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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 91 of 1063

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Page 91

अग्ने यत् ते तपस्तेन तं प्रति तप यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः.. (१)
हे अग्नि देव! तुम्हारी जो तपाने की शक्ति है, उस से उस को संतप्त करो जो हम से द्वेष
करता है अथवा हम जिस से द्वेष करते हैं. (१)
अग्ने यत् ते हरस्तेन तं प्रति हर यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः.. (२)
हे अग्नि देव! तुम्हारी जो संहार की शक्ति है, उस के द्वारा उस का संहार करो जो हम से
द्वेष करता है अथवा हम जिस से द्वेष करते हैं. (२)
अग्ने यत् ते ते ऽर्चिस्तेन तं प्रत्यर्च यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः.. (३)
हे अग्नि देव! तुम्हारी जो दीप्ति है, उस के द्वारा उन्हें जलाने के लिए दीप्त बनो जो हम
से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (३)
अग्ने यत् ते शोचिस्तेन तं प्रति शोच यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः.. (४)
हे अग्नि देव! तुम्हारी जो दूसरों को शोकमग्न करने की शक्ति है, उस के द्वारा तुम उन्हें
शोक मग्न करो जो हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (४)
अग्ने यत् ते तेजस्तेन तमतेजसं कृणु यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः..
(५)
हे अग्नि देव! तुम्हारा जो तेज है, उस से उन लोगों को तेजहीन बनाओ जो हम से द्वेष
करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं (५)
सूक्त-२० देवता—वायु
वायो यत् ते तपस्तेन तं प्रति तप यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः.. (१)
हे वायु देव! तुम्हारी जो संताप पहुंचाने की शक्ति है, उस से उन्हें संताप पहुंचाओ जो
हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (१)
वायो यत् ते हरस्तेन तं प्रति हर यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः.. (२)
हे वायु देव! तुम्हारी जो छीनने की शक्ति है, उस का प्रयोग उन लोगों के प्रति करो जो
हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (२)
वायो यत् ते ऽर्चिस्तेन तं प्रत्यर्च यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः.. (३)
हे वायु देव! तुम्हारा जो वेग है, उस का प्रयोग उन के प्रति करो जो हम से द्वेष रखते हैं