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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 866 of 1063

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Page 866

(२३)
सूर्याभ्यां स्वाहा.. (२४)
सूर्या नाम की दो ऋषि पत्नियों को यह आहुति भलीभांति प्राप्त हो. (२४)
व्रात्याभ्यां स्वाहा.. (२५)
व्रात्य नाम के दोनों ऋषियों को यह आहुति भलीभांति प्राप्त हो. (२५)
प्राजापत्याभ्यां स्वाहा.. (२६)
प्रजापति के पुत्र दो ऋषियों को यह आहुति भलीभांति प्राप्त हो. (२६)
विषासह्यै स्वाहा.. (२७)
सत्रह कांडों की रचना करने वाले ऋषियों को यह आहुति भलीभांति प्राप्त हो. (२७)
मङ्गलिकेभ्यः स्वाहा.. (२८)
मांगलिक नाम के ऋषियों को यह आहुति भलीभांति प्राप्त हो. (२८)
ब्रह्मणे स्वाहा.. (२९)
ब्रह्मा को यह आहुति भलीभांति प्राप्त हो. (२९)
ब्रह्मज्येष्ठा संभृता वीर्याणि ब्रह्माग्ने ज्येष्ठं दिवमा ततान.
भूतानां ब्रह्मा प्रथमोत जज्ञे तेनार्हति ब्रह्मणा स्पर्धितुं कः.. (३०)
ब्रह्मा जिन ऋषियों में ज्येष्ठ अर्थात् बड़े हैं. उन ऋषियों ने जो वीर कर्म किए. सब में
यही श्रेष्ठ है, इस दृष्टि से सृष्टि के आदि में ब्रह्मा ने द्युलोक अर्थात स्वर्ग का विस्तार किया.
ब्रह्मा सभी प्राणियों से पहले उत्पन्न हुए. उन ब्रह्मा से कौन देव तथा मनुष्य स्पर्धा कर सकता
है. (३०)
सूक्त-२४ देवता—मंत्र में कहे गए
येन देवं सवितारं परि देवा अधारयन्.
तेनेमं ब्रह्मणस्पते परि राष्ट्राय धत्तन.. (१)
इंद्र आदि देवों ने सब के प्रेरक आदि देव को जिस कारण चारों ओर से घेर लिया था.
उस कारण से हे शत्रु विनाशकर्ता ब्रह्मणस्पति! महा शांति का प्रयोग करने वाले इस यजमान
को राजा बनाओ. (१)
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