बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)
Baudhayana Dharmasutra Hindi
by महर्षि बौधायन
Source: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (origin)
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सूत्र साहित्य एवं कल्प
वैदिक साहित्य के अन्तिम युग का प्रतिनिधित्व करनेवाले ग्रन्थों की शैली मुख्यतः सूत्रात्मक है। ये सूत्र रचनाएँ अनेक शताब्दियों के ज्ञान को नियमों के रूप में छोटे-छोटे वाक्यों में अभिव्यक्त करती हैं। सूत्रों की विशेषता है उनकी संक्षिप्तता।
सूत्रों का शाब्दिक अनुवाद असम्भव होता है और अनेक सूत्ररचनाओं में एक प्रकार की विशिष्ट एवं तकनीकी पारिभाषिक शब्दावली का भी व्यवहार हुआ है, जिससे उनमें स्वभावतः दुरूहता आ गयी है। सूत्र-शैली की रचनाओं में सबसे सरल धर्मसूत्र ही हैं। सूत्रों की इसी दुरूहता का प्रो० मैक्स म्यूलेर ने अपने प्राचीन संस्कृत साहित्य के इतिहास में इन शब्दों में निर्देश किया है—
"Every doctrine thus propounded, whether Grammar, metre, law or philosophy, is reduced to a mere skelton. All the important points and joints of a system are laid open with greatest precision and clearness, but there is nothing in these works like connection or development of ideas."
सूत्र-शैली की जटिलता की आलोचना अनेक पश्चिमी विद्वानों ने की है। कोलब्रुक ने भी सूत्रों में अभिप्रेत अन्विति एवं पारस्परिक सम्बन्ध के अभाव का दोष देखा है और इसका कारण निरन्तर आने वाले अपवाद नियमों को बताया है—
"The endless persuit of exceptions and limitations so disjoins the general precepts that the reader cannot keep in view their intended connection and mutual relation."
किन्तु धर्मसूत्रों की सूत्र-शैली इन जटिलताओं से मुक्त है। उनमें पारिभाषिक शब्दावली का अभाव है और वे सीधे-सादे स्वतन्त्र वाक्यों के समान हैं। इनमें विषय का विस्तार भी सम्बद्ध एवं व्यवस्थित रूप में हुआ है। प्रसंगवश दूसरे विषय भी अवश्य आ गये हैं।
वेद को समझने के लिए जिस साहित्य का उद्भव हुआ उसे वेदाङ्ग कहते हैं। "अङ्ग्यन्ते ज्ञायन्ते अमीभिरिति अङ्गानि" जिसके द्वारा किसी वस्तु के स्वरूप को जानने में सहायता मिलती है उसे अङ्ग कहते हैं।
छः वेदाङ्गों शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द और ज्योतिष के अन्तर्गत यज्ञ-क्रिया की दृष्टि से कल्प का सर्वाधिक महत्त्व है। कल्प का अर्थ है—यज्ञ के प्रयोगों का
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