Skip to content
SarvaKosh
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 90 of 1063

Read in context
Page 90

हे अग्नि देव! तुम चक्षु हो, इसीलिए मुझे चक्षु अर्थात् देखने की शक्ति प्रदान करो. यह
हवि भलीभांति हवन किया हुआ हो. (६)
परिपाणमसि परिपाणं मे दाः स्वाहा.. (७)
हे अग्नि देव! तुम सभी प्रकार से पालन करने वाले हो, इसीलिए मेरा पालन करो. यह
हवि भलीभांति हवन किया हुआ हो. (७)
सूक्त-१८ देवता—अग्नि
भ्रातृव्यक्षयणमसि भ्रातृव्यचातनं मे दाः स्वाहा.. (१)
हे अग्नि देव! तुम शत्रु का विनाश करने वाले हो, इसीलिए मुझे शत्रु नाश की शक्ति
प्रदान करो. यह हवि भलीभांति हवन किया हुआ हो. (१)
सपत्नक्षयणमसि सपत्नचातनं मे दाः स्वाहा.. (२)
हे अग्नि देव! तुम विरोधियों का नाश करने वाले हो, इसीलिए तुम मुझे विरोधियों का
विनाश करने की शक्ति प्रदान करो. यह हवि भलीभांति हवन किया हुआ हो. (२)
अरायक्षयणमस्यरायचातनं मे दाः स्वाहा.. (३)
हे अग्नि देव! तुम दान न करने वालों का विनाश करने वाले हो, इसीलिए मुझे भी दान
न करने वालों का विनाश करने की शक्ति प्रदान करो. यह हवि भलीभांति हवन किया हुआ
हो. (३)
पिशाचक्षयणमसि पिशाचचातनं मे दाः स्वाहा.. (४)
हे अग्नि देव! तुम मांस भक्षण करने वाले पिशाचों का नाश करने वाले हो, इसीलिए
मुझे भी पिशाचों का विनाश करने की शक्ति प्रदान करो. यह हवि भलीभांति हवन किया
हुआ हो. (४)
सदान्वाक्षयणमसि सदान्वाचातनं मे दाः स्वाहा.. (५)
हे अग्नि देव! तुम आक्रोश करने वाली पिशाचियों का विनाश करने वाले हो, इसीलिए
मुझे भी पिशाचियों के विनाश की शक्ति प्रदान करो. यह हवि भलीभांति हवन किया हुआ हो.
(५)
सूक्त-१९ देवता—अग्नि
ebook converter DEMO Watermarks*