मध्य मनायिकाचूर्ण | २६८ | श्रीनृपतिवल्लभरस | ... ३०४ |
| बृहन्नायिकाचूर्ण | ... २६९ | बृहन्नृपवल्लभ | ... ३०५ |
| ग्रहणीशार्दूलचूर्ण | ... २७० | महाराजनृपतिवल्लभ | ... ३०६ |
| जातीफलाद्यचूर्ण, जीरकाद्यचूर्ण | ... २७१ | महाराजनृपवल्लभ | ... ३०७ |
| मार्कण्डेयचूर्ण | ... २७२ | रसपर्पटी | ३०८ |
| कम्बोटावलेह, दशमुलगुड | ... २७३ | लौहपर्पटी | ... ३१५ |
| कल्याणगुड | ... २७४ | स्वर्णपर्पटी | ... ३१६ |
| कूष्माण्डगुडकल्याण | ... २७५ | पञ्चामृतपर्पटी | ... ३१७ |
| कामेश्वग्मादक | ... २७७ | विजयपर्पटी | ... ३१८ |
| मदनमोदक | ... २७८ | दूसरी विजयपर्पटी | ... ३२१ |
| मेथीमोदक | ... २७९ | हिरण्यगर्भपोट्टली रस | ... ३२२ |
| बृहन्मेथीमोदक | ... २८० | स्वल्पचुक्र, बृहच्चुक्र | ... ३२३ |
| मुस्तकादिमोदक | ... २८१ | आयामकाञ्जिक | .... ३२४ |
| जीरकादिमोदक | ... २८२ | अष्टपलघृत | ... ३२५ |
| बृहज्जीरकादिमोदक | ... २८३ | बिल्वांदिघृत, बिल्वगर्भघृत | ... ३२६ |
| अग्निकुमारमोदक | ... २८५ | शुण्ठीघृत, नागरघृत, चित्रक घृत | .. " |
| हंसपोट्टली, ग्रहणीकपर्द्दपोट्टली | ... २८६ | चाङ्गेरीघृत, मरिचाद्यघृत | ... ३२७ |
| अग्निकुमाररस | ... २८७ | महाषट्पलकघृत, विल्वतैल | ... ३२८ |
| स्वल्पग्रहणीकपाटरस १-५ | ... " | ग्रहणीमिहिरतैल | ... ३३० |
| ग्रहणीवज्रकपाटरस | ... २९० | बृहद्ग्रहणीमिहिरतैल | ... ३३१ |
( ८ ) भैषज्यरत्नावली-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| तक्रारिष्ट, पिप्पल्याद्यासव | ... ३३२ | अर्शोरोगमें पथ्य, अर्शोरोगमें अपथ्य | ३६७ |
| अर्शोरोगचिकित्सा | ३३३ | अग्निमान्द्यचिकित्सा। | |
| रक्तार्शाश्चिकित्सा | ३३३ | तीक्ष्णाग्निकित्सा | ३६९ |
| लवणोत्तमादि चूर्ण, समशर्कर चूर्ण | ... ३३९ | आमाजीर्णचिकित्सा | ३७० |
| व्योषादिचूर्ण | ... ” | चित्रकगुटिका | ... ” |
| विजयचूर्ण, शूरणपिण्डी | ... ३४० | विदग्धाजीर्णचिकित्सा | ३७१ |
| भल्लातकादिमोदक, नागरादिमोदक | ... ३४१ | विष्टब्धरसशेषाजीर्णचिकित्सा | ” |
| स्वल्पशूरणमोदक | ... ” | पथ्यादिक | ... ३७२ |
| बृहच्छूरणमोदक | ... ३४२ | विशिष्टद्रव्याजीर्णकी विधि | ... ” |
| श्रौड्डायनमोदक, माणिभद्रमोदक | ३४३ | विषूचिकाकी चिकित्सा | ३७४ |
| प्राणदा गुटिका | ... ३४४ | अलसकचिकित्सा | ३७५ |
| नागार्जुनयोग | ... ३४५ | उदगकी पीडाकी चिकित्सा | ” |
| कुटजलेह | ... ३४७ | सैन्धवाद्यचूर्ण १-२ | ... ३७६ |
| कुटजरसक्रिया | ... ३४८ | हिंग्वष्टकचूर्ण, वडवामुखचूर्ण | ... ३७७ |
| दशमूल-गुड, बाहुशाल गुड | ... ३४९ | स्वल्पाग्निमुखचूर्ण | ... ” |
| गुडभल्लातक | ... ३५१ | बृहदग्निमुखचूर्ण | ... ३७८ |
| अन्य-गुडभल्लातक, माणशूरणादिलोह | ... ३५२ | अग्निमुखलवण | ... ३७९ |
| अग्निमुखलोह | ... ३५३ | भास्करलवण | ... ३८० |
| चन्द्रप्रभावटिका | ... ३५४ | श्रीरामबाणरस, अग्नितुण्डीरस | ... ३८२ |
| रसगुटिका, तीक्ष्णमुखरस | ... ३५६ | अमृतकल्पवटी, अमृतवटी | ... ३८२ |
| अर्शकुठाररस, चक्राख्यरस | ... ३५७ | सुधासागर रस | ... ” |
| कञ्चुकुठाररस | ... ” | लवङ्गाद्यवटी, बृहल्लवङ्गादिवटी | ... ३८३ |
| चक्रेश्वररस, शिलागन्धकवटी | ... ३५८ | अजीर्णकण्टकरस, महोदधिवटी | ३८४ |
| जातीफलादिवटी, पञ्चाननवटी | ... ३५९ | बृहन्महोदधिवटी | ... ” |
| नित्यंदित रस, अष्टाङ्गरस | ... ३६० | अग्निकुमाररस, बृहदग्निकुमाररस | ३८५ |
| उदकषट्पलकघृत | ... ” | हुताशनरस, बृहद्रुताशन रस | ... ३८६ |
| व्योषाद्यघृत, चव्याद्यघृत | ... ३६१ | जातीफलादिवटी, भास्कररस | ... ३८७ |
| कुटजाद्यघृत, सिद्धामृतघृत | ... ” | अग्निसन्दीपन रस | ... ३८८ |
| सुनिषण्णक-चांगेरीघृत | ... ३६२ | त्रिफलालोह, प्रदीपनरस, विजयरस | ... ३८९ |
| कासीसाद्यतैल, वृहत्कासीसाद्यतैल | ३६३ | अग्निरस, टङ्कणादि वटी, रस-राक्षस | ... ३९० |
| पिप्पल्याद्यतैल, दन्त्यरिष्ट | ... ३६४ | पञ्चामृतवटी, ज्वालानाल रस | ... ३९१ |
| क्षार | ... ३६५ | भक्तविपाकवटी, बृहद्भक्तपाकवटी... | ३९२ |
| क्षारपाकविधि | ... ३६६ |
विषयानुक्रमणिका । ( ९ )
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| पाशुपतरस | ... ३९३ | कृमिरोगमें पथ्य | ... ४२३ |
| अजीर्णवलकालानलरस | ... ३९५ | कृमिरोगमें अपथ्य | ... ४२४ |
| शंखवटी | ... ३९६ | पाण्डु-कामला हलीमककी चिकित्सा । | |
| द्वितीय-शंखवटी | ... ३९७ | कामला-चिकित्सा | ४२६ |
| तृतीय बृहच्छंखवटी | ... ,, | कुम्भकामलाकी चिकित्सा | ... ४२७ |
| चतुर्थ-शंखवटी और महाशंखवटी | ३९८ | हलीमककी-चिकित्सा | ,, |
| पंचम-महाशंखवटी, षष्ठ-महाशंखवटी | ... ३९९ | फलत्रिकादि-कषाय, वासादि-कषाय | ... ४२८ |
| वज्रक्षार | ... ४०० | नवायसलौह | ... ,, |
| क्रव्यादरस | ... ४०१ | निशालौह, धात्रीलौह, विडंगादि-लौह | ... ४२९ |
| विश्वोद्दीप्तकाथ | ... ४०२ | दाव्यादिलौह, त्रिकत्रयाद्यलौह | ... ४३० |
| वीरभद्राभ्रक | ... ४०३ | कामलान्तकलौह | ... ४३१ |
