अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextस्वधया परिहिता श्रद्धया पर्यूढा दीक्षया गुप्ता यज्ञे प्रतिष्ठिता लोको
निधनम्.. (३)
यह धेनु श्रद्धा से व्याप्त, स्वधा से युक्त और दीक्षा के द्वारा रक्षित है. यह मन से
प्रतिष्ठित है. क्षत्रिय का इस की ओर दृष्टि डालना मृत्यु के समान है. (३)
ब्रह्म पदवायं ब्राह्मणो ऽ धिपतिः.. (४)
इस धेनु के द्वारा ब्रह्म पद प्राप्त होता है. इस गौ का स्वामी ब्राह्मण ही है. (४)
तामाददानस्य ब्रह्मगवीं जिनतो ब्राह्मणं क्षत्रियस्य.
अप क्रामति सूनृता वीर्यं १ पुण्या लक्ष्मीः.. (५-६)
जो क्षत्रिय ब्राह्मण की इस प्रकार की गौ का अपहरण करता है और ब्राह्मण को दुखी
करता है, उस की लक्ष्मी, शक्ति और प्रिय वाणी पलायन कर जाती है. (५-६)
सूक्त-६ देवता—ब्रह्मगवी
ओजश्च तेजश्च सहश्च बलं च वाक् चेन्द्रियं च श्रीश्च धर्मश्च. (१)
ब्रह्म च क्षत्रं च राष्ट्रं च विशश्च त्विषिश्च यशश्च वर्चश्च द्रविणं च. (२)
आयुश्च रूपं च नाम च कीर्तिश्च प्राणश्चापानश्च चक्षुश्च श्रोत्रं च. (३)
पयश्च रसश्चान्नं चान्नाद्यं चर्त्तं च सत्यं चेष्टं च पूर्तं च प्रजा च पशवश्च. (४)
तानि सर्वाण्यप क्रामन्ति ब्रह्मगवीमाददानस्य जिनतो ब्राह्मणं क्षत्रियस्य.
(५)
उस क्षत्रिय के ओज, तेज, ब्रह्म, वाणी, इंद्रियों, लक्ष्मी, धर्म, वेद, क्षात्र शक्ति, राष्ट्र, हवि,
यश, पराक्रम, धन, आयु, रूप, नाम, कीर्ति, नेत्र, कान, दूध, रस, अन्न, अग्नि, सत्य, इष्ट, पूर्त,
प्रजा आदि सभी छिन जाते हैं. जो ब्राह्मण गौ का अपहरण करता है. वह अपनी आयु को
क्षीण करता है. (१-५)
सूक्त-७ देवता—ब्रह्मगवी
सैषा भीमा ब्रह्मगव्य १ घविषा साक्षात् कृत्या कूर्ल्बजमावृता.. (१)
ब्राह्मण की यह धेनु विराजमान होती है. कूर्ल्बज पाप से ढके हुए हिंसा करने वाले विष
से युक्त हुई यह धेनु कृत्या के समान हो जाती है. (१)