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अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,063 pages

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हमारा जो शत्रु हमारी इस आहुति को पा कर इस की गति प्रतिनिवृत्त कर के हमारे साथ युद्ध
करना चाहता है, इस प्रकार के शत्रु को भी मांसभक्षी पशु खाएं. (२६)
यां देवा अनुतिष्ठन्ति यस्या नास्ति विराधनम्.
तयेन्द्रो हन्तु वृत्रहा वज्रेण त्रिषन्धिना.. (२७)
जिस दधि मिश्रित भात की आहुति को देवगण वज्र बनाने का साधन बनाते हैं, जिस
आयुध की असमानता नहीं है. उस आहुति द्वारा उत्पन्न वज्र से वृत्र असुर का वध करने वाले
इंद्र इस शत्रु सेना का वध करें. (२७)
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