| लवङ्गाद्य मोदक, सुकुमारमोदक | ... ४०४ | पञ्चामृतलौह-मंडूर | ... ४३२ |
| त्रिवृदादिमोदक, हरीतकीप्रयोग | ... ४०५ | वज्रवटक मण्डूर, पुनर्नवादिमण्डूर | ४३३ |
| अमृता-हरीतकी, शार्दूलकाशिक | ... ४०६ | त्र्यूषणादिमण्डूर | ... ४३४ |
| मुस्तकारिष्ट | ... ४०७ | चन्द्रसूर्यात्मकरस | ... ४३५ |
| चित्रकगुड, क्षारगुड | ... ४०८ | प्राणवल्लभरस | ... ४३६ |
| मस्तुषट्पलघृत, अग्निघृत | ... ४०९ | पञ्चाननवटी, पाण्डुसुदनरस | ... ४३७ |
| बृहदग्निघृत | ... ४१० | आनन्दोदय रस, त्रैलोक्यसुन्दररस | ४३८ |
| अग्निमान्द्यरोगमें पथ्य | ... ४११ | योगराज | ... ४३९ |
| अग्निमान्द्यरोगमें अपथ्य | ... ४१२ | धात्र्यरिष्ट, हरिद्रातघृत | ... ४४० |
| कृमिरोग-चिकित्सा । | द्राक्षाघृत, मूर्वाद्यघृत, व्योषाद्यघृत | ४४१ | |
| पारसीयादिचूर्ण | ... ४१५ | पाण्डुरोगमें पथ्य, पाण्डुरोग-में अपथ्य | ... ४४२ |
| कृमिकालानल रस | ... ४१६ | रक्तपित्त-चिकित्सा | ४४३ |
| कृमिधूलिजलप्लव रस | ... ,, | ह्रीबेरादि, वासकादि | ... ४४८ |
| कृमिकोष्ठानल रस, लाक्षादिवटी | ... ४१७ | धान्यकादि, अटरूषकादि | ... ४४९ |
| कृमिमुद्गर रस, कीटारिरस | ... ४१८ | उशीरादिचूर्ण, एलादिगुटिका | ... ,, |
| कीटमर्दरस | ... ,, | अर्केश्वररस, रक्तपित्तान्तकरस | ... ४५० |
| कृमिघातिनी गुटिका, कृमि-विनाशनरस | ... ४१९ | रसामृतरस, सुधानिधिरस | ... ४५१ |
| कृमिहररस, कृमिरोगारिरस | ... ४२० | कपर्दरस, समशर्कर लौह | ... ४५२ |
| कृमिघ्नरस | ... ,, | शतमूल्यादिलौह, शर्कराद्यलौह | ... ४५३ |
| विडंगलौह, हरिद्राखण्ड | ... ४२१ | रक्तपित्तान्तकलौह | ... ,, |
| त्रिफलाद्यघृत, विडंगघृत | ... ४२२ | ||
| विडंगतैल, धुस्तूरतैल | ... ४२३ |
( १० ) भैषज्यरत्नावली-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| खण्डकाद्यलौह | ४५४ | हेमगर्भपोट्टलीरस, रत्नगर्भ-पोट्टलीरस | ४९१ |
| कूष्माण्डखण्ड | ४५५ | कनकसुन्दररस | ४९२ |
| वासाकूष्माण्डखण्ड | ४५६ | सर्वाङ्गसुन्दररस | ४९३ |
| वासाखण्ड | ४५७ | सर्पिर्गुड | ४९४ |
| वृहत्कूष्माण्डावलेह | ४५८ | एलादिमन्थ | ४९५ |
| त्रिवृतादिमोदक | ४५९ | पिप्पलीघृत, निर्गुण्डीघृत | ४९६ |
| वासाद्यघृत, दूर्वाद्यघृत | ४६० | बलाद्यघृत १-२, नागबलाद्यघृत | ४९७ |
| सप्तप्रस्थघृत, शतावरीघृत | ४६१ | बलागर्भघृत, पाराशरघृत | ४९८ |
| वृहच्छतावरीघृत | ४६२ | अजापञ्चक घृत, छागलाद्यघृत १-२ | ४९९ |
| कामदेवघृत | ४६३ | जीवन्त्याद्यघृत | ५०० |
| उशीरासव | ४६४ | अमृतप्राशघृत १-२ | ५०१ |
| रक्तपित्तमें पथ्य | ४६५ | महाचन्दनादितैल | ५०३ |
| रक्तपित्तमें अपथ्य | ४६७ | यक्ष्मारोगमें पथ्य | ५०५ |
| यक्ष्मरोग-चिकित्सा । | यक्ष्मारोगमें अपथ्य | ५०६ | |
| दशमूलक्वाथ, अश्वगन्धादिक्वाथ | ४७० | कासरोगकी चिकित्सा | ५०७ |
| त्रयोदशाङ्गक्वाथ | ,, | पञ्चमूलीक्वाथ | ५०९ |
| बलादिचूर्ण, लवंगाद्यचूर्ण | ४७१ | पिप्पल्यादिक्वाथ | ५१० |
| शृङ्गयर्जुनाद्य चूर्ण | ,, | कण्टकार्यादिक्वाथ, मरिचाद्यचूर्ण... | ,, |
| सितोपलादिलेह, वासावलेह | ४७२ | समशर्कर चूर्ण | ५११ |
| बृहद्द्वाक्षावलेह १-२ | ४७३ | तालीशाद्यचूर्ण और मोदक | ,, |
| च्यवनप्राश | ४७५ | कासान्तक, कासान्तकरस | ५१२ |
| द्राक्षारिष्ट, विन्ध्यवासियोग | ४७७ | कासकुठार, पित्तकासान्तकरस | ,, |
| यक्ष्मारि लौह, यक्ष्मान्तकलौह | ४७८ | पुरन्दरवटी, पञ्चामृतरस | ५१३ |
| शिलाजत्वादि लौह | ,, | अमृतार्णवरस, श्रीचन्द्रामृतरस | ५१४ |
| रजतादिलौह, क्षयकेसरी १-२ | ४७९ | श्रीडामरानन्दाभ्रक | ५१५ |
| रसेन्द्रगुटिका, वृहद्रसेन्द्रगुटिका | ४८१ | महाकालेश्वररस | ५१६ |
| कल्याणसुन्दराभ्ररस | ४८३ | विजयभैरवरस | ५१७ |
| वृहच्चन्द्रामृतरस, कुमुदेश्वररस | ४८४ | काससंहारभैरव रस | ५१८ |
| कांचनाभ्ररस, वृहत्काञ्चनाभ्ररस... | ४८५ | वृहद्रसेन्द्रगुटिका | ५१९ |
| स्वल्पमृगांकरस मृगांकरस | ४८६ | महोदधि रस, तरुणीनन्दरस | ५२० |
| राजमृगांकरस | ४८७ | समशर्करलौह | ५२२ |
| महामृगांकरस | ४८८ | श्रीचन्द्रामृतलौह, भागोत्तरगुटिका | ५२३ |
| लोकेश्वरपोट्टलीरस | ४८९ | लक्ष्मीविलासरस | ५२५ |
विषयानुक्रमणिका । ( ११ )
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| शृङ्गाराम्र | ५२५ | श्वासरोगमें पथ्य, श्वासरोगमें अपथ्य | ५५६ |
| सार्वभौमरस | ५२६ | स्वरभंगकी चिकित्सा | ५५७ |
| बृहच्छृङ्गाराम्र | ५२७ | चव्यादिचूर्ण, त्र्यम्बकाभ्र | ५५८ |
| नित्योदय रस | ५२८ | भैरवरस, किन्नरकण्ठरस | ५५९ |
| वसन्ततिलक रस, व्याघ्रीहरीतकी | ५२९ | निदिग्धिकावलेह | ५६० |
| वासावलेह | ५३० | व्याघ्रीघृत, सारस्वतघृत (ब्राह्मीघृत) | ५६१ |
| कण्टकार्यावलेह, कण्टकारीघृत | ५३१ | भृंगराजाद्यघृत, स्वरभंगमें पथ्य | ५६२ |
| दशमूलषट्पलक घृत | ,, | स्वरभंगमें अपथ्य | ५६३ |
| छागलाद्यघृत | ५३२ | अरोचकचिकित्सा । | |
| कुंकुमाद्यघृत | ५३३ | यमानीषाडव, कलहंस कांजी | ५६५ |
| चन्दनाद्यतैल, वासा-चन्दनाद्यतैल | ५३४ | तिन्तिडीपानक, रसाला | ५६६ |
