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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 860 of 1063

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Page 860

वे ब्रह्म अर्थात् वेद ब्रह्मचारियों सहित जिस पुर की रक्षा के लिए प्रकट हुए हैं, उस शय्या
युक्त पुर में मैं तुझ राजा को पत्नी और प्रजा के साथ प्रवेश कराता हूं, वह पुर तुम को सुख
और कवच अर्थात् रक्षा प्रदान करे. (८)
इन्द्रो वीर्ये ३ णोदक्रामत् तां पुरं प्र णयामि वः.
तामा विशत तां प्र विशत सा वः शर्म च वर्म च यच्छतु.. (९)
इंद्र अपने शक्तिशाली बाहुओं के द्वारा जिस पुर की रक्षा को उद्यत होते हैं, उस शैया
युक्त पुर में मैं तुझ राजा को पत्नी और प्रजा के साथ प्रवेश कराता हूं, वह पुर तुम को सुख
और कवच अर्थात् रक्षा प्रदान करे. (९)
देवा अमृतेनोदक्रास्तां पुरं प्र णयामि वः.
तामा विशत तां प्र विशत सा वः शर्म च वर्म च यच्छतु.. (१०)
सभी देव अमृत के साथ जिस पुर की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं, उस शय्या युक्त पुर में
मैं तुझ राजा को पत्नी और प्रजा के साथ प्रवेश कराता हूं, वह पुर तुम को सुख और कवच
अर्थात् रक्षा प्रदान करे. (१०)
प्रजापतिः प्रजाभिरुदक्रामत् तां पुरं प्र णयामि वः.
तामा विशत तं प्र विशत सा वः शर्म च वर्म च यच्छतु.. (११)
प्रजापति ने मनुष्य आदि के साथ जिस पुर की रक्षा की है, उस शय्या युक्त पुर में मैं
तुझ राजा को पत्नी और प्रजा सहित प्रवेश कराता हूं, वह पुर तुझ को सुख और कवच
अर्थात् रक्षा प्रदान करे. (११)
सूक्त-२० देवता—मंत्र में कहे गए
अप न्यधुः पौरुषेयं वधं यमिन्द्राग्नी धाता सविता बृहस्पतिः.
सोमो राजा वरुणो अश्विना यमः पूषा ऽ स्मान् परि पातु मृत्योः.. (१)
शत्रु पुरुषों द्वारा गुप्त रूप से हमारे विरुद्ध जो मृत्यु साधन किया गया है, उस में इंद्र,
अग्नि, धाता, सविता, बृहस्पति, सोम, वरुण, अश्विनीकुमार, यम और पूषा हमारे कवचधारी
राजा की रक्षा करें. (१)
यानि चकार भुवनस्य यस्पतिः प्रजापतिर्मातरिश्वा प्रजाभ्यः.
प्रदिशो यानि वसते दिशश्च तानि मे वर्माण बहुलानि सन्तु.. (२)
सभी प्राणियों के पालनकर्ता प्रजापति ने मनुष्य, पशु आदि प्रजाओं की रक्षा के लिए
जो कवच बनाए हैं तथा सभी दिशाएं, प्रदिशाएं तथा अवांतर दिशाएं जिन कवचों को रक्षा के
लिए धारण करती हैं, वे कवच मुझ युद्ध करने के इच्छुक के लिए अधिक संख्या में प्राप्त हों.
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