बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)
Baudhayana Dharmasutra Hindi
by महर्षि बौधायन
Source: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (origin)
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अधिक तिरस्कार झलकता है। कलिङ्ग की यात्रा का पाप वैश्वानरी इष्टि करने पर ही दूर होता है—
पद्भ्यां स कुरुते पापं यः कलिङ्गान् प्रपद्यते ।
ऋषयो निष्कृतिं तस्य प्राहुर्वैश्वानरं हविः ॥ बौ० १. २. १६
प्रस्तुत संस्करण
यह संस्करण पहली बार हिन्दी अनुवाद के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है। चौखम्बा संस्कृत सीरीज ऑफिस ने बौधायनधर्मसूत्र का प्रथम संस्करण १९३४ ई० में प्रकाशित किया था। प्रथम संस्करण का सम्पादन काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के तत्कालीन प्रधान मीमांसाध्यापक पंडितप्रवर श्रीचिन्नस्वामी शास्त्री ने किया था। उन्होंने चार मूल पुस्तकों के संस्करण के आधार पर अत्यन्त श्रमपूर्वक चौखम्बा संस्करण सम्पादित किया। इस ग्रन्थ को उन्होंने मैसूर संस्करण को संशोधित कर अधिक प्रामाणिक रूप प्रदान किया। अपने "किञ्चित् प्रास्ताविकम्" शीर्षक प्रथम संस्करण के प्राक्कथन में उन्होंने उन स्थलों का निर्देश किया है, जहाँ, मैसूर संस्करण में संशोधन किया गया है। श्रीचिन्नस्वामी शास्त्री द्वारा सम्पादित प्रथम संस्करण के अन्त में गोविन्दस्वामी की व्याख्या विवरण में उद्धृत दूसरे ग्रन्थों के वाक्यों का निर्देश 'स्वस्थाननिर्देशिनी सूची' के अन्तर्गत किया गया था। उस सूची को प्रस्तुत संस्करण में भी स्थान दिया गया है। गोविन्दस्वामी के विषय में अध्ययन करने के लिए यह सूची उपयोगी सिद्ध हो सकती है। प्रथम संस्करण के अन्त में बौधायन-धर्मसूत्र के सूत्रों में आये हुए प्रत्येक पद की सूची प्रकाशित थी। उसके स्थान पर प्रस्तुत द्वितीय संस्करण में सूत्रों में आये हुए नामों और विषयों की अनुक्रमणिका दी गयी है जो अनुसन्धाताओं के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।
इस संस्करण में सूत्रों का सरल और स्पष्ट हिन्दी अनुवाद देने के साथ-साथ प्रायः टिप्पणियों द्वारा सूत्रार्थ को पूर्णतः स्पष्ट कर दिया गया है। प्रस्तावना में बौधायन-धर्मसूत्र की रचना तथा प्रत्येक पक्ष पर विचार किया गया है। धर्मसूत्र साहित्य तथा भारतीय धर्म की विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला गया है।
धर्मसूत्रों का यह संस्करण प्रस्तुत करते हुए मैं इसी आशा से प्रेरित हूँ कि भारतीय धर्म का नये सन्दर्भों में मूल्याङ्कन और व्यावहारिक जीवन में विनियोग आधुनिक मानव जीवन को सन्त्रास से उबार कर व्यवस्था और शान्ति के पथ पर पहुँचा सकता है।
$$\text{—}\textbf{उमेशचन्द्र पाण्डेय}$$