भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)
Bhaishajya Ratnavali Hindi
by कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल)
Source: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (origin)
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Read in contextचिकित्सा ] भाषाटीकासहितः । १२४९
किंवा कन्यायेंही उत्पन्न होती. हो ऐसी स्त्रियोंको इस घृतका पान करना चाहिये । यह घृत योनिदोष, रजोदोष और योनिस्रावरोगोंमें भी हितकारी है । एवं संपूर्ण दोषोंको निवारण करनेवाला संतानकी वृद्धि और आयुकी वृद्धि करनेवाला है । इस फलकल्याणनामक घृतको अश्विनीकुमारोंने निर्माण किया है। "इस घृतमें लक्ष्मणाका उल्लेख न होनेपर भी वैद्यलोग लक्ष्मणाकी जडका कल्क डालते हैं। इसमें जीवद्वत्सा और एक वर्णवाली गौका दूध तथा घृत लेवे । एवं आरने उपलोंकी अग्निसे घृतको पकावे " ॥ ४६-५० ॥
सोमघृत ।
सिद्धार्थकं वचा ब्राह्मी शङ्खपुष्पा पुनर्नवा ।
पयस्यामययष्ट्याह्वं कटुका च फलत्रयम् ॥ ५१ ॥
शारिवे रजनी पाठा भृङ्गदारुसुवर्चलाः ।
मञ्जिष्ठा त्रिफला श्यामा वृषपुष्पं सगैरिकम् ॥
धीमान् पक्त्वा घृतप्रस्थं सम्यङ्मन्त्राभिमन्त्रितम् ॥ ५२॥
मन्त्रश्चायं यदाह सुश्रुतः—
“ॐ नमो महाविनायकाय अमृतं रक्ष रक्ष मम फलसिद्धिं देहि देहि रुद्रवचनेन स्वाहा ॥” इति सप्तधाऽभिमंत्रयेत् ।
यत्र नोदीरितो मन्त्रो येषु योगेषु सारणैः ।
सर्वत्र गदिता तत्र गायत्री फलसिद्धिदा ॥ ५३ ॥
सफेद सरसों, वच, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, लाल पुनर्नवा, क्षीरकाकोली, कूठ, मुलहठी, कुटकी, दाख, कुम्मेर, फालसे, उसवा, अनंतमुल, हल्दी, पाठ, भाँगरा, देवदारु, कालानमक, मंजीठ, त्रिफला, फूलप्रियंगु, अडूसेके फूल और गेरू इन सब औषधियोंका कल्क समान भाग मिश्रित १ सेर लेवे । इस कल्कके साथ एक प्रस्थ घृतको विधिपूर्वक पकाकर उपर्युक्त “ ओं नमो महाविनायकायेति ” मन्त्रसे ७ बार अभिमन्त्रित करलेवे । यह सुश्रुतका मन्त्र है और जहाँपर केवल मंत्रही कहा है वहाँ गायत्रीमंत्रसे ७ बार अभिमंत्रण करे ५१-५३
द्विमासगर्भिणी नारी षण्मासानुपयोजयेत् ।
सर्वज्ञं जनयेत्पुत्रं सर्वामयविवर्जितम् ॥ ५४ ॥
^१ फलत्रयम्-द्राक्षाकाश्मरीपरूषकाणि । ^२ श्यामा-प्रियंगुः ।
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