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बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

Baudhayana Dharmasutra Hindi

by महर्षि बौधायन

Source: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (origin)

DevanagariHindipublished486 pages

Page 175 of 486

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Page 175

षोडशः खण्डः ] प्रथमप्रश्ने अष्टमोऽध्यायः १२३

अनु०—एक वर्ण के अन्तर से अपने से तीसरे वर्ण की पत्नी से (ब्राह्मण की वैश्यवर्ण की पत्नी से, क्षत्रिय की शूद्रा से) क्रमशः अम्बष्ठ और उग्र नाम के तथा अपने वर्ण से दो वर्ण के अन्तर वाले वर्ण की पत्नी से (ब्राह्मण की शूद्रा स्त्री से) निषाद नाम का पुत्र उत्पन्न होता है ॥ ७ ॥

टि०—ये सभी पुत्र अनुलोम पुत्र कहे जाते हैं, क्योंकि पिता उच्च वर्ण का होता है और माता पिता से निम्न वर्ण की। प्रतिलोम इसके विपरीत सम्बन्ध से उत्पन्न होते हैं।

ब्राह्मणस्य वैश्या एकान्तरा । स तस्यामम्बष्ठं जनयति । तस्यैव शूद्रा द्वयन्तरा । तस्यां निषादम् । क्षत्रियस्य पुनस्सैवैकान्तरा । सोऽपि तस्यामेवोग्रं नाम पुत्रं जनयति । एते त्रयः पूर्वेरनुलोमैस्सह षडनुलोमा अनुक्रान्ताः । तत्र बीजोत्कर्षे क्षेत्रापकर्षे च सत्यानुलोम्यं भवति । विपर्यये तु प्रातिलोम्यं भवति ॥ ७ ॥

के पुनः प्रतिलोमाः ? तानाह—

प्रतिलोमास्त्वायोगवमागधवैणक्षत्तृपुल्कसकुक्कुटवैदेहकचण्डालाः ॥८॥
'अम्बष्ठात् प्रथमायां श्वपाकः ॥ ९ ॥
उग्रात् द्वितीयायां वैणः ॥ १० ॥
निषादात् तृतीयायां पुल्कसः ॥ ११ ॥
विपर्यये कुक्कुटः ॥ १२ ॥

अनु०—प्रतिलोम विवाह वाली (अपने से निम्न वर्ण के पुरुष के साथ विवाहिता) स्त्रियों से आयोगव, मागध, वैण, क्षत्तृ, पुल्कस, कुक्कुट, वैदेहक और चण्डाल नाम के पुत्र उत्पन्न होते हैं ॥ ८ ॥

टि०—क्षत्रिय और ब्राह्मणी से सूत, वैश्य और ब्राह्मणी से क्षत्त, वैश्य और क्षत्रिया से मागध, शूद्र और वैश्या से आयोगव, शूद्र और क्षत्रिया से वैदेहक, शूद्र और ब्राह्मणी से चण्डाल नाम के पुत्र उत्पन्न होते हैं। द्रष्टव्य-गौतम ध०सू० १.४. १५ पृ० ४२: 'प्रतिलोमास्तु सूतमागधायोगवक्षत्तृवैदेहकचण्डालाः'।

अनु०—अम्बष्ठ प्रथम वर्ण की स्त्री से श्वपाक पुत्र उत्पन्न करता है। उग्र द्वितीय वर्ण की स्त्री से वैण पुत्र उत्पन्न करता है। निषाद तृतीय वर्ण की पत्नी से पुल्कस पुत्र उत्पन्न करता है। इसके विपरीत पुल्कस पुरुष निषाद वर्ण की स्त्री से कुक्कुट पुत्र उत्पन्न करता है ॥ ९-१२ ॥


१. अन्येपि श्वपाकादयः ११ सूत्रादावुच्यन्ते ।