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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

Page 767 of 1063

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Page 767

सुयामंश्वाक्षुष.. (७)
इदमह मामुष्यायणे ३ मुष्याः पुत्रे दुष्षप्न्यं मृजे.. (८)
हे उत्तम नियामक और निरीक्षक! मैं बुरे स्वप्न से होने वाले फल को अमुक गोत्र वाले
तथा अमुक स्त्री के पुत्र के पास भेजता हूं. (७-८)
यददो अदो अभ्यगच्छन् यद् दोषा यत् पूर्वा रात्रिम्.. (९)
यज्जाग्रद यत् सुप्तो यद् दिवा यन्नक्तम्.. (१०)
यदहरहरभिगच्छामि तस्मादेनमव दये.. (११)
मैं पहली रात में अमुकअमुक कर्म कर चुका हूं. जाग्रतावस्था में, सुषुप्तावस्था में, दिन
में अथवा रात्रि में मैं नित्यप्रति जिस पाप और दोष को प्राप्त करता हूं, उन्हीं के द्वारा मैं उस
बुरे स्वप्न को नष्ट करता हूं. (९-११)
तं जहि तेन मन्दस्व तस्य पृष्टीरपि शृणीहि.. (१२)
हे देव! उस शत्रु की हिंसा करो, उस के साथ चलो तथा उस की पसलियों को तोड़ दो.
(१२)
स मा जीवीत् तं प्राणो जहातु.. (१३)
वह प्राणहीन हो जाए, वह जीवित न रहे. (१३)
सूक्त-८ देवता—बुरे स्वप्न का नाश
जितमस्माकमुद्भिन्नमस्माकमृतमस्माकं तेजो ऽ स्माकं ब्रह्मास्माकं
स्वरस्माकं
यज्ञो ३ ऽ स्माकं पशवो ऽ स्माकं प्रजा अस्माकं वीरा अस्माकम्.. (१)
हमारा उदय हो. हम सत्य को प्राप्त करें, हमारा तेज बढ़े. हमारा ज्ञान बढ़े तथा हमारे
उत्तम प्रकाश में वृद्धि हो. हमारे यज्ञ सफल हों, हमारे अधिकार में पशु हों, हमारी संतान की
वृद्धि हो. हमारे लोग वीर हों. (१)
तस्मादमुं निर्भजामो ऽ मुमामुष्यायणममुष्याः पुत्रमसौ यः.. (२)
इस अपराध के कारण हम शत्रु पर आक्रमण करते हैं. इस गोत्र वाला तथा इस का पुत्र
हमारा शत्रु है. (२)
स ग्राह्याः पाशान्मा मोचि.. (३)
वह रोग के पाशों से न छूट सके. (३)
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