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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

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हे स्वर्ण को धारण करने वाले पुरुष! चंद्रमा उस स्वर्ण को तुम्हारे बल, लाभ एवं तेज
प्राप्त करने के लिए निर्माण करे. जिस प्रकार स्वर्ण तेज से भास्वर होता है, उसी प्रकार तुम
भी मनुष्यों को लक्ष्य कर के सुशोभित बनो. (३)
यद् वेद राजा वरुणो वेद देवो बृहस्पतिः.
इन्द्रो यद् वृत्रहा वेद तत् त आयुष्यं भुवत् तत् ते वर्चस्यं भुवत्.. (४)
जिस स्वर्ण को तेजस्वी वरुण देव जानते हैं तथा बृहस्पति देव जानते हैं, वह स्वर्ण
तुम्हारी आयु बढ़ाने वाला हो तथा तेज प्रदान करने वाला हो. (४)
सूक्त-२७ देवता—विवृत
गोभिष्ट्वा पात्वृषभो वृषा त्वा पातु वाजिभिः.
वायुष्ट्वा ब्रह्मणा पात्विन्द्रस्त्वा पात्विन्द्रियैः.. (१)
हे विवृत नाम की मणि धारण करने वाले पुरुष! सांड गायों के साथ तुम्हारी रक्षा करे
तथा प्रजनन करने में समर्थ अश्व घोड़ों के साथ तुम्हारी रक्षा करे. अंतरिक्ष में विचरण करने
वाले वायु देवता यज्ञलक्षण वाले कर्म के द्वारा तुम्हारी रक्षा करें. इंद्र देवता इंद्रियों के साथ
तुम्हारी रक्षा करें. (१)
सोमस्त्वा पात्वोषधीभिर्नक्षत्रैः पातु सूर्यः.
माद्भ्यस्त्वा चन्द्रो वृत्रहा वातः प्राणेन रक्षतु.. (२)
ओषधियों अर्थात् जड़ीबूटियों के राजा सोम ओषधियों की सहायता से तुम्हारी रक्षा
करें. सूर्य देव नक्षत्रों की सहायता से तुम्हारी रक्षा करें. महीनों की सहायता से चंद्रमा, वृत्र
अर्थात् आवरण करने वाले अंधकार का नाश करने वाले इंद्र एवं प्राण वायु की सहायता से
वायु देव तुम्हारी रक्षा करें. (२)
तिस्रो दिवस्तिस्रः पृथिवीस्त्रीण्यन्तरिक्षाणि चतुरः समुद्रान्.
त्रिवृतं स्तोमं त्रिवृत आप आहुस्तास्त्वा रक्षन्तु त्रिवृता त्रिवृद्भिः.. (३)
तीन द्युलोक, तीन पृथ्वियां, तीन अंतरिक्ष अर्थात् मध्यम लोक, चार सागर, त्रिवृत नाम
के तीन प्रकार के स्तोत्र तथा तीन प्रकार के जल ये—सभी त्रिवृत नाम की मणि के साथ
तुम्हारी रक्षा करें. (३)
त्रीन्नाकांस्त्रीन् समुद्रांस्त्रीन् ब्रध्नांस्त्रीन् वैष्टपान्.
त्रीन् मातरिश्वनस्त्रीन्सूर्यान् गोप्तॄन् कल्पयामि ते.. (४)
हे हिरण्य! रजत और लोहे की तीन प्रकार की मणि धारण करने वाले पुरुष! मैं तीन
आकाशों, तीन समुद्रों, तीन आदित्यों, तीन भुवनों, तीन वायुओं तथा तीन स्वर्गों को तेरा
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