अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextशिखि नाम के ऋषियों के लिए यह आहुति भलीभांति प्राप्त हो. (१५)
गणेभ्यः स्वाहा.. (१६)
गणों के लिए यह आहुति भलीभांति प्राप्त हो. (१६)
महागणेभ्यः स्वाहा.. (१७)
महागणों के लिए यह आहुति भलीभांति प्राप्त हो. (१७)
सर्वेभ्योऽङ्गिरोभ्यो विदगणेभ्यः स्वाहा.. (१८)
सभी विद्वान् अंगिरा गणों के लिए यह आहुति भलीभांति प्राप्त हो. (१८)
पृथक्सहस्राभ्यां स्वाहा.. (१९)
पृथक् और सहस्र ऋषियों के लिए यह आहुति भलीभांति प्राप्त हो. (१९)
ब्रह्मणे स्वाहा.. (२०)
ब्रह्मा के लिए यह आहुति भलीभांति प्राप्त हो. (२०)
ब्रह्मज्येष्ठा संभृता वीर्याणि ब्रह्माग्रे ज्येष्ठं दिवमा ततान.
भूतानां ब्रह्मा प्रथमोत जज्ञे तेनार्हति ब्रह्मणा स्पर्धितुं कः.. (२१)
ब्रह्मा जिन ऋषियों में ज्येष्ठ अर्थात् बड़े हैं, उन ऋषियों ने जो वीर कर्म किए, वे ही सब
से श्रेष्ठ हैं, इस दृष्टि से सृष्टि के आदि में ज्येष्ठ ब्रह्म ने द्युलोक का विस्तार किया. ब्रह्मा सभी
प्राणियों से पहले उत्पन्न हुए. उन ब्रह्मा से स्पर्धा करने के लिए कौन देव अथवा मनुष्य समर्थ
है. (२१)
सूक्त-२३ देवता—मंत्र में कहे गए
आथर्वणानां चतुर्ऋचेभ्यः स्वाहा.. (१)
आथर्वणों की पांच ऋचाओं को अर्थात् इन ऋचाओं की रचना करने वाले ऋषियों को
यह आहुति भलीभांति प्राप्त हो. (१)
पञ्चर्चेभ्यः स्वाहा.. (२)
पांच ऋचाओं की रचना करने वाले ऋषियों को यह आहुति भलीभांति प्राप्त हो. (२)
षडृचेभ्यः स्वाहा.. (३)
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