| कासरोगमें पथ्य | ५३५ | रसकेसरी, सुधानिधि रस | ५६७ |
| कासरोगमें अपथ्य | ५३६ | सुलोचनाभ्रक | ५६८ |
| हिक्का-श्वासरोगकी चि० | ५३७ | अरोचकमें पथ्य | ५६९ |
| दशमूलादि, शठ्यादि, वासादि क्वाथ | ५४० | अरोचकमें अपथ्य | ५७० |
| शुण्ठीभार्ङ्गी क्वाथ, हरिद्रादिचूर्ण... | ,, | छर्दि ( वमन ) चिकित्सा । | |
| शृङ्ग्यादिचूर्ण, विजयवटी | ५४१ | एलादिचूर्ण | ५७२ |
| डामरेश्वररस | ,, | रसेन्द्र, वृषध्वजरस, पद्मकाद्यघृत | ५७३ |
| महाश्वासहरिलौह | ५४२ | छर्दिरोगमें पथ्य | ५७४ |
| पिप्पल्याद्यलौह, श्वासकुठाररस... | ५४३ | छर्दिरोगमें अपथ्य | ५७५ |
| महाश्वासकुठार रस | ,, | तृषाकी चिकित्सा । | |
| श्वासभैरवरस, श्वासचिन्तामणि... | ५४४ | रसादिचूर्ण, महोदधिरस | ५७९ |
| श्वासकासचिन्तामणि, बृहन्मृगाङ्कवटी | ५४५ | तृष्णारोगमें पथ्य | ,, |
| कनकासव | ५४६ | तृष्णारोगमें अपथ्य | ५८० |
| शृङ्गीगुडघृत | ५४७ | मूर्च्छारोगकी चिकित्सा | ५८१ |
| भार्ङ्गीशर्करा | ५४८ | मूर्च्छान्तकरस, अश्वगन्धारिष्ट | ५८३ |
| भार्ङ्गीगुड | ५४९ | मूर्च्छारोगमें पथ्य | ५८४ |
| कुलत्थगुड | ५५० | मूर्च्छारोगमें अपथ्य | ५८५ |
| अगस्त्यहरीतकी, हिंस्त्राद्यघृत | ५५१ | मदात्ययरोग-चिकित्सा । | |
| तेजोवत्याद्यघृत, चन्दनाद्यतैल | ५५२ | फलत्रिकाद्यचूर्ण, एलाद्यमोदक | ५८७ |
| बृहच्चन्दनाद्यतैल | ५५३ | महाकल्याणवटी, पुनर्नवाद्यघृत | ५८८ |
| हिक्कारोगमें पथ्य | ५५४ | मदात्ययरोगमें पथ्य | ,, |
| हिक्कारोगमें अपथ्य | ५५५ | मदात्ययरोगमें अपथ्य | ५८९ |
( १२ ) भैषज्यरत्नावली-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| दाहकी चिकित्सा। | आमाशयगत-वातकी चिकित्सा | ६१६ | |
| चन्दनादि क्वाथ, पर्पटादि क्वाथ | ५९० | पक्वाशयगत-वातकी चिकित्सा | ,, |
| दाहान्तकरस | ,, | बस्त्यादिगत-वातकी चि० | ,, |
| सुधाकररस | ५९१ | स्नायुसन्ध्यस्थिगत-वातकी चि० | ,, |
| कुशाद्यतैल और घृत, दाहरोगमें पथ्य | ,, | त्वग्गत वातकी चि० | ६१७ |
| दाहरोगमें अपथ्य | ५९३ | रक्तगत-वातकी चि० | ,, |
| उन्मादरोगकी चिकित्सा। | मांसमेदोगत वातकी चि० | ,, | |
| अञ्जन | ५९५ | अस्थिमज्जागत-वातकी चि० | ,, |
| निम्बधूप, महाधूप, सारस्वत चूर्ण | ५९६ | शुक्रगत-वातकी चि० | ,, |
| उन्मादपर्पटीरस, उन्मादभञ्जिनी | ५९७ | शुष्कगर्भकी चि० | ,, |
| उन्मादगजकेसरी, उन्मादगजांकुश | ५९८ | शिरोगत-वातकी चि० | ६१८ |
| उन्मादभञ्जनरस, भूतांकुश रस | ५९९ | व्यादितकी चि० | ,, |
| चतुर्भुजरस | ६०० | अर्दितकी चि० | ,, |
| हिंग्वाद्यघृत, लशुनाद्यघृत | ६०१ | मन्यास्तम्भकी चि० | ,, |
| पानीयकल्याणघृतं | ६०२ | ग्रीवास्तम्भकी चि० | ६१९ |
| क्षीरकल्याणघृत, महाकल्याणघृत | ६०३ | जिह्वास्तम्भकी चि० | ,, |
| स्वल्पचैतसघृत | ,, | कुब्जकी चि० | ,, |
| महापैशाचिकघृत, शिवाघृत | ६०४ | आध्मानकी चि० | ,, |
| शिवातैल | ६०६ | अष्ठीला और प्रत्यष्ठीलाकी चि० | ,, |
| उन्मादरोगमें पथ्य | ६०७ | गृध्रसीकी चि० | ६२० |
| उन्मादरोगमें अपथ्य | ६०८ | वातकण्टककी चि० | ,, |
| अपस्माररोगकी चिकित्सा। | खल्वकी चि० | ,, | |
| सूतभस्मप्रयोग, इन्द्रब्रह्मवटी | ६१० | शिराग्रहकी चि० | ,, |
| भूतभैरव रस, वातकुलान्तक | ६११ | अपतानककी चि० | ६२१ |
| कूष्माण्डघृत, ब्राह्मीघृत | ६१२ | पक्षाघातकी चि० | ,, |
| स्वल्पपञ्चगव्य घृत | ,, | अपतन्त्रककी चि० | ,, |
| बृहत्पञ्चगव्य घृत | ,, | खञ्ज और पंगुताकी चि० | ६२२ |
| महाचैतसघृत | ६१३ | क्रोष्टुशीर्षकी चि० | ,, |
| पलंकषाद्यतैल | ६१४ | कलायखञ्जकी चि० | ,, |
| अपस्माररोगमें पथ्यापथ्यविधि | ६१५ | वाह्यान्तरायामककी चि० | ,, |
| वातव्याधिकी चिकित्सा। | त्रिकशूलकी चि० | ,, | |
| कोष्ठगत-वातकी चिकित्सा | ६१६ | पाददाहकी चि० | ६२३ |
| पादहर्षकी चि० | ,, |
विषयानुक्रमणिका । ( १३ )
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| दशमूलादिक्वाथ, बलादिक्वाथ | ६२३ | नारायणतैल | ६५५ |
| एरण्डादिक्वाथ | ,, | मध्यमनारायणतैल | ६५६ |
| सिंहास्यादिक्वाथ, रास्नासप्तकक्वाथ | ६२४ | महानारायणतैल | ६५७ |
| माषादिक्वाथ, गोक्षुरादिक्वाथ | ,, | पुष्पराजप्रसारिणीतैल | ६६० |
| माषबलादिक्वाथ | ,, | हिमसागरतैल | ६६१ |
| कल्याणलेह, शाल्वणस्वेद | ६२५ | सिद्धार्थकतैल | ६६२ |
| वातगजांकुश | ६२६ | नकुलतैल | ६६३ |
| बृहद्वातगजांकुश, महावातगजांकुश | ६२७ | महाकुक्कुटमांसतैल | ६६५ |
| लघुत्रानन्दरस | ,, | माषतैल १-२, लघुमाषतैल | ६६६ |
| गगन दिवटी, कुब्जविनोद रस | ६२८ | बृहन्माषतैल | ६६७ |
| सर्वाङ्गकम्पारिरस, चिन्तामणिरस | ६२९ | सप्तप्रस्थमहामाषतैल | ६६८ |
| चिन्तामणिचतुर्मुख, बृहद्वात-चिन्तामणि | ६३० | महामाषतैल | ६६९ |
| निरामिषमहामाषतैल | ६७० | ||
| चतुर्मुखरस | ६३१ | माषबलादितैल | ६७१ |
| लक्ष्मीविलासरस, योगेन्द्ररस | ६३२ | कुब्जप्रसारिणीतैल | ६७२ |
| वातारिरस | ६३३ | त्रिशतीप्रसारणीतैल | ,, |
| अनिलारिरस | ६३४ | सप्तशतिकप्रसारणी | ६७५ |
