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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

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Page 851

शीघ्रकारी, अपनी इच्छा पूरी करने में संलग्न, सांड के समान भयंकर, शत्रुओं के हंता,
मनुष्यों को क्षुब्ध करने वाले, युद्ध में शत्रुओं का आह्वान करने वाले, आंखें न झपकाने वाले,
बिना किसी सहायक के कार्य पूर्ण करने वाले एवं वीर इंद्र ने शत्रुओं की सौ सेनाओं को एक
साथ जीत लिया था. (२)
संक्रन्दनेनानिमिषेण जिष्णुना ऽ योध्येन दुश्च्यवनेन धृष्णुना.
तदिन्द्रेण जयत तत् सहध्वं युधो नर इषुहस्तेन वृष्णा.. (३)
युद्ध में शत्रुओं को रुलाने वाले, निमिषहीन नयनों वाले, जयशील, युद्ध में प्रहार करने
वाले, दुःख से विचल करने योग्य, शत्रु का वार सहन करने वाले, धनुर्धारी तथा मनचाही वर्षा
करने वाले इंद्र की सहायता से हमें विजय प्राप्त हो. हे योद्धाओ! उन्हीं इंद्र की सहायता शत्रु
को पराजित करे. (३)
स इषुहस्तैः स निषङ्गिभिर्वशी संस्रष्टा स युध इन्द्रो गणेन.
संसृष्टजित् सोमपा बाहुशर्यु १ ग्रधन्वा प्रतिहिताभिरस्ता.. (४)
खड्ग धारण करने वाले एवं बाण धारण करने वाले इंद्र अपने वीर अनुचरों को शत्रुओं
के सामने भेजते हैं. इंद्र युद्ध की इच्छा से आने वाले शत्रुओं पर इसी प्रकार विजय प्राप्त
करते हैं. सोमपान करने वाले इंद्र शत्रुओं के समूहों को जीतने वाले, बाहुबल से युक्त, भयंकर
धनुष वाले एवं दूसरों के शरीरों पर मारे गए बाणों से उन के संहारक हैं. हे वीरो! तुम इस
प्रकार के इंद्र की सहायता से जय प्राप्त करो. (४)
बलविज्ञायः स्थविरः प्रवीरः सहस्वान् वाजी सहमान उग्रः.
अभिवीरो अभिषत्वा सहोजिज्जैत्रमिन्द्र रथमा तिष्ठ गोविदन्.. (५)
शत्रुओं के बल को जानने वाले, पुरातन, उग्र, बलवान वीरों के स्वामी, पराजित करने
की शक्ति वाले, वेगवान, शत्रुओं को अपमानित करने वाले, शत्रुओं की सेना के विजेता एवं
दूसरों की गायों को अपनी जानने वाले हे इंद्र! तुम हमारी सहायता के लिए अपने जयशील
रथ पर बैठने योग्य हो. (५)
इमं वीरमनु हर्षध्वमुग्रमिन्द्रं सखायो अनु सं रभध्वम्.
ग्रामजितं गोजितं वज्रबाहुं जयन्तमज्म प्रमृणन्तमोजसा.. (६)
हे समान बुद्धि और कर्म वाले योद्धाओ! तुम सब इस शत्रु को पराजित करने में समर्थ,
वीर एवं उग्र इंद्र को आगे कर के उत्साह वाले बनो. शत्रु के विनाश के लिए उद्योगशील इंद्र के
साथ तुम भी उद्योग करो. इंद्र शत्रुओं के समूह के विजेता, शत्रुओं की गायों के विजेता एवं
हाथ में वज्र धारण करने वाले हैं. इंद्र शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाले एवं अपनी शक्ति से
शत्रुओं की सेनाओं का विनाश करने वाले हैं. (६)
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