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भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

Bhaishajya Ratnavali Hindi

by कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल)

Source: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (origin)

Public domain in India · Report a copyright issue

DevanagariHindipublished1,416 pages

Page 444 of 1416

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Page 444
४१२भैषज्यरत्नावली ।[ अग्निमान्द्य-

अम्लवेतसजम्बीरमातुलुङ्गानि माक्षिकम् ।
नवनीतं घृतं तक्रं सौवीरकतुषोदके ॥ २३ ॥
धान्याम्लं कटुतैलं च रामठं लवणाईकम् ।
यमानी मरिचं मेथी धान्यकं जीरकं दधि ॥ २४ ॥
ताम्बूलं तप्तसलिलं कटुतिक्तौ रसावपि ।
मन्दानलेऽप्यजीर्णेऽपि पथ्यमेतन्नृणां भवेत् ॥ २५ ॥

रोगीकी अवस्थाको यथाविधि विचारकर कफजन्य अजीर्णमें प्रथम वमन, पित्तके अजीर्णमें प्रथम मृदु विरेचन और वातके अजीर्णमें प्रथम स्वेद देना आदि क्रियायें हितकर हैं एवं विविध प्रकारकी व्यायाम (दण्ड कसरत आदि परिश्रम) अग्निप्रदीपक और लघुपाकी पदार्थ, बहुत पुराने और बारीक लाल शालिधानोंके चावल, विलेपी एवं खीलोंका माँड, भातका माँड मूंगका यूष, मद्य तथा हिरन, मोर, खरगोश, लवापक्षी इस सबका मांसरस, सर्व प्रकारकी छोटी २ मछलियाँ, शान्तिशाक, बेतके अंकुर, बथुएका शाक, कच्चीमूली, लहसुन, पक्का पेठा, कच्ची केलेकी फली, सहिंजनेकी फली, परवल, बैंगन, नीम, ककोडा, करेला, बडी कटेरीके फल, अदरख, गन्धप्रसारिणी, मेढासिंगी, नोनिया, चौपतिया शाक, आमला, नारंगी, अनार, जौका मांड पित्तपापडा, अम्लवेत, जम्बीरी नींबू, बिजौरा नींबू, शहद, मक्खन, घी मट्ठा, सौवीरनामवाली कांजी, तुषोदक और धान्याम्लनामक काँजी, सरसोंका तेल, हींग, सेंधानामक और अदरख, अजवायन, मिरच, मेथी, धनियाँ, जीरा, दही, पान, गरम जल एवं चरपरे और कडुवे रसवाले पदार्थ ये मन्दाग्नि और अजीर्णरोगमें पथ्य हैं ॥ १७-२२५ ॥

अग्निमान्द्यरोगमें अपथ्य ।
विरेचनानि विण्मूत्रवायुवेगविधारणम् ।
अध्यशनं समशनं जागरं विषमाशनम् ॥ २२६ ॥
रक्तस्रुतिं शमीधान्यं मत्स्यं मांसमुपोदिकाम् ।
जलपानं पिष्टकं च जाम्बवं सवमालुकम् ॥ २२७ ॥
कूर्च्चिकां मोरटं क्षीरं किलाटं च प्रपाणकम् ।
तालास्थिसस्यं तद्नालं स्नेहनं दुष्टवारि च ॥ २२८ ॥
विरुद्धासात्म्यपानान्नं विष्टम्भीनि गुरूणि च ।
अग्निमान्द्येऽप्यजीर्णे च सर्वाणि परिवर्जयेत् ॥ २२९ ॥