| सर्वाङ्गीसुन्दररस, शीतारिरस | ६३५ | एकादशशतिकप्रसारणीतैल | ६७६ |
| तालकेश्वररस, वातविध्वंसनरस | ६३६ | अष्टादशशतिकप्रसारणीतैल | ६७८ |
| वातनाशनरस, वातकण्टकरस | ६३७ | महाराजप्रसारिणीतैल | ६८० |
| त्रैलोक्यचिन्तामणिरस | ६३८ | महासुगन्धितैल और लक्ष्मी-विलासतैल | ६८४ |
| स्वल्पलशोनपिण्ड, त्रयोदशांगगुग्गल | ६४० | वातव्याधिमें पथ्य | ६८५ |
| दशमूलाद्यघृत, अश्वगन्धाद्यघृत | ६४१ | वातव्याधिमें अपथ्य | ६८७ |
| नकुलाद्यघृत | ,, | पित्तरोगकी चिकित्सा | ६८८ |
| छागलाद्यघृत | ६४२ | धात्रीलौह | ६८९ |
| बृहच्छागलद्यघृत | ६४३ | पित्तान्तकरस, महापित्तान्तकरस | ६९० |
| हंसाद्यघृत | ६४६ | गुडूचीतैल, पित्तरोगमें पथ्य | ६९१ |
| रसोनाद्य तैल, मूलकाद्यतैल | ६४७ | पित्तरोगमें अपथ्य | ,, |
| वायुच्छायासुरेन्द्रतैल | ,, | कफरोगकी चिकित्सा | ६९२ |
| महाबलातैल | ६४९ | कफचिन्तामणिरस, बृहत्कफ-केतुरस | ६९३ |
| अश्वगंधातैल | ६५० | महाश्लेष्मकालानलरस | ६९४ |
| श्रीगोपालतैल | ६५१ | श्लेष्मशैलेन्द्ररस (रसेन्द्रगुटिका) | ,, |
| विष्णुतैल | ६५३ | महालक्ष्मीविलास | ६९६ |
| बृहद्विष्णुतैल | ६५४ |
( १४ ) भैषज्यरत्नावली-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| धुस्तूरतैल | ६९७ | ऊरुस्तम्भमें अपथ्य | ७२८ |
| कनकतैल | ६९८ | आमवातकी चिकित्सा । | |
| तम्रराजतैल | ६९९ | एरण्डादि, शठ्यादि | ७३० |
| कफरोगमें पथ्य, कफरोगमें अपथ्य | ७०० | रसॊनादि, रास्नापञ्चक, रास्नासप्तक | ७३१ |
| वातरक्तरोगकी चिकित्सा | ७०१ | रास्नादशमूलक, मध्यमरास्नादि | " |
| अमृतादि, सिंहास्यादि पटोलादि | ७०३ | महारास्नादि | ७३२ |
| मञ्जिष्ठादि, त्रिवृतादि, नवकार्षिक | ७०४ | शतपुष्पाद्यचूर्णं, हिंग्वाद्यचूर्णं | ७३३ |
| निम्बादिचूर्णं | " | अलम्बुषाद्यचूर्णं १-२ | " |
| वातरक्तान्तकरस | ७०५ | वैश्वानरचूर्णं, शंकरस्वेद | ७३४ |
| अन्य प्रकार वातरक्त चिकित्सा | ७०६ | प्रसारणीसंधान, आमवातारिवटिका | ७३५ |
| विश्वेश्वररस | " | आमवातारिरस, आमवातेश्वररस | ७३६ |
| द्वादशायस | ७०७ | वातगजेन्द्रसिंह | ७३८ |
| गुडूच्यादिलौह, पित्तान्तकलौह | ७०८ | आमप्रमाथिनी वटिका | ७३९ |
| लांगलाद्यलौह | " | आमवाताद्रिवज्ररस | " |
| योगसारामृत | ७०९ | त्रिफलादिलौह, विडङ्गादिलौह | ७४० |
| तालभस्म | ७१० | पञ्चाननरसलौह | ७४१ |
| महातालेश्वर रस, अमृतागुग्गुल... | ७११ | अजमोदादिवटक | ७४२ |
| रसाभ्रगुग्गुल | ७१२ | आमवातगजसिंह मोदक | ७४४ |
| कैशोरकगुग्गुल | ७१३ | रसोनपिण्ड | ७४५ |
| पुनर्नवा-गुग्गुल | ७१४ | महारसोनपिण्ड | ७४६ |
| गुडूचीघृत, शतावरी घृत | ७१५ | वातारिगुग्गुल | ७४७ |
| अमृता घृत | ७१६ | योगराजगुग्गुल | ७४८ |
| मध्यमगुडूचीतैल, बृहद्गुडूचीतैल | ७१७ | बृहद्योगराजगुग्गुल | ७४९ |
| महारुद्रगुडूचीतैल | ७१८ | व्याधिशार्दूलगुग्गुल | ७५० |
| महापिण्डतैल | ७१९ | बृहत्सिंहनाद-गुग्गुल | ७५१ |
| विषतिन्दुकतैल | ७२० | शुण्ठीघृत | ७५२ |
| रुद्रतैल | ७२१ | शृङ्गवेराद्यघृत, प्रसारणीतैल | ७५३ |
| महारुद्रतैल | ७२२ | सैन्धवाद्यतैल | " |
| वातरक्तमें पथ्य, वातरक्तमें अपथ्य | ७२३ | बृहत्सैन्धवाद्यतैल | ७५४ |
| ऊरुस्तम्भकी चिकित्सा | ७२४ | विजयभैरवतैल | ७५५ |
| भल्लातकादि, पिप्पल्यादि | ७२५ | महाविजय भैरवतैल, आमवात-में पथ्य | ७५६ |
| गुञ्जाभद्ररस, अष्टकटूवरतैल कुष्ठाद्यतैल | ७२६ | आमवातमें अपथ्य | ७५७ |
| महासैन्धवाद्यतैल, ऊरुस्तम्भ-में पथ्य | ७२७ |
विषयानुक्रमणिका । ( १५ )
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| शूलरोगकी चिकित्सा । | नारिकेलामृत | ७८८ | |
| वातिक-शूलचिकित्सा | ७५७ | गुडपिप्पलीघृत | ७८९ |
| पैत्तिक-शूलचिकित्सा | ७६० | पिप्पलीघृत, बीजपूराद्यघृत | ७९० |
| श्लैष्मिक-शूलचिकित्सा | ७६१ | शूलगजेन्द्रतैल, शूलरोगमें पथ्य | ७९१ |
| आम-शूलचि० | ७६२ | शूलरोगमें अपथ्य | ७९२ |
| वातपैत्तिक-शूलचि० | ” | उदावर्त्त, आनाहकी चिकित्सा । | |
| पित्तश्लैष्मिक-शूलचि० | ” | नाराचचूर्ण | ७९६ |
| त्रिदोषज-शूलचि० | ७६३ | फलवर्ति, त्रिकद्वादिवर्ति | ७९७ |
| परिणाम-शूलचि० | ” | नाराचरस | ” |
| नारिकेलक्षार, शंखादिचूर्ण, सामुद्राद्यचूर्ण | ७६५ | वैद्यनाथवटी, बृहदिच्छाभेदीरस... | ७९८ |
| शम्बूकादिगुडिका, शंखरसगुटिका | ७६६ | गुडाष्टक, शुष्कमूलाद्यघृत | ७९९ |
| शूलहरणयोग | ७६७ | स्थिराद्यघृत | ” |
| शूलगजकेसरी, शूलवज्रिणीवटी | ७६८ | उदावर्त्तमें पथ्य, उदावर्त्तमें अपथ्य | ८०० |
| शूलान्तकरस | ७६९ | आनाहमें पथ्य और अपथ्य | ” |
| त्रैगुणाख्यरस, श्रीविद्याधररस | ७७० | गुल्मरोगकी चिकित्सा | ८०१ |
| बृहद्विद्याधररस | ७७१ | वातगुल्मचिकित्सा | ८०३ |
| त्रिफलालौह, शर्कराद्यलौह | ७७२ | पित्तगुल्मचि० | ८०४ |
| सप्तामृतलौह | ” | कफगुल्मचि० | ८०५ |
| शूलराजलौह, वैश्वानरलौह | ७७३ | द्वन्द्वजगुल्म-चि० | ८०६ |
| चतुःसमलौह | ७७४ | सान्निपातिकगुल्म-चि० | ” |
| धात्रीलौह | ७७५ | रक्तगुल्म-चि० | ८०७ |
| बृहद्धात्रीलौह | ७७६ | हिंग्वादिचूर्ण १-२ | ८०८ |
