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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 865 of 1063

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Page 865

सप्तदशर्चेभ्यः स्वाहा.. (१४)
सत्रह ऋचाओं की रचना करने वाले ऋषियों को यह आहुति भलीभांति प्राप्त हो. (१४)
अष्टादशर्चेभ्यः स्वाहा.. (१५)
अठारह ऋचाओं की रचना करने वाले ऋषियों को यह आहुति भलीभांति प्राप्त हो.
(१५)
एकोनविंशतिः स्वाहा.. (१६)
उन्नीस ऋचाओं की रचना करने वाले ऋषियों को यह आहुति भलीभांति प्राप्त हो.
(१६)
विंशतिः स्वाहा.. (१७)
बीस ऋचाओं की रचना करने वाले ऋषियों को यह आहुति भलीभांति प्राप्त हो. (१७)
महत्काण्डाय स्वाहा.. (१८)
बीस कांड वाले अर्थात् बीस कांडों की रचना करने वाले ऋषियों को यह आहुति
भलीभांति प्राप्त हो. (१८)
तृचेभ्यः स्वाहा.. (१९)
तीन ऋचाओं की रचना करने वाले ऋषियों को यह आहुति भलीभांति प्राप्त हो. (१९)
एकर्चेभ्यः स्वाहा.. (२०)
एक ऋचा की रचना करने वाले ऋषियों की यह आहुति भलीभांति प्राप्त हो. (२०)
क्षुद्रेभ्यः स्वाहा.. (२१)
यजुर्वेद के मंत्रों की रचना करने वाले ऋषियों को यह आहुति भलीभांति प्राप्त हो.
(२१)
एकानृचेभ्यः स्वाहा.. (२२)
आधी ऋचाओं की रचना करने वाले ऋषियों को यह आहुति भलीभांति प्राप्त हो. (२२)
रोहितेभ्यः स्वाहा.. (२३)
रोहित आदि कांडों की रचना करने वाले ऋषियों को यह आहुति भलीभांति प्राप्त हो.
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