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भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

Bhaishajya Ratnavali Hindi

by कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल)

Source: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (origin)

Public domain in India · Report a copyright issue

DevanagariHindipublished1,416 pages

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Page 1263

चिकित्सा ] भाषाटीकासहिता १२३१


लालचंदन, जटामांसी, लोध, खस, कमलकी केशर, नागकेशर, बेलगिरी, नागरमोथा, खाँड, सुगंधवाला, पाठ, इन्द्रजौ, कुडेकी छाल, सोंठ, अतीस, धायके फूल, रसौत, आमकी गुठलीकी मींग, जामुनकी गुठलीकी मींग, मोचरस, नीले कमलका फूल, वराहक्रान्ता, छोटी इलायची और अनारकी छाल इन चौबीसों औषधियोंको समान भाग लेकर एकत्र कूट पीसकर कपड छान करके चूर्ण बना- लेवे। इस चूर्णको प्रतिदिन तीन तीन मासे परिमाण लेकर चावलोंके जल और मधुमें मिश्रित करके सेवन करे ॥ १८-२१ ॥

चतुःप्रकारं प्रदरं रक्तातीसारमुल्बणम् ।
रक्तार्शांसि निहन्त्याशु भास्करस्तिमिरं यथा ॥
अश्विन्योः सम्मतो योगो रक्तपित्तनिबर्हणः ॥ २२ ॥

यह चूर्ण चार प्रकारके प्रदररोगको तथा दारुण रक्तातिसार और रक्तार्शको तत्काल नष्ट करता है जिस प्रकार सूर्य अंधकारराशिको शीघ्र नष्ट कर देता है । इसको अश्विनीकुमारोंने रचा है। यह योग रक्तपित्तनाशक है ॥ २२ ॥

पुष्यानुगचूर्ण ।

पाठा जम्ब्वाम्रयोर्मध्यं शिलाभेदं रसाञ्जनम् ।
अम्बष्ठकी मोचरसः समङ्गा पद्मकेशरम् ॥ २३ ॥
बाह्लिकातिविपामुस्तं बिल्वं लोध्रं सगैरिकम् ।
कट्फलं मरिचं शुण्ठी मृद्वीका रक्तचन्दनम् ॥ २४ ॥
कट्वङ्गवत्सकानन्ता धातकी मधुकार्जुनम् ।
पुष्येणोद्धृत्य तुल्यानि श्लक्ष्णचूर्णानि कारयेत् ॥
तानि क्षौद्रेण संयोज्य पाययेत्तण्डुलाम्बुना ॥ २५ ॥

पाठ, जामुन और आमकी गुठलियोंकी मींग, पाषाणभेद, रसौत, अम्बष्ठकी (मोईयावृक्ष), मोचरस, वराहक्रान्ता, कमलकेशर, अतीस, नागरमोथा, बेल- गिरी, लोध, गेरू, कायफल, मिरच, सोंठ, दाख, लालचंदन, सोनापाठेकी छाल, इन्द्रजौ, अनंतमूल, धायके फूल, मुलहठी और अर्जुनकी छाल इन सब औष- धियोंको पुष्यनक्षत्रमें उद्धृत करके समान भाग लेकर बारीक कूट पीसकर चूर्ण बनालेवे । फिर उस चूर्णको शहद और चावलोंके जलके साथ मिलाकर सेवन करे ॥ २३-२५ ॥

अर्शःसु चातिसारेषु रक्तं यच्चोपवेश्यते ।
दोषागन्तुकता ये च बालानां तांश्च नाशयेत् ॥ २६ ॥