| क्षीरमण्डूर, रसमण्डूर | ७७७ | वचादिचूर्ण, लवंगादिचूर्ण | ८०९ |
| कोलादिमण्डूर, चतुःसममण्डूर... | ७७८ | कांकायनगुडिका | ८१० |
| भीमवटक मण्डूर, तारामंडूरगुड... | ७७९ | पञ्चाननरस, शिखिवाडवरस | ८११ |
| शतावरीमण्डूर | ७८० | नागेश्वररस, गुल्मकालानलरस | ८१२ |
| बृहच्छतावरीमण्डूर १-२ | ७८१ | बृहद्गुल्मकालानलरस | ८१३ |
| हरीतकीखण्ड | ७८२ | महागुल्मकालानलरस | ” |
| पूगखण्ड १-२ | ७८३ | गुल्मशार्दूलरस, सर्वेश्वररस | ८१४ |
| खण्डामलकी | ७८५ | गुल्मवज्रिणीवटिका, रसायनामृतलौह | ८१५ |
| नारिकेलखण्ड | ७८६ | दन्तीहरीतकी | ८१६ |
| बृहन्नारिकेलखण्ड | ७८७ | पञ्चपलघृत, भल्लातकाद्यघृत | ८१७ |
( १६ )
भैषज्यरत्नावली-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| त्रायमाणाद्यघृत | ८१७ | शुंठादि, एलादि | ८४३ |
| नाराचघृत | ८१८ | वारतर्वादिगण, आनन्दयोग | ८४४ |
| हबुषाद्यघृत, क्षीरषट्पलकघृत | ८१९ | बृहद्गोक्षुराद्यवलेह | ८४५ |
| धात्रीषट्पलकघृत | ,, | पाषाणभिन्न | ८४६ |
| द्राक्षाद्यघृत, गुल्मरोगमें पथ्य | ८२० | पाषाणवज्ररस, वरुणाद्यलौह | ८४७ |
| गुल्मरोगमें अपथ्य | ८२१ | कुलत्थाद्यघृत, वरुणघृत | ८४८ |
| हृद्रोगकी चिकित्सा । | पाषाणाद्यघृत | ८४९ | |
| रसायन, नागार्जुनारुन | ८२५ | भद्रावह्नघृत, विदारीघृत | ८५० |
| हृदयार्णवरस, पञ्चाननरस | ८२६ | दुरुगाद्य तैल, शिलोद्भिदादितैल | ८५२ |
| प्रभाकरवटी | ,, | उशीराद्य तैल | ,, |
| चिन्तामणिरस, विश्वेश्वररस | ८२७ | अश्मरीरोगमें पथ्य | ८५३ |
| शङ्करवटा | ८२८ | अश्मरीरोगमें अपथ्य | ८५४ |
| कल्याणसुन्दररस, वल्लभघृत | ८२९ | प्रमेहकी चिकित्सा । | |
| श्वदंष्ट्राद्यघृत | ,, | फलत्रिकादि | ८५६ |
| बलाद्यघृत, अर्जुनघृत | ८३० | विड़ङ्गादि, मुस्तादि, शिलाजतुप्रयोग | ८५७ |
| हृदयरोगमें पथ्य | ,, | कुशावलेह | ८५८ |
| हृदयरोगमें अपथ्य | ८३१ | शालसागरादिलेह, वङ्गावलेह | ८५९ |
| मूत्रकृच्छ्रकी चिकित्सा । | विडङ्गादिलौह, मेहकालानलरस... | ८५९ | |
| तृणपञ्चमूल, पञ्चतृणक्षीर, त्रिकण्टकादि | ८३४ | पञ्चाननरस, चन्द्रकला, मेहमुद्गरवटिका | ८६० |
| धान्यादि, बृहद्धान्यादि | ८३५ | शुक्रमातृकावटी | ८६१ |
| अमृतादि, शतावर्यादि | ,, | वेदविद्यवटी | ८६२ |
| हरीतक्यादि, तारकेश्वररस | ८३६ | वङ्गाष्टक, मेहवज्र | ८६३ |
| त्रिनेत्राख्यरस | ,, | चन्द्रप्रभागुडिका, चन्द्रप्रभावटी | ८६४ |
| मूत्रकृच्छ्रान्तकरस १-२ | ८३७ | स्वर्णवंग, मेहकेशरी | ८६६ |
| शतावरीघृत और क्षीर | ८३८ | मेहान्तकरस, सर्वेश्वररस | ८६७ |
| त्रिकण्टकाद्य घृत, मूत्रकृच्छ्रमें पथ्य | ,, | वंगेश्वररम १-२ | ८६८ |
| मूत्रकृच्छ्रमें अपथ्य | ८३९ | बृहद्वङ्गेश्वररस १-२ | ,, |
| मूत्राघातकी चिकित्सा । | हरिशङ्कररस | ८६९ | |
| धान्यगोक्षुरकघृत मूत्राघातमें पथ्य | ८४१ | बृहद्धरिशङ्कररस, मेहकुञ्जरकेशरीरस | ८७० |
| मूत्राघातमें अपथ्य | ८४२ | अपूर्व मालिनीवसन्त | ८७१ |
| अश्मरीकी चिकित्सा । | बृहत्कामचूड़ामणिरस | ,, | |
| वरुणादि, बृहद्वरुणादि | ८४३ | प्रमेहचिन्तामणि | ८७३ |
| शारमलीघृत, दाडिमाद्यघृत | ,, |
विषयानुक्रमणिका । ( १७ )
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| बृहद्दाडिमाद्यघृत | ... ८७४ | दस्तको बन्द करनेके उपाय, वह्निरस | ९०६ |
| महादाडिमाद्यघृत | ... ८७५ | चुलिकावटी, श्रीवैद्यनाथादेशवटिका | ९०७ |
| मेहमिहिरतैल | ... ८७६ | अभयावटी | ... ९०८ |
| प्रमेहमिहिरतैल | ... ८७७ | शोथोदरारिलौह | ... ९०९ |
| देवदार्वाद्यरिष्ट | ... ८७८ | वज्रक्षार | ... ९१० |
| चन्दनासव | ... ८७९ | विन्दुघृत, महाबिन्दुघृत, | ... ९११ |
| प्रमेहमें पथ्य | ... ८८० | नाराचघृत | ... ९१२ |
| प्रमेहमें अपथ्य | ... ८८१ | बृहन्नाराचघृत उदररोगमें पथ्य | ... ९१३ |
| उदररोगमें अपथ्य | ... ९१४ | ||
| सोमरोगकी चिकित्सा । | |||
| तारकेश्वररस | ... ८८३ | प्लीहा और यकृत्की चिकित्सा । | |
| गननादिलौह, सोमनाथरस | ... ८८४ | यमानिकादि चूर्ण | ... ९१५ |
| बृहत्सोमनाथरस | ... ८८५ | गुडूच्यादिचूर्ण, रोहितकाद्यचूर्ण | ... ९१६ |
| सोमेश्वररस | ... ८८६ | मानकादिगुटिका | ... ,, |
| बहुमूत्रान्तकरस १-२ | ... ८८७ | बृहन्मानकादिगुटिका | ... ९१७ |
| हमेनाथरस, मालतीकुसुमाकर | ... ८८८ | अर्कलवण, अभयालवण | ... ९१८ |
| वसन्तकुसुमाकररस | ... ८८९ | वर्द्धमानपिप्पली | ... ९१९ |
| कस्तूरीमोदक | ... ८९० | गुडपिप्पली | ... ९२० |
| धात्रीघृत, बृहद्धात्रीघृत | ... ८९१ | बृहद्गुडपिप्पली | ... ९२१ |
| कदल्यादिघृत | ... ८९२ | रसराज, प्लीहान्तकरस | ... ९२२ |
| वासुकिभूषणरस, विद्याधररस | ... ९२३ | ||
| मेदरोगकी चिकित्सा ८९३ | लोकनाथरस १-२ | ... ,, | |
| व्योषाद्य सक्तुप्रयोग | ... ८९५ | बृहल्लोकनाथरस, प्लीहारिरस | ... ९२५ |
| विडङ्गाद्यलौह | ... ८९६ | लौहमृत्युञ्जयरस | ... ९२६ |
| त्र्यूषणादिलौह, लौहरसायन | ... ८९७ | रोहीतकलौह, चित्रकादिलौह | ... ९२७ |
