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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 918 of 1063

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Page 918

किए गए अर्थात् निचोड़े गए सोम का पान करो. (३)
देवो द्रविणोदाः पोत्रात् सुष्टुभः स्वर्कदृतुना सोमं पिबतु.. (४)
द्रविणोदा अर्थात् धन देने वाले देव होता के सुंदर स्तोत्रों तथा सुंदर मंत्रों वाले यज्ञ कर्म
में संस्कार किए गए अर्थात् निचोड़े गए सोम का पान करें. (४)
सूक्त—३ देवता—इंद्र
आ याहि सुषुमा हि त इन्द्र सोमं पिबा इमम्. एदं बर्हिः सदो मम.. (१)
हे इंद्र! आओ. तुम्हारे निमित्त सोम निचोड़ा गया है, इस का पान करो तथा मेरे द्वारा
बिछाए गए कुशों पर बैठो. (१)
आ त्वा ब्रह्मयुजा हरी वहतामिन्द्र केशिना. उप ब्रह्माणि नः शृणु.. (२)
हे इंद्र! मंत्रों के द्वारा रथ में जुड़ने वाले तथा अभीष्ट स्थान पर पहुंचने वाले हरि नाम के
घोड़े तुम्हें हमारे समीप लाएं. तुम्हारे घोड़े लंबे बालों वाले हैं. तुम हमारे यज्ञ में आ कर हमारी
स्तुतियों को सुनो. (२)
ब्रह्माणस्त्वा वयं युजा सोमपामिन्द्र सोमिनः. सुतावन्तो हवामहे.. (३)
हे इंद्र! हम यजमान तुम को तुम्हारे योग्य स्तोत्रों के द्वारा बुलाते हैं. हे इंद्र! तुम सोम को
पीने वाले हो. हम सोमरस तैयार करने वाले हैं तथा हम ने सोम रस को निचोड़ा है. (३)
सूक्त—४ देवता—इंद्र
आ नो याहि सुतावतो ऽ स्माकं सुष्टुतीरुप. पिबा सु शिप्रिन्नन्धसः.. (१)
हे इंद्र! सोम को निचोड़ने वाले हम यजमानों के समीप आओ. हम शोभन स्तुतियों वाले
हैं. हे सुंदर ठोड़ी वाले इंद्र! सोमरस का पान करो. (१)
आ ते सिञ्चामि कुक्ष्योरनु गात्रा वि धावतु. गृभाय जिह्वया मधु.. (२)
हे इंद्र! मैं तुम्हारी दोनों कोखों को सोमरस से भरता हूं. यह सोमरस तुम्हारी नाड़ियों में
बहे. तुम मधु वाले सोमरस को अपनी जीभ से ग्रहण करो. (२)
स्वादुष्टे अस्तु संसुदे मधुमान् तन्वे ३ तव. सोमः शमस्तु ते हृदे.. (३)
हे उत्तम दान करने वाले इंद्र! मेरे द्वारा दिया हुआ सोम तुम्हारे लिए स्वादिष्ट हो. इस के
बाद यह सोम तुम्हारे शरीर के लिए सुख देने वाला हो. (३)
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