भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)
Bhaishajya Ratnavali Hindi
by कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल)
Source: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (origin)
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Read in context५८० भैषज्यरत्नावली । [ तृषा-
कोद्रवाः शालयः पेया विलेपी लाजसक्तवः ।
अन्नमण्डो धन्वरसाः शर्करारागखाण्डवौ ॥ २७ ॥
भृष्टैर्मुद्गैर्मसूरैर्वा चणकैर्वा कृतो रसः ।
रम्भापुष्पं तैलकूर्चं द्राक्षापर्पटपल्लवाः॥२८॥
कपित्थाः कोलमम्लीका कूष्माण्डकसुपोदिका ।
खर्जूरं दाडिमं धात्री कर्कटी नलदम्बु च ॥२९॥
जम्बीरं करमर्दश्च बीजपूरं गवां पयः ।
मधूकपुष्पं ह्रीबेरं तिक्तानि मधुराणि च ॥ ३० ॥
बालतालाम्बु शीताम्बु पयःपेटीप्रपाणकम् ।
माक्षिकं सरसीतोयं शताह्वानागकेशरम् ॥३१॥
एला जातीफलं पथ्या कुस्तुम्बुरु च टङ्कणम् ।
घनसारो गन्धसारः कौमुदी शिशिरानिलः ॥३२॥
चन्दनाईप्रियाश्लेषो रत्नाभरणधारणम् ।
हिमानुलेपनं च स्यात्पथ्यमेतत्तृषातुरे ॥ ३३ ॥
संशोधन और संशमन औषधियाँ, निद्रा, स्नान, कवलधारण करना, दीपकके द्वारा जलाई हुई हल्दीसे जीभके नीचेकी दो शिराओंमें दागदेना, कोदों और शालिधानोंके चावल, पेया, विलेपी ( चतुर्गुण जलासिद्ध अन्न ) खीलोंके सत्तू, भातका माँड मरुदेशोत्पन्न पशु पक्षियोंके मांसका यूष, मिश्री, रागखाण्डव, भुंनीहुई मूँग, मसूर और चनोंका यूष, नवीन केलेका मोचा या केलेका फूल, तैलकूर्च, दाख,पित्तपापडेके पत्ते, कैथ, बेर, इमली, पेठा, पोईका शाक, खजूर, अनार, आमले, ककडी, नीम, जम्बीरीनींबू, करोंदा, बिजौरानींबू, गौका दूध, महुएक फूल, सुगन्धवाला, तीखे और मीठे पदार्थ, कच्चे ताडके फलोंका जल, शीतल जल, कच्चे नारियलका जल, मीठे शर्बत, पन्ना, शहद, नदीका जल, शतावर, नागकेशर, इलायची, जायफल, हरड, धनियाँ, सुहागा, कपूर, चन्दन, चाँदनी, शीतल वायु, चन्दनादिका लेप की हुई स्त्रीका आलिङ्गन, रत्नजटित आभूषणोंका धारण करना और शीतल पदार्थोंका प्रलेप ये सब तृषारोगमें हितकारी हैं ॥ २६–३३ ॥
तृणारोगमें अपथ्य ।
खेदाञ्जनस्वेदनधूमपानव्यायामनस्यातपदन्तकाष्ठम् ।