| नवकगुग्गुलु, अमृताद्यगुग्गुलु | ... ८९९ | यकृत्प्लीहारिलौह, यकृदरिलौह | ... ९२८ |
| त्रिफलाद्यतैल | ... ,, | महामृत्युञ्जयलौह | ... ९२९ |
| मेदरोगमें पथ्य | ... ९०० | सर्वेश्वरकौह | ... ९३० |
| मेदरोगमें अपथ्य | ... ९०१ | यकृत्प्लीहोदरहरलौह | ... ९३१ |
| शंखद्रावरस | ... ९३२ | ||
| उदररोगकी चिकित्सा । | शंखद्रावक, महाशंखद्रावक | ... ९३४ | |
| मानमण्ड | ९०३ | महाद्रावक १-३ | ... ९३६ |
| सामुद्राद्यचूर्ण, इच्छाभेदीरस १-३ | ९०४ | चित्रकघृत, पिप्पलीघृत | ... ९४० |
| भेदिनीवटी, नाराचरस | ... ९०५ | चित्रकपिप्पलीघृत, रोहीतकर्घृत | ... ९४१ |
| जलोदरारिरस | ... ९०६ |
२
( १८ ) भैषज्यरत्नावली-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| महारोहीतकघृत | ... ९४१ | रास्त्रादि, त्रिकट्त्वादि | ... ९७२ |
| रोहितकारिष्ट | ... ९४२ | विल्वादिचूर्ण, भक्तोत्तरीयचूर्ण | ... ९७३ |
| शोथकी चिकित्सा | ९४३ | शशिशेखररस, वातारिरस | ... ९७४ |
| सिंहास्यादि, पटोलादि, त्रिफलादि | ९४५ | वृद्धिबाधिकावटी, रसराजेन्द्र | ... ९७५ |
| पथ्यादि, पुनर्नवाष्टक | ... " | शतपुष्पाद्यघृत | ... ९७६ |
| शुण्ठी-पुनर्नवादि | ... " | त्रिवृतादिघृत, वह्नदंतीघृत | ... ९७७ |
| पुनर्नवा-दशक, पुनर्नवापुटस्वेद | ... ९४६ | गन्धर्वहस्तकतैल | ... ९७८ |
| पुनर्नवादिचूर्ण | ... " | वृद्धिरोगमें पथ्य, वृद्धिरोगमेंअपथ्य | ९७९ |
| शोथारिचूर्ण, पुनर्नवादिलेह | ... ९४७ | गलगण्डादिकी चिकित्सा । | |
| त्रिनेत्राख्यरस | ... " | गण्डमालाकी चिकित्सा | ९८१ |
| त्रिकट्वादिलौह, शोथारिलौह | ... ९४८ | अपचीकी चिकित्सा | ९८३ |
| शोथांकुशरस | ... " | ग्रन्थिकी चिकित्सा | ९८४ |
| पञ्चामृतरस, शोथकालानलरस | ... ९४९ | अर्बुदकी चिकित्सा | ९८५ |
| क्षेत्रपालरस | ... ९५० | रौद्ररस, काञ्चनारगुटिका | ... ९८८ |
| कल्पलतावटी, दुग्धवटी १-३ | ... ९५१ | काञ्चनारगुग्गुलु, सिन्दूरादितैल | ... ९८९ |
| तक्रवटी, दधिवटी | ... ९५३ | तुम्बीतैल, अमृतातैल, छुछुंदरीतैल | ९९० |
| शोथभस्मलौह | ... ९५४ | शाखोटकतैल, बिम्बादितैल, निर्गुण्डीतैल | " |
| सुधानिधि | ... ९५५ | व्योषाद्यतैल, चन्दनाद्यतैल, गुञ्जाद्यतैल | ९९१ |
| अग्निमुखमण्डूर, शोथारिमण्डूर | ... ९५६ | गलगण्डादिरोगोंपर पथ्य | ... " |
| तक्रमण्डूर, रसाभ्रमण्डूर | ... ९५७ | गलगण्डादिरोगोंपर अपथ्य | ... ९९२ |
| पुनर्नवादि गुग्गुलु, दशमूलहरीतकी | ९५९ | श्लीपदरोगकी चिकित्सा । | |
| शुण्ठीघृत, स्वल्प पुनर्नवाद्यघृत | ... ९६० | वृद्धदारकचूर्ण पिप्पल्यादिचूर्ण | ... ९९५ |
| पुनर्नवाद्यघृत१-२, माणकघृत | ... " | श्लीपदारि, श्लीपदगजकेशरी | ... ९९६ |
| चित्रकाद्यघृत, शुष्कमूलकाद्यतैल | ९६१ | नित्यानन्दरस | ... " |
| बृहच्छुष्कमूलकाद्यतैल १-२ | ... " | कृष्णाद्यमोदक | ... ९९७ |
| शोथशार्दूल तैल | ... ९६३ | सौरेश्वरघृत | ... ९९८ |
| पुनर्नवाद्यतैल | ... ९६४ | विडङ्गादितैल, श्लीपदरोगमेंपथ्य | ... ९९९ |
| शैलेयाद्यतैल, समुद्रशोषाद्यतैल | ... ९६५ | श्लीपदरोगमें अपथ्य | ... " |
| पुनर्नवाद्यरिष्ट | ... ९६६ | विद्रधिकी चिकित्सा | १००० |
| शोथमें पथ्य | ... ९६७ | वरुणादिघृत, विद्रधिरोगमें पथ्य | १००२ |
| शोथमें अपथ्य | ... ९६८ | विद्रधिरोगमें अपथ्य | १००३ |
| वृद्धिरोगकी चिकित्सा । | |||
| वध्न लक्षण | ... ९७० |
विषयानुक्रमणिका । ( १३ )
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| व्रणशोथकी चिकित्सा | १००३ | करवीराद्यतैल, निशाद्यतैल | १०३३ |
| त्रिफला-गुग्गुलु, तिलाष्टक | १००७ | सैन्धवाद्यतैल, भगन्दररोगमें पथ्य | ,, |
| सप्ताङ्ग-गुग्गुलु | १००८ | भगन्दररोगमें अपथ्य | १०३४ |
| जात्याद्यघृत और तैल | ,, | उपदंशकी चिकित्सा । | |
| बृहज्जात्याद्यतैल | १००९ | धूप, धूम | १०३६ |
| गौराद्यघृत और तैल | ,, | लेप | १०३७ |
| विपरीतभल्लतैल | १०१० | भैरवरस | १०३८ |
| व्रणराक्षसतैल बृहद्व्रणराक्षसतैल | १०११ | रसगुग्गुलु | १०४० |
| विडङ्गारिष्ट | १०१२ | सारिवाद्यवलेह | १०४१ |
| व्रणरोगमें पथ्य | १०१३ | रसशेखर | १०४२ |
| व्रणरोगमें अपथ्य | १०१४ | करञ्जाद्यघृत, भूनिम्बाद्यघृत | १०४३ |
| सद्योव्रणकी चिकित्सा | १०१५ | अनन्ताद्यघृत, आगारधूमाद्यतैल | १०४४ |
| अग्निदग्धव्रणकी चिकित्सा | ,, | उपदंशरोगमें पथ्य | ,, |
| जीरकघृत, पाटलीतैल | १०१७ | उपदंशरोगमें अपथ्य | १०४५ |
| मंजिष्ठाद्यतैल | ,, | शूकदोषकी चिकित्सा । | |
| भग्नकी चिकित्सा | १०१८ | दार्बीतैल, शूकदोषमें पथ्य | १०४७ |
| लाक्षागुग्गुलु, आभागुग्गुलु | १०२० | शूकदोषमें अपथ्य | १०४८ |
| गन्धतैल | ,, | कुष्ठरोगकी चिकित्सा । | |
| भग्नरोगमें पथ्य, भग्नरोगमें अपथ्य | १०२२ | आरग्वधादि, लघुमञ्जिष्ठादि | १०५६ |
| नाडीव्रणकी चिकित्सा | १०२३ | मध्यममञ्जिष्ठादि, बृहन्मञ्जिष्ठादि... | १०५७ |
| गुणवतीवर्त्ति | १०२५ | पञ्चनिम्ब १-२ | १०५८ |
| सप्तांगगुग्गुलु, श्यामाघृत | १०२६ | श्वेतारि, तालकेश्वररस | १०६० |
