अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextसमर्थ न हो. (१)
ये वो देवाः पितरो ये च पुत्राः सचेतसो मे शृणुतेदमुक्तम्.
सर्वेभ्यो वः परि ददाम्येतं स्वस्त्ये नं जरसे वहाथ.. (२)
हे देवो! आप के जो पितर एवं पुत्र हों, वे भी इस पुरुष के विषय में की गई मेरी प्रार्थना
पर ध्यान दें. दीर्घ आयु की कामना करने वाले इस पुरुष को मैं आप सब को सौंपता हूं. इस
की वृद्धावस्था तक आप इस का कल्याण करें. (२)
ये देवा दिविष्ठ ये पृथिव्यां ये अन्तरिक्ष ओषधीषु पशुष्वप्स्व१न्तः.
ते कृणुत जरसमायुरस्मै शतमन्वान् परि वृणक्तु मृत्यून्.. (३)
जो देव स्वर्ग में एवं पृथ्वी पर निवास करते हैं, वायु आदि जो देव अंतरिक्ष में गमन
करते हैं तथा जो देव ओषधियों, पशुओं एवं जलों में स्थित हैं, वे सब देव इस दीर्घ आयु की
कामना करने वाले पुरुष को वृद्धावस्था पर्यंत आयु प्रदान करें एवं इसे मृत्यु से बचाएं. (३)
येषां प्रयाजा उत वानुयाजा हुतभागा अहुतादश्च देवाः.
येषां वः पञ्च प्रदिशो विभक्तास्तान् वो अस्मै सत्रसदः कृणोमि.. (४)
जिस देव के निमित्त पंचयाग किए जाते हैं, वह अग्नि देव; जिन देवों के निमित्त बाद
वाले तीन यज्ञ किए जाते हैं, वह इंद्र आदि देव; जो बलि का अपहरण करते हैं, दिशाओं के
स्वामी देव हैं, इन सब को एवं इन के अतिरिक्त जो देव हैं, उन को भी मैं इस दीर्घ आयु चाहने
वाले पुरुष के समीप बैठने के लिए नियुक्त करता हूं. (४)
सूक्त-३१ देवता—आशापाल अर्थात्
वास्तोष्पति
आशानामाशापालेभ्यश्चतुर्भ्यो अमृतेभ्यः.
इदं भूतस्याध्यक्षेभ्यो विधेम हविषा वयम्.. (१)
पूर्व आदि दिशाओं की रक्षा करने वाले एवं कभी न मरने वाले इंद्र, यम आदि चार देवों
के लिए हम इस भाग में मंत्रों के साथ आहुति देते हैं. वे देव सभी प्राणियों के स्वामी हैं. (१)
य आशानामाशापालाश्चत्वार स्थन देवाः.
ते नो निर्ऋत्याः पाशेभ्यो मुञ्चतांहसो अंहसः.. (२)
जो दिशाओं का पालन करने वाले इंद्र आदि चार देव हैं, वे हमें मृत्यु देव के पाशों से
छुड़ाएं तथा पापों से हमारी रक्षा करें. (२)
अस्रामस्तवा हविषा यजाम्यश्लोणस्तवा घृतेन जुहोमि.
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