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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

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यह ओदन स्वर्ग में अपनेआप को उसी प्रकार अनेक आकार वाला बना लेने में समर्थ
है. जिस प्रकार आत्मा ज्ञानी को अनेक प्रकार का बना देता है तथा कालिमा को शुद्ध करता
जाता है, उसी प्रकार मैं तेरे रूप को अग्नि में होम करता हूं. (५४)
प्राच्यै त्वा दिशे ३ग्नये ऽ धिपतये ऽ सिताय रक्षित्र आदित्यायेषुमते.
एतं परि दद्मस्तं नो गोपायतास्माकमैतो:.
दिष्टं नो अत्र जरसे नि नेषज्जरा मृत्यवे परि णो ददात्वथ पक्वेन सहं सं
भवेम.. (५५)
हम तुझे पूर्व दिशा, अग्नि, काले सर्प और आदित्य को दान करते हैं. तू हमारे यहां से
जाने तक इस पुरुष की रक्षा कर. इसे वृद्धावस्था तक हम को माननीय रूप में प्राप्त कराओ.
हमारी वृद्धावस्था ही इसे मृत्यु प्रदान करें. हम इस पके हुए ओदन सहित स्वर्ग वासी होते हुए
आनंद को प्राप्त करें. (५५)
दक्षिणायै त्वा दिश इन्द्राय ऽ धिपतये तिरश्चिराजये रक्षित्रे यमायेषुमते.
एतं परि दद्मस्तं नो गोपायतास्माकमैतो:.
दिष्टं नो अत्र जरसे नि नेषज्जरा मृत्यवे परि णो ददात्वथ पक्वेन सह सं
भवेम.. (५६)
हम तुझे दक्षिण दिशा, इंद्र, तिरश्री सर्प और यम को प्रदान करते हैं. तू हमारे यहां से
जाने तक इस की रक्षा कर. इसे वृद्धावस्था तक हम भाग्य रूप में प्राप्त करें. हमारी
वृद्धावस्था इसे मृत्यु प्रदान करे. (५६)
प्रतीच्यै त्वा दिशे वरुणाय ऽ धिपतये पृदाकवे रक्षित्रे ऽ न्नायेषुमते.
एतं परि दद्मस्तं नो गोपायतास्माकमैतो:.
दिष्टं नो अत्र जरसे नि नेषज्जरा मृत्यवे परि णो ददात्वथ पक्वेन सह सं
भवेम.. (५७)
हम तुझे पश्चिम दिशा, वरुण, पृदाकू सर्प तथा वरुणधारी अन्न को प्रदान करते हैं. तू
हमारे यहां से प्रस्थान करने तक इस की रक्षा कर. इसे वृद्धावस्था तक भाग्य रूप में हमें
प्राप्त करा. हमारी वृद्धावस्था ही इसे मृत्यु प्रदान करे और मरने पर हम इस पके हुए ओदन
सहित स्वर्ग में जा कर आनंद प्राप्त करें. (५७)
उदीच्यै त्वा दिशे सोमायाधिपतये स्वजाय रक्षित्रे ऽ शन्या इषमत्यै.
एतं परि दद्मस्तं नो गोपायतास्माकमैतो:.
दिष्टं नो अत्र जरसे नि नेषज्जरा मृत्यवे परि णो ददात्वथ पक्वेन सह सं
भवेम.. (५८)
हम तुझे उत्तर दिशा, सोम, स्वज नामक सर्प एवं अशनि को प्रदान करते हैं. तू हमारे
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