| स्वर्जिकाद्यतैल, कुम्भीकाद्यतैल | ,, | तालकेश्वर | १०६१ |
| भल्लातकाद्यतैल, निर्गुण्डीतैल | १०२७ | महातालकेश्वर | १०६२ |
| हंसपदीतैल, नरास्थितैल | ,, | उदयभास्कर, अमृतांकुरलौह | १०६३ |
| भगन्दरकी चिकित्सा | १०२८ | पाकलक्षण, रसमाणिक्य | १०६५ |
| नारायणरस | १०२९ | अमृतभल्लातक | १०६६ |
| चित्रविभाण्डक रस, ताम्रप्रयोग... | १०३० | महाभल्लातकगुड | १०६८ |
| नवकार्षिक गुग्गुलु | १०३१ | अमृतागुग्गुलु | १०७० |
| सप्तविंशतिकगुग्गुलु | ,, | वज्रकघृत | १०७१ |
| विष्यन्दनतैल | १०३२ | तिक्तकघृत, महातिक्तकघृत | १०७२ |
| सोमराजीघृत | १०७३ |
( २० ) भैषज्यरत्नावली-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| पञ्चतिक्तघृत | १०७४ | अम्लपित्तान्तकमोदक | ११०५ |
| पञ्चतिक्तघृतगुग्गुलु | १०७५ | सौभाग्यशुण्ठीमोदक | ११०६ |
| महाखदिरकघृत | १०७६ | सितामण्डूर | ११०७ |
| श्वेतकरवीराद्यतैल | ,, | शुण्ठी खण्ड, पिप्पलीखण्ड | ११०९ |
| कृष्णसर्पतैल, कुष्ठराक्षसतैल | १०७७ | बृहत्पिप्पलीखण्ड | १११० |
| कुष्ठराक्षसतैल | ,, | जीरकाद्यघृत, शतावरीघृत | ११११ |
| षड्बिन्दुतैल, उन्मत्ततैल | १०७८ | नारायणघृत | ,, |
| मरिचाद्यतैल, बृहन्मरिचाद्यतैल | १०७९ | अम्लपित्तरोगमें पथ्य | १११२ |
| सोमराजीतैल | १०८० | अम्लपित्तरोगमें अपथ्य | ,, |
| बृहत्सोमराजीतैल | १०८१ | विसर्पकी चिकित्सा । | |
| विषतैल, श्वित्रपञ्चाननतैल | १०८२ | अमृतादि | १११३ |
| आरग्वधाद्यतैल, वासाऽमृतैल | १०८३ | नवकषाय गुग्गुलु, कालानिलरुद्ररस | १११४ |
| कन्दर्पसारतैल | १०८४ | वृषाद्यघृत करञ्जतैल | १११५ |
| खदिरारिष्ट | १०८६ | विसर्परोगमें पथ्य, विसर्परोगमें अपथ्य | ,, |
| कुष्ठरोगमें पथ्य | १०८७ | विस्फोट-चिकित्सा | १११६ |
| कुष्ठरोगमें अपथ्य | १०८८ | व्रणारिगुग्गुलु, पञ्चतिक्तकघृत | १११७ |
| शीतपित्त उदर्द और कोठरोगकी चिकित्सा | १०८९ | विस्फोटरोगमें पथ्य | ,, |
| हरिद्राखण्ड | १०९० | विस्फोटरोगमें अपथ्य | १११८ |
| बृहद्धरिद्राखण्ड | १०९१ | मसूरिकाकी चिकित्सा । | |
| शीतपित्तोदर्दकोठरोगोंमें पथ्य | ,, | पटोलादि, अमृतादि | ११२३ |
| शीतपित्त, उदर्द और कोठरोगोंमें अपथ्य | १०९२ | इन्दुकलावटिका | ,, |
| अम्लपित्तकी चिकित्सा । | मसूरिकारोगमें पथ्य | ,, | |
| दशांग, पञ्चनिम्बादिचूर्ण | १०९५ | मसूरिकारोगमें अपथ्य | ११२४ |
| अविपत्तिकरचूर्ण, लीलाविलास | १०९६ | क्षुद्ररोगोंकी चिकित्सा । | |
| अम्लपित्तान्तकरस, भास्करामृताभ्र | १०९७ | अजगल्लिका-चिकित्सा | ११२५ |
| सर्वतोभद्रलौह | १०९८ | अनुशयी विवृतेन्द्रविद्धादि रोगोंकी चिकित्सा | ,, |
| पानीयभक्तवटिका | १०९९ | विदारिका पनसिकादि क्षुद्ररोगोंकी चिकित्सा | ११२६ |
| पञ्चाननगुटिका | ११०० | पाषाणगर्दभकी चिकित्सा | ,, |
| लघुक्षुधावतीगुटिका १--२ | ११०१ | वल्मीकरोगकी चिकित्सा | ,, |
| बृहत्क्षुधावतीगुटिका | ११०३ | ||
| खण्डकूष्माण्डकावलेह | ११०५ |
विषयानुक्रमणिका । ( २१ )
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| पाददारी ( बिबाई ) की चि० | ११२७ | कण्ठगत-मुखरोगकी० | ११५२ |
| उपोदिकाक्षारतैल | ... ११२८ | सर्वसरमुखरोगकी चिकित्सा | ११५४ |
| अलसकी चिकित्सा | ... ,, | सप्तच्छदादि | ... ११५६ |
| कदरकी चिकित्सा | ,, | पटोलादि, कालकचूर्ण, पीतकचूर्ण | ११५७ |
| चिप्पकी चिकित्सा | ११२९ | दशनसंस्कारचूर्ण | ... ,, |
| अंगुलीवेष्टककी चिकित्सा | ,, | दन्तरोगारशनिचूर्ण, क्षारगुटिका | ... ११५८ |
| पद्मिनीकण्टककी चिकित्सा | ,, | स्वल्पखदिरवटिका, बृहत्खदिरवटिका | ... ११५९ |
| जालगर्दभकी चिकित्सा | ,, | मुखरोगहररस | ... ११६० |
| अहिपूतनककी चिकित्सा | ११३० | महासहचरतैल, बकुलाद्यतैल | ... ११६१ |
| गुदभ्रंशकी चिकित्सा | ,, | मुखरोगमें पथ्य | ... ,, |
| चाङ्गेरीघृत, मूषिकाद्यतैल | ... ११३१ | मुखरोगमें अपथ्य | ... ११६२ |
| वर्णकघृत, द्विरिद्राद्यतैल | ... ११३४ | कर्णरोगकी चिकित्सा । | |
| कुंकुमाद्यतैल | ... ११३५ | दीपिकातैल, स्वर्जिकाद्यतैल | .... ११६७ |
| अरूंषिकाकी चिकित्सा | ११३६ | लशुनाद्य तैल, शम्बूकतैल | ... ११६८ |
| त्रिफलाद्यतैल | ... ,, | कुष्ठाद्यतैल, क्षारतैल | ... ,, |
| दारुणककी चिकित्सा | ,, | कर्णरोगमें पथ्य | ... ११६९ |
| इन्द्रलुप्तकी चिकित्सा | ११३७ | कर्णरोगमें अपथ्य | ... ११७० |
| केशरंजकयोग | ... ११३८ | नासारोगकी चिकित्सा । | |
| भृङ्गराजघृत, महाभृङ्गराजतैल | ... ११४१ | चित्रक-हरीतकी | ... ११७३ |
| आदित्यपाकगूडूचीतैल | ... ११४२ | पाठाद्यतैल, व्याघ्राद्यतैल | ... ११७४ |
| चन्दनाद्यतैल, महानीलतैल | ... ,, | त्रिकट्वाद्यतैल, चित्रकतैल | ... ,, |
| कच्छू और अहिपूतनकी चिकित्सा | ११४४ | नासारोगमें पथ्य, नासारोगमें अपथ्य | ... ११७५ |
| शूकरदंष्ट्रकी चिकित्सा | ,, | नेत्ररोगकी चिकित्सा | ११७६ |
| शय्यामूत्रकी चिकित्सा | ,, | वासकादि | ... ११७७ |
| मुखरोगकी चिकित्सा । | बृहद्वासकादि, कज्जल | ... ११७८ | |
| ओष्ठगत-मुखरोगकी चि० | ११४५ | श्रीनागार्जुनआञ्जन | ... ,, |
