भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)
Bhaishajya Ratnavali Hindi
by कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल)
Source: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (origin)
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Read in contextचिकित्सा ] भाषाटीकासहिता । ५६९
अरोचकमें पथ्य ।
वस्तिर्विरेको वमनं यथाबलं धूमोपसेवा कवलग्रहस्तथा ।
तिक्तानि काष्ठानि च दन्तघर्षणं चित्रान्नपानानि
हितैः कृतानि च ॥ ३१ ॥ गोधूममुद्गारुणशालिषष्टिका
मांसं वराहाजशशैनसम्भवम् । चेङ्गो झषाण्डं मधुरा-
लिकेल्लिशः प्रोष्ठी खलीशः कवयी च रोहितः ॥ ३२ ॥
कर्कारुवेत्राग्रनवीनमूलकं वार्त्ताकुशोभाञ्जनमोचदाडि-
मम् । भव्यं पटोलं रुचकं घृतं पयो बालानि तालानि
रसोनशूरणम् ॥ ३३ ॥ द्राक्षा रसालं नलदम्बु काञ्जिकं
मद्य रसाला दधि तक्रमार्द्रकम् । कक्कोलखर्जूरपियाल-
तिन्दुकं कर्कं कपित्थं बदरं विकङ्कतम् ॥ ३४ ॥ तालास्थि-
मज्जा हिमवालुका सिता पथ्या यमानी मरिचानि
रामठम् । स्वाद्वम्लतिक्तानि च देहमार्जना वर्गोऽय-
मुक्तोऽरुचिरोगिणे हितः ॥ ३५ ॥
अरुचिरोगमें रोगीके बलानुसार वस्तिक्रिया, विरेचन, वमन (ये सब क्रियायें रोगीके बलानुसार कराना), धूमपान, केवल, तिक्तरसवाले काष्ठकी दाँतुन, नानाप्रकारके पदार्थोंके द्वारा बनायेहुए रुचिकारक और हितकारक अन्न पान, गेहूँ, मूँग, लालशालिधान और सांठीधानोंके चावल, सूअर, बकरा, खरगोश, काला हिरन इनका मांस, चेङ्गनामक मछली, मछलीके अण्डे, मधुरालिका (क्षुद्रमत्स्यविशेष), इल्लिश (इलीस मछली), छोटी मछली, केई मछली खलीश मछली और रोहू-मछली, ककोडा, बेंतके अंकुर, कच्ची मूली, बैंगन, सहिजनेकी फली, केलेका मोचा, अनार, भव्यफल (कमरख), परवल, बिजौरानीम्बू, घी, दूध, कच्चे ताडके फल, लहसुन, जिमीकन्द, दाख, आम, नीम, काँजी, मद्य, रसाला, दही मट्ठा, अदरख, कंकौल, खजूर, चिरौंजी, तिन्दुकफल, पक्का कैथ, बेर, कण्टाई, ताडके फलकी गिरी-कपूर, मिश्री, हरड, अजवायन, मिरच, हींग एवं खट्टे मीठे और कडवे पदार्थोंका सेवन और शरीरमार्जन ये सब अरुचिरोगवाले मनुष्यके लिये हितकारक हैं ॥ ३१-३५ ॥