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बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

Baudhayana Dharmasutra Hindi

by महर्षि बौधायन

Source: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (origin)

DevanagariHindipublished486 pages

Page 174 of 486

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Page 174

१२२ बौधायन-धर्मसूत्रम् [ वर्णधर्मविचारः

**अनु०—**इन वर्णों में वर्णों के क्रमानुसार ( अर्थात् चार वर्णों की ) ब्राह्मण की चार पत्नियां हो सकती हैं ॥ २ ॥

तेषां मध्ये ब्राह्मणस्येति सम्बन्धः। आनुपूर्व्यग्रहणात् प्रथमं ब्राह्मणी, ततः क्षत्रिया इत्येवं द्रष्टव्यम्। अस्वजातीयापरिणयनम् (?) 'इतरथाऽसदृशीम्' इत्यविशेषकं स्यात्। आह च मनुः—

सवर्णाऽग्रे द्विजातीनां प्रशस्ता दारकर्मणि।
कामतस्तु प्रवृत्तानामिमाः स्युः क्रमशोवराः ॥ इति ॥ २ ॥

तिस्रो राजन्यस्य ॥३॥ द्वे वैश्यस्य ॥ ४ ॥

**अनु०—**क्षत्रिय की वर्णों के क्रम से तीन ( क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र वर्ण की ) पत्नियां हो सकती हैं। वैश्य की दो पत्नियां ( वैश्य तथा शूद्र वर्ण की ) होती हैं ॥ ३-४ ॥

आनुपूर्व्येण कामत इति चाऽनुसन्धेयम् ॥ ३-४ ॥

एका शूद्रस्य ॥ ५ ॥

**अनु०—**शूद्र की केवल एक ( शूद्र वर्ण की ) पत्नी होती है ॥ ५ ॥

कामप्रवृत्तस्याऽपि शूद्रस्य शूद्रैव भार्या ॥ ५ ॥

तासु पुत्रास्सवर्णानानन्तरासु सवर्णाः ॥ ६ ॥

**अनु०—**इन पत्नियों में अपने वर्ण की या अपने वर्ण के ठीक नीचे वाले वर्ण की पत्नियों से उत्पन्न पुत्र सवर्ण कहलाते हैं ॥ ६ ॥

**टि०—**वस्तुतः सवर्ण पुत्र समान वर्ण की पत्नी से उत्पन्न पुत्र होते हैं किन्तु ठीक नीचे वाले वर्ण की पत्नी के पुत्र भी सवर्ण के समान ही समझे जाते हैं। गौतम० १.४.१४ 'अनुलोमा अनन्तरैकान्तरद्व्यन्तरासु जाताः सवर्णाम्बष्ठोग्रनिषाददौष्म-न्तपारशवाः'।

संव्यवहारार्थं संज्ञाकरणम्। सवर्णास्वनन्तरासु चेति विग्रहः। संवर्णास्स-मानजातीयाः। अनन्तरा इतराः। ब्राह्मणस्य क्षत्रिया वाऽनन्तरेत्यादि योज्यम्। तत्र सवर्णायां जातः पुत्रस्स एव वर्ण इति व्युत्पत्त्या सवर्णः। अनन्तरायां तु सवर्णसदृश इति। आह च मनुः—

स्त्रीष्वनन्तरजातासु द्विजैरुत्पादितान् सुतान् ।
सदृशानेव तानाहुर्मातृदोषविगर्हितान् ॥ इति ॥ ६ ॥

एकान्तरद्व्यन्तरास्वम्बष्ठोग्रनिषादाः ॥ ७ ॥