| दन्तगत-मुखरोगकी चि० | ११४६ | व्योषाद्यञ्जन, त्रिकट्वाद्यञ्जन | ... ११७९ |
| जिह्वागत-मुखरोगकी० | ११५० | व्रणशुक्रहरीवर्त्ति, दन्तवर्त्ति | ... १२०० |
| तालुगत-मुखरोगकी० | ११५२ | सुखावतीवर्त्ति | ... ,, |
| चन्द्रोदयवर्त्ति, कुमारिकावर्त्ति | ... १२०१ | ||
| दृष्टिप्रदावर्त्ति | ... ,, | ||
| नयनसुखावर्त्ति, चन्द्रप्रभावर्त्ति | ... १२०२ |
( २२ ) भैषज्यरत्नावली-
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| पञ्चशतिकावर्त्ति | ... १२०२ | प्रदरान्तकरस | ... १२३३ |
| सप्तामृतलौह | ... १२०३ | प्रदरारिलौह, सर्वाङ्गसुन्दररस | ... १२३४ |
| नयनामृतलौह, नेत्राशनिरस | ... १२०४ | रत्नप्रभावटिका | ... १२३५ |
| पटोलाद्यघृत | ... १२०५ | सितकल्याणाद्यघृत | ... १२३६ |
| शशकाद्यघृत, त्रिफलाद्यघृत १--२ | १२-६ | न्यग्रोधाद्यघृत | ... १२३७ |
| महात्रिफलाद्यघृत | ... १२०७ | विश्ववल्लभघृत, अशोकघृत | ... १२३८ |
| नृपवल्लभतैल और घृत | ... १२०९ | अशोकारिष्ट | ... १२३९ |
| भृङ्गराजतैल, नेत्ररोगमें पथ्य | ... १२१० | प्रदरमें पथ्यापथ्यविधि | ... १२४० |
| नेत्ररोगमें अपथ्य | ... १२११ | योनिव्यापदकी चिकित्सा । | |
| शिरोरोगकी चिकित्सा । | रजःप्रवर्त्तक योग | ... १२४० | |
| सूर्यावर्त्तकी चिकित्सा | १२१२ | रजःप्रवर्त्तिनीवटी,गर्भजनक-भेषज | १२४५ |
| अर्द्धावभेदककी चिकित्सा | १२१३ | नष्टपुष्पान्तकरस | ... १२४६ |
| अनन्तवातकी चिकित्सा | १२१४ | फलघृत | ... १२४७ |
| शङ्खककी चिकित्सा | " | कफलल्याणघृत | ... १२४८ |
| शिरोबस्ति | ... १२१५ | सोमघृत | ... १२४९ |
| अर्द्धनाडीनाटकेश्र्वर, चन्द्रकान्तरस | १२१६ | कुमारकल्पद्रुमघृत | ... १२५० |
| शिरःशूलादिवज्ररस | ... " | लोमशातनविधि | १२५३ |
| महालक्ष्मीविलास | ... १२१७ | आरग्वधाद्यतैल | ... १२५४ |
| मयूराद्यघृत, षड्बिन्दुतैल | ... १२१८ | क्षारतैल | ... १२५५ |
| दशमूलतैल १-२ | ... १२१९ | वन्ध्याकी चिकित्सा | १२५६ |
| मध्यमदशमूलतैल | ... १२२० | गर्भिणीरोगकी चिकित्सा | १२५८ |
| बृहद्दशमूलतैल १-२ | ... " | उभयपंचदशक, उभयविंशक कोष्ठ | १२६६ |
| महादशमूलतैल | ... १२२२ | प्रसवमंत्र | ... " |
| महाकनकतैल, रुद्रतैल | ... १२२३ | एरण्डादि, मधूकादि | ... १२६८ |
| तप्तराजतैल | ... १२२४ | लवङ्गादिचूर्ण, गर्भबिलासरस | .. १२६९ |
| कुमारीतैल | ... १२२५ | गर्भबिनोदरस | ... " |
| शिरोरोगमें पथ्य | ... १२२६ | गर्भचिन्तामणि | ... १२७० |
| शिरोरोगमें अपथ्य | ... १२२७ | गर्भचिन्तामणिरस | ... " |
| प्रदररोगकी चिकित्सा । | बृहद्गर्भेचिन्तामणिरस, इन्दुशेखररस | १२७१ | |
| दाग्र्यादि, चंदनादिचूर्ण | ... १२३० | गर्भिणीरोगमें पथ्य | ... १२७२ |
| पुष्यानुगचूर्ण | ... १२३१ | गर्भिणीरोगमें अपथ्य | ... " |
| उत्पन्नादि, मधूकाद्यवलेह | ... १२३२ | सूतिका रोगकी चिकित्सा | १२७३ |
विषयानुक्रमणिका । ( २३ )
| विषय. | पृष्ठ. | विषय. | पृष्ठ. |
|---|---|---|---|
| दशमूलक्वाथ, अमृत्वादि | ... १२७४ | पञ्चमूलादि | ... १३०२ |
| सहचरादि १-२ | ... " | बिल्वादि | ... " |
| सूतिकादशमूल, बृहद्द्दीबेरादि | ... १२७५ | शृङ्ग्यादि | ... " |
| देवदार्वादि | ... " | रजन्यादि | ... " |
| वज्रकाञ्जिक, भद्रोत्कटाद्यवलेह | ... १२७६ | कर्कटादि | ... १३०३ |
| सौभाग्यशुण्ठी १-२ | ... १२७७ | बालचतुर्भद्रिका | ... " |
| बृहत्सौभाग्यशुण्ठी | ... १२७९ | धातक्यादि | ... " |
| पञ्चजीरकगुड | ... १२८१ | पुष्करादि | ... " |
| जीरकाद्यमोदक | ... १२८२ | बालरोगान्तकरस | ... १३०४ |
| सूतिकाविनोदरस | ... " | कुमारकल्याणरस | ... १३०५ |
| बृहत्सूतिकाविनोदरस | ... १२८३ | अश्वगन्धाघृत | ... " |
| सूतकारिरस | ... " | बालचाङ्गेरीघृत | ... " |
| सूतिकाघ्नरस | ... " | अष्टमङ्गलघृत | ... १३०६ |
| सूतिकाहाररस | ... १२८४ | कुमारकल्याणघृत | ... " |
| रसशार्दूल | ... " | लाक्षादितैल | ... १३०७ |
| महारसशार्दूल | ... १२८५ | विषकी चिकित्सा | १३०७ |
| महाभ्रवटी | ... " | रसायनाधिकारः | १३१४ |
| सूतकारिरस | ... १२८६ | ऋतुहरीतकी | ... १३१८ |
| भद्रोत्कटाद्य घृत | ... " | भृङ्गराजादिचूर्ण | ... " |
| सूतिकादशमूलतैल | ... १२८७ | अमृतवर्तिका | ... १३१९ |
| स्तनरोगचिकित्सा | १२८८ | श्रीसिद्धमोदक | ... १३२१ |
| काशीशाद्यतैल | ... १२८९ | निर्गुण्डीकल्प | ... १३२२ |
| श्रीपर्णीतैल | ... १२९० | कार्श्यहरलौह | ... १३२३ |
| बालरोगकी चिकित्सा । | अमृतार्णवरस | ... १३२४ | |
| सारिवादि | ... १३०० | नीलकण्ठरस | ... " |
| मुस्तकादि | ... " | महानीलकण्ठरस | ... १३२५ |
| हरिद्रादि | ... १३०१ | मकरध्वजरसायन | ... १३२६ |
| भद्रमुस्तादि | ... " | बृहत्पूर्णचन्द्ररस | ... १३२७ |
| समङ्गादि | ... " | महालक्ष्मीविलासरस | ... १३२८ |
| नागरादि | ... " | वसन्तकुसुमाकररस | ... १३३० |
| बिल्वादि | ... " | वाजीकरणाधिकारः | १३३१ |
| पटोलादि | ... १३०२ | गोक्षुराद्यचूर्ण | ... १३३१ |