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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

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Page 822

ध्यान करते हुए ऊपर स्थित स्वर्गलोक में यजमान को मनचाहा फल प्रदान करे. (५)
ध्रुव आ रोह पृथिवीं विश्वभोजसमन्तरिक्षमुपभृदा क्रमस्व.
जुहु द्यां गच्छ यजमानेन साकं स्रुवेण वत्सेन दिशः प्रपीनाः सर्वा
धुक्ष्वाह्णीयमानः.. (६)
हे स्रुवा नामक चम्मच! तू पृथ्वी पर आरोहण कर और यजमान भी पृथ्वी पर प्रतिष्ठित
रहे. हे उपभृत नाम के पात्र! तू अंतरिक्ष पर आरोहण कर. हे जुहू नामक पात्र! तू यजमान के
साथ द्युलोक अर्थात् स्वर्ग को गमन कर तथा सभी दिशाओं से मनचाहे फलों का दोहन कर.
(६)
तीर्थैस्तरन्ति प्रवतो महीरिति यज्ञकृतः सुकृतो येन यन्ति.
अत्रादधुर्यजमानाय लोकं दिशो भूतानि यदकल्पयन्त.. (७)
लोग तीर्थों तथा यज्ञादि कर्मों के द्वारा बड़ीबड़ी विपत्तियों से पार हो जाते हैं. इस प्रकार
विचार करने वाले तथा यज्ञ कर्म करते हुए पुरुष जिस मार्ग से स्वर्ग को जाते हैं, उस मार्ग को
खोजते हुए यज्ञ कर्ता इस यजमान के लिए वह मार्ग खोलें. (७)
अङ्गिरसामयनं पूर्वो अग्निरादित्यानामयनं गार्हपत्यो दक्षिणानामयनं
दक्षिणाग्निः.
महिमानमग्नेर्विहितस्य ब्रह्मणा समङ्गः सर्व उप याहि शग्मः.. (८)
आंगिरसों का मार्ग पूर्व के नाम की अग्नि है. आदित्यों का मार्ग गार्हपत्य अग्नि है. यज्ञ
कार्य में दक्ष जनों का मार्ग दक्षिणा अग्नि है. वेदमंत्रों के द्वारा यज्ञ में स्थापित की गई अग्नि
की महिमा को दृढ़ अंगों तथा पूर्ण शरीर वाला तू प्राप्त कर. (८)
पूर्वो अग्निष्ट्वा तपतु शं पुरस्ताच्छं पश्चात् तपतु गार्हपत्यः. दक्षिणाग्निष्टे
तपतु
शर्म वर्मोत्तरतो मध्यतो अन्तरिक्षाद् दिशोदिशो अग्ने परि पाहि घोरात्..
(९)
हे भस्म होते हुए प्रेत! पूर्व की अग्नि तुझे आगे से सुखपूर्वक संतप्त करे. गार्हपत्य
अग्नि तुझे पीछे से सुखपूर्वक तपाए. दक्षिणाग्नि तेरे लिए सुख रूप हो तथा तेरा कवच बन
कर तुझे तपाए. हे अग्नि! तू उत्तर दिशा से, दिशाओं के बीच से, अंतरिक्ष से तथा प्रत्येक
दिशा से आने वाले हिंसक से हमारी ठीक से रक्षा करे. (९)
यूयमग्ने शांतमाभिस्तनूभिरीजानमभि लोकं स्वर्गम्.
अश्वा भूत्वा पृष्टिवाहो वहाथ यत्र देवैः सधमादं मदन्ति.. (१०)
हे गार्हपत्य आदि अग्नियो! तुम पीठ से वहन करने वाले घोड़ों के समान बन